Jammu Kashmir News: एलजी मनोज सिन्हा दे रहे गरीबों को आश्वासन, प्रशासन चला रहा डंडा
ज्यौड़ियां के रतनपुर गांव में तीस परिवारों से वापस ली गई सरकारी जमीन-ग्रामीणों ने इस कार्रवाई के विरोध में राजस्व विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई के विरोध में राजस्व विभाग के खिलाफ प्रदर्शन भी किया लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।

ज्यौड़ियां,संवाद सहयोगी। सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के मामले में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल लगातार यह कहते आ रहे हैं कि गरीब व आम लोगों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। प्रशासन उन रसूखदारों पर कार्रवाई करने जा रहा है, जिन्होंने अपने प्रभाव से सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा है, इसके विपरीत प्रशासन का डंडा आम लोगों पर चल रहा है। शनिवार को राजस्व विभाग ने ज्यौड़ियां की बंदबाल पंचायत के रतनपुर गांव में 33 कनाल 18 मरले चराई व खेती योग्य जमीन पर स्टेट लैंड का बोर्ड लगा दिया।
यह भी पढ़ें: Punjab News: फिरौती के मामले में गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया जिला अदालत में पेश, दो दिन का मिला पुलिस रिमांड
ग्रामीणों ने इस कार्रवाई के विरोध में राजस्व विभाग के खिलाफ प्रदर्शन भी किया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। गांव वालों की मानें तो इस जमीन पर गांव के तीस परिवार खेतीबाड़ी कर अपने परिवारों का भरण-पोषण करते थे। जमीन छीने जाने से उनका रोजी-रोटी का जरिया खत्म हो गया है।
ये है मामला
रतनपुर गांव के निवासी संजय शर्मा ने कहा कि 33 कनाल 18 मरले जमीन किसी एक आदमी की नहीं थी। गांव के 30 परिवारों का गुजर बसर इस पर निर्भर था। एक परिवार के पास एक-दो कनाल ही जमीन थी। वहीं, पुष्पा देवी ने कहा कि वह विधवा हैं और उनके दो बेटे दिहाड़ी लगाते हैं। जो जमीन वापस ली गई है, उसमें से उनका परिवार दो कनाल जमीन में खेतीबाड़ी करता था। अब जमीन पर सरकारी बोर्ड लगा दिया गया है। पिछले 60 साल से हम इस जमीन पर खेतीबाड़ी करते आ रहे हैं, अब हम कहां जाएं।
यह भी पढ़ें: J&K News: भूस्खलन के कारण बंद हुआ जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग फिर से खुला, यातायात हुआ शुरू
वहीं, संजय शर्मा ने कहा कि उपराज्यपाल ने साफ कहा है कि गरीबों को तंग नहीं किया जाएगा, तो फिर राजस्व विभाग गरीबों को क्यों तंग कर रहा है? जिन्होंने स्टेट लैंड पर दुकानें बनाकर बेची हैं, विभाग उनसे कोई पूछताछ क्यों नहीं कर रहा है। नायब तहसीलदार ओमप्रकाश ने कहा कि 33 कनाल 18 मरला सरकारी जमीन है। हमें सरकार से निर्देश मिले हैं कि ऐसी जमीनों को वापस लिया जाए। इसीलिए यह कदम उठाया गया है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।