राज्यसभा चुनाव से पहले NC-Congress आमने-सामने, चार सीटों के लिए होना है चुनाव; बीजेपी ने भी शुरू की गोलबंदी
जम्मू-कश्मीर की चार राज्यसभा (Jammu Kashmir Rajya Sabha Election) सीटों के लिए चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। राज्यसभा चुनाव को लेकर सभी दलों में हलचल तेज हो गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस तीनों सीटों पर जीत चाहती है वहीं कांग्रेस भी एक सीट के लिए जोर लगा रही है। भाजपा भी दो सीटें पक्की करने के लिए जोर लगाना शुरू दी है।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर की रिक्त पड़ी चार सीटों के लिए प्रदेश के राजनीतिक दलों के बीच हलचल शुरू हो चुकी है। हालांकि चुनाव आयोग ने इन सीटों के लिए चुनाव का एलान नहीं किया है, लेकिन गठबंधन में सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस अभी से सीटों के लिए आमने-सामने दिख रही हैं। नेकां चाहती है कि राज्यसभा में उसकी तीन सीटें पक्की हो जाएं।
वहीं, सूत्रों के अनुसार, छह विधायकों वाली कांग्रेस चाहती है कि राज्यसभा में उसको भी एक सीट मिले। इसे लेकर कांग्रेस से नेकां से बात भी की है। कांग्रेस पूर्व मंत्री सैफुद्दीन प्रो. सोज को राज्यसभा में भेजना चाहती है, लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रो. सोज या उनके पुत्र के नाम पर राजी नहीं है।
भाजपा से ये उम्मीदवार दौड़ में
वहीं, भाजपा नेताओं ने भी राज्यसभा में अपनी दो सीट पक्की करने के लिए गोलबंदी शुरू कर दी है। भाजपा में पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह, कविंद्र गुप्ता के अलावा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र रैना राज्यसभा सदस्य बनने की दौड़ में हैं।
फारूक अब्दुल्ला का राज्यसभा जाना लगभग तय
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला का राज्यसभा में जाना लगभग तय है। अन्य दो सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अजय सडोत्रा, सज्जाद अहमद किचलू, खालिद नजीब सोहारवर्दी, चौधरी मोहम्मद रमजान, आगा महमूद अपनी-अपनी दावेदारी जता रहे हैं।
आगा महमूद को छोड़कर अन्य चार नेकां नेता पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य में मंत्री भी रह चुके हैं और ये सभी वर्ष 2014 में भी और उसके बाद वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में भी हारे हैं।
आगा महमूद कश्मीर के प्रमुख शिया नेताओं में एक गिने जाते हैं और उन्होंने घाटी के विभिन्न इलाकों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रत्याशियों की जीत में शिया समुदाय के योगदान को सुनिश्चित बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में यह है दलीय स्थिति
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विभिन्न दलों की दलीय स्थिति के आधार पर नेशनल कान्फ्रेंस, माकपा और कांग्रेस गठबंधन के 49 सदस्य हैं और पांच निर्दलीय का भी उन्हें समर्थन प्राप्त है।
वहीं, भाजपा के 28 सदस्य हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन तीन सीटों पर चुनाव जीतने में पूरी तरह समर्थ है जबकि एक सीट पर भाजपा काबिज हो सकती है। कुल विधानसभा सीटें 90 हैं।
फरवरी 2021 से लंबित हैं राज्यसभा की चार सीटों के चुनाव
जम्मू-कश्मीर में अंतिम बार राज्यसभा के लिए चुनाव फरवरी 2015 में हुए थे। उस समय पीडीपी-भाजपा गठबंधन के तीन उम्मीदवार फैयाज मीर, नजीर अहमद लावे और शमशेर सिंह मन्हास जीते थे। नेशनल कान्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन की तरफ से गुलाम नबी आजाद राज्यसभा के लिए चुने गए थे।
इन सभी का कार्यकाल फरवरी 2021 को समाप्त हो चुका है और तभी से जम्मू-कश्मीर की राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव लंबित हैं। हालांकि मौजूदा समय में भाजपा नेता गुलाम अली खटाना राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन वह निर्वाचित नहीं बल्कि एक नामित सदस्य हैं।
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दिसंबर या जनवरी में चुनाव का हो सकता है एलान
जम्मू कश्मीर में जून 2018 में तत्कालीन पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के गिर जाने और उसके बाद 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर राज्य के दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित होने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में 16 अक्टूबर 2024 तक कोई निर्वाचित सरकार नहीं थी।
जम्मू-कश्मीर में इसी वर्ष सितंबर-अक्टूबर में विधानसभा चुनाव हुए हैं। राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव में सिर्फ विधायक ही मतदान करते हैं। अब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की पूर्ण बहाली के बाद राज्यसभा चुनाव का भी जल्द एलान होने की संभावना है।
सूत्रों ने बताया कि अगले माह या जनवरी में राज्यसभा चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग अधिसूचना जारी कर सकता है। इसे देखते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा अपनी पार्टी के लिए एक सीट के लिए नजर गड़ाए हैं।

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