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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 28, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अपनों ने ही की थी गद्दारी! पहलगाम आतंकी हमले में 15 कश्मीरी चिह्नित, पाकिस्तानी आतंकियों की मदद का शक

Published: Mon, 28 Apr 2025 09:03 AM (IST)

22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terrorists Attack) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से ...और पढ़ें

पहलगाम हमले के आतंकी घने जगंलों में छिपे हो सकते हैं। फाइल फोटो
पहलगाम हमले के आतंकी घने जगंलों में छिपे हो सकते हैं। फाइल फोटो

HighLights

  1. पहलगाम आतंकी हमले की जांच जारी
  2. पूछताछ के लिए 200 संदिग्ध हिरासत में
  3. आतंकियों ने 26 लोगों की ली थी जान

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (Pahalgam Terrorists Attack) में हुए आतंकी हमले के बाद से इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के आधार पर 15 स्थानीय कश्मीरी ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) और आतंकी सहयोगियों की पहचान मुख्य संदिग्धों के रूप में की गई है, जिनपर शक है कि उन्होंने पहलगाम नरसंहार में पाकिस्तानी हमलावरों की मदद की थी।

3 प्रमुख संदिग्धों को पकड़ा, दो की तलाश जारी

माना जा रहा है कि उन्होंने संसाधनों की व्यवस्था करने के साथ-साथ पाकिस्तान से हथियारों की खेप भी प्राप्त की थी। सूत्रों ने कहा कि बहु-एजेंसी जांच ने पांच प्रमुख संदिग्धों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिनमें से तीन को पकड़ लिया गया है और अंततः उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। पुलिस दो अन्य OGW की तलाश कर रही है।

हमले के दिन और उससे पहले सभी पांच लोग आसपास के क्षेत्र में थे। उनके फोन इलाके में सक्रिय थे। इलेक्ट्रॉनिक निगरानी ने एक चैट को सामने लाया, जिसमें हिरासत में लिए गए तीन प्रमुख संदिग्ध पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकवादियों और उनकी मदद करने के तरीके के बारे में एक-दूसरे से बात कर रहे थे।

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पूछताछ के लिए 200 से अधिक संदिग्ध हिरासत में

इस बीच, सूत्रों ने कहा कि हमले की संभावित घटनाओं का पता लगाने के लिए 200 से अधिक ओवरग्राउंड वर्कर्स को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। हमलावर अभी भी घने पहलगाम जंगलों में छिपे हो सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि पहलगाम हमले में सभी पांचों की भूमिका की ओर इशारा करने वाले पर्याप्त साक्ष्य हैं।

एनआईए, जम्मू-कश्मीर पुलिस, खुफिया ब्यूरो और रॉ के जांचकर्ताओं वाली एक संयुक्त पूछताछ टीम द्वारा 10 अन्य ओजीडब्ल्यू से पूछताछ की जा रही है, क्योंकि उन्हें अतीत में कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवादियों की मदद करने के लिए जाना जाता है और वे 22 अप्रैल को हमले की जगह के आसपास के क्षेत्र में थे।

15 स्थानीय आतंकवादी सहयोगी दक्षिण कश्मीर से हैं और ये सभी पहले से ही जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा ओजीडब्ल्यू के रूप में सूचीबद्ध हैं और माना जाता है कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण कश्मीर में कई हमलों में शामिल पाकिस्तानी आतंकवादियों की मदद की।

इन आतंकवादी सहयोगियों ने पाकिस्तानी आतंकियों के लिए संसाधनों में मदद की, जंगलों में उनका मार्गदर्शन किया और यहां तक ​​कि आतंकवादी हमलों में इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान से हथियारों की खेप भी प्राप्त की।

हिरासत में लिए गए ओवरग्राउंड वर्कर्स से हो रही है पूछताछ

पहलगाम हमला (Pahalgam Terrorists Attack) करने वाली टीम के लिए संसाधनों की व्यवस्था करने और सूत्रधार के रूप में उनकी भूमिका की ओर इशारा करने वाले पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं, जिसमें 4-5 आतंकवादी शामिल थे, जिनमें से कम से कम दो पाकिस्तानी और दो स्थानीय कश्मीरी थे।

एक अधिकारी ने कहा कि हम हिरासत में लिए गए 15 ओजीडब्ल्यू से और अधिक जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि साजिश की कड़ियों को जोड़ा जा सके और फिर उनकी संभावित गिरफ्तारी पर फैसला लिया जा सके।

शनिवार तक, पहलगाम हमले से जुड़ी घटनाओं के क्रम को उजागर करने में मदद के लिए 200 से अधिक ओजीडब्ल्यू को हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ की गई। लगभग 20-25 ओजीडब्ल्यू को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। ये ओजीडब्ल्यू पाकिस्तानी आतंकवादियों के संपर्क में रहने, उन्हें शरण देने और उनके लिए मार्गदर्शक के रूप में काम करने के लिए जाने जाते हैं।

घने जंगलों में छिपे हो सकते हैं आतंकी

हम ओजीडब्ल्यू डेटाबेस की छानबीन कर रहे हैं, उनमें से 1,500 से अधिक से पूछताछ की गई है, और अब 15 संभावित संदिग्धों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एक अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा, दक्षिण कश्मीर में सक्रिय अन्य ओजीडब्ल्यू से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि इलाके में देखे गए पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान और उनके संभावित ठिकानों के बारे में जानकारी मिल सके।

सूत्रों ने बताया कि बैसरन घाटी के जंगलों में भागे हुए आतंकवादियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान को और तेज कर दिया है। आस-पास के शहरों और जिलों में तलाशी अभियान के दौरान हमलावरों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है, लेकिन संदेह है कि वे अभी भी घने जंगलों में छिपे हो सकते हैं, जिसमें घास का मैदान भी शामिल है।

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