जम्मू-कश्मीर में किस बात को लेकर नाराज जलशक्ति विभाग के कर्मचारी? 72 घंटे की हड़ताल पर जाने का किया एलान
जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 72 घंटे की हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारी 20 साल से अधिक समय से विभाग में काम कर रहे हैं लेकिन अभी तक उन्हें नियमित नहीं किया गया है। हड़ताल से जम्मू में पानी की आपूर्ति बाधित हो सकती है। सरकार से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए जाने पर कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।

संवाद सहयोगी, बिलावर। जल शक्ति विभाग के सीपी वर्कर आइटीआई डिप्लोमा होल्डर अस्थायी कर्मचारियों द्वारा अपनी लंबित मांगों के समर्थन में 20 मार्च शाम 8 बजे से 72 घंटे की काम छोड़ हड़ताल पर चले गए हैं।
पीएचई इप्लाइज यूनाइटेड फ्रंट के बिलावर उप जिला प्रधान बीरबल जलमेरिया ने गुरुवार को बिलावर में आयोजित बैठक में यह जानकारी दी। जल शक्ति विभाग के स्थायी कर्मचारियों ने कहा कि वे लोग 20 साल से ज्यादा समय से विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अभी तक उन लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता है।
20 मार्च से जम्मू में पानी बंद की कॉल
अस्थायी कर्मचारी व यूनाइटेड फ्रंट के सदस्यों ने कहा कि यूनाइटेड फ्रंट जम्मू की ओर से 20 मार्च से जम्मू में पानी बंद की कॉल दी गई है। इस दौरान कर्मचारी काम छोड़ हड़ताल पर जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला तब लिया गया है, जब सरकार ने उनकी जायज मांगों को दरकिनार किया है। जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारी कई महीनों से सरकार से अपने नियमित होने की मांग और 72 महीने का बकाया वेतन देने के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं।
यूनियन कर्मियों का पूरा सपोर्ट
इस बीच सरकार की ओर से कोई भी सकारात्मक कदम कर्मचारियों के लिए नहीं लिया गया है। वहीं यूनाइटेड फ्रंट के चेयरमैन महेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि विभाग के सेवानिवृत्त कर्मियों का पूरा समर्थन दैनिक वेतन भोगियों की 72 घंटे की हड़ताल को है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि दैनिक वेतन भोगियों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को बंद किया जाए और उन्हें जल्द से जल्द नियमित किया जाए।
यह हड़ताल 72 घंटों के लिए घोषित की गई है। सरकारी रवैये पर निर्भर करेगा कि हड़ताल कब समाप्त होगी। पीएचई इंप्लाइज यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले शुरू हुई इस हड़ताल को जम्मू संभाग के सभी जिलों के अलावा कश्मीर संभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने भी अपना समर्थन दिया है। फिलहाल जम्मू संभाग में डेलीवेजर कर्मचारियों ने काम बंद किया है। फ्रंट ने चार दिन पहले ही इस हड़ताल की घोषणा कर दी थी।
फ्रंट के नेता होशियार सिंह, मनोहरलाल शर्मा, रवि हंस, नवदीप सिंह और राजेंद्र सिंह ताज ने बताया कि 21 मार्च को सुबह 10 बजे बीसी रोड स्थित पुराने कार्यालय के बाहर सभी डेलीवेजन एकत्र होंगे। उन्होंने कहा कि पिछले तीस वर्ष से सरकार कमेटियां बनाकर उन्हें पक्का करने व मांगें पूरी करने संबंधी लालीपाप थमाती आ रही है। अब आर-पार की लड़ाई का समय आ गया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुछ दिन पहले विधानसभा सत्र के दौरान इस संबंध में कमेटी बनाने की घोषणा की थी। इस पर फ्रंट का कहना है कि मुख्यमंत्री उन्हें लद्दाख की तर्ज पर न्यूनतम वेतन देने समेत अन्य मांगों को मान लें तो फिर वे हड़ताल समाप्त कर सकते हैं। कमेटी बनाने से बात नहीं बनेगी। कर्मचारियों का कहना था कि उनको लद्दाख यूटी की तर्ज पर मानदेय नहीं मिल रहा है। यूटी बनने के बाद कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उन्हें 500 रुपये दिहाड़ी मिलेगी, लेकिन राज्य नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ। महज 11 रुपये का इजाफा 2023 में हुआ।
500 रुपये मिलती है दिहाड़ी
वहीं, यूटी लद्दाख में दिल्ली की तर्ज पर 500 रुपये दिहाड़ी मिलती है। पंपिंग स्टेशनों के बाहर पुलिस तैनात जलशक्ति विभाग ने डेलीवेजरों की हड़ताल को देखते हुए पूरी तैयारी की है। पानी की सप्लाई के लिए टैंकरों को तैयार रखा गया है।
पानी की आपूर्ति सुचारु करने के लिए स्वयं सेवियों की मदद लेने की भी तैयारी है। इतना ही नहीं स्थायी कर्मचारियों से भी काम लिया जाएगा। विभाग ने कर्मचारियों की हड़ताल को ध्यान में रखते हुए कंपनी बाग व अन्य पंपिंग स्टेशनों के बाहर पुलिस तैनाती कर दी है, ताकि डेलीवेजर पेयजल सप्लाई प्रभावित नहीं कर सकें।
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संभलकर करें पानी का उपयोग
जलशक्ति विभाग में जम्मू संभाग में 20 हजार और कश्मीर में 10 हजार डेलीवेजर हैं। कुल कर्मचारियों में से महज 10 प्रतिशत ही स्थायी हैं। पेयजल आपूर्ति का 90 प्रतिशत काम डेलीवेजर ही करते हैं। ऐसे में यदि सभी डेलीवेजर हड़ताल पर चले गए तो कई इलाकों में रोजाना जलापूर्ति कर पाना विभाग के लिए बहुत मुश्किल होगा।
सिर्फ 10 प्रतिशत स्थायी कर्मचारियों के सहारे पूरे जम्मू संभाग में जलापूर्ति करने की तैयारी करने का दावा विभाग कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि इसमें बहुत मुश्किल आएगी। ऐसे में लोगों को स्वयं ही हालात को समझते हुए पानी सोच-समझकर उपयोग करना होगा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगे -वर्षों से इंतजार कर रहे कर्मियों को नियमित किया जाए। -70 महीने से लंबित वेतन जारी किया जाए। -लद्दाख की तर्ज पर न्यूनतम वेतन 311 से बढ़ाकर 700 रुपये प्रतिदिन किया जाए। -डेलीवेजर्स को इंप्लाइज इंश्योरेंस स्कीम के अधीन लाने के साथ ईपीएफ काटा जाए। -लैंड डोनर को नौकरी दी जाए।
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