यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 18, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दुलत की किताब पर उमर अब्दुल्ला का पलटवार, महबूबा मुफ्ती को याद दिलाया बुक का पुराना किस्सा; पूछा- क्या यह भी सच?
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती पर निशाना साधा। उमर ने कहा कि अगर महबूबा मुफ्ती ...और पढ़ें

पीटीआई, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सत्ता संभालने के बाद से ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले आरक्षण, फिर राज्य का दर्जा, वक्फ संशोधन कानून और अब पूर्व रॉ प्रमख एएस दुलत की किताब ‘द चीफ मिनिस्टर एंड द स्पाई’ से सियासत गर्म है।
इस किताब में डॉ. फारूक अब्दुल्ला को अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थक बताने से संगठन में असंतोष साफ नजर आ रहा है। यही कारण है कि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती से लेकर अन्य विपक्षी दल नेकां को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।
इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के बारे में पूर्व रॉ प्रमुख ए एस दुलत की नवीनतम पुस्तक पर उनकी टिप्पणी के लिए निशाना साधा।
'आपके पिता को लेकर जो लिखा क्या वो भी सच?'
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, अगर महबूबा मुफ्ती मानती हैं कि दुलत ने जो कुछ लिखा है, वह सब सच है, तो क्या हमें उनकी पहली किताब में उनके पिता के बारे में जो लिखा है, उसे भी सच मानना चाहिए?
मुफ्ती के पिता दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री थे। महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि वह रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख दुलत द्वारा अपनी नवीनतम पुस्तक में फारूक अब्दुल्ला द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का निजी तौर पर समर्थन करने के बारे में किए गए खुलासे से हैरान नहीं हैं। इसे लेकर उमर ने कहा,
अगर महबूबा मुफ्ती जी को लगता है कि दुलत द्वारा लिखी गई हर बात सच है, तो क्या हमें उनके पिता के बारे में उनकी पहली किताब में लिखी गई बातों को भी सच मान लेना चाहिए? अगर हम उसे सच मानते हैं, तो महबूबा जी लोगों को कैसे समझा सकती हैं? उन्हें कृपया इसका जवाब देना चाहिए।
किताब में क्या था?
उमर यहां एएस दुलत की 2015 में पब्लिश हुई किताब - कश्मीर- द बाजपेयी इयर्स की बात कर रहे थे। इस किताब में मुफ्ती मोहम्मद सईद को बेटी और महबूबा मुफ्ती की बहन रुबिया सईद के (1989) अपहरण का जिक्र किया गया था। उस समय मुफ्ती सईद केंद्र सरकार में गृहमंत्री थे।
किताब में बताया गया कि उस दौरान फारूक अब्दुल्ला ने आतंकियों को न छोड़ने की बात कही थी। लेकिन सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया। इसी तरह किताब में अलगाववादी नेता सईद अली शाह गिलानी और मुफ्ती मोहम्मद सईद के बीच रिश्ते का भी जिक्र था।
इससे पहले पीडीपी प्रमुख ने श्रीनगर में कहा था,
दुलत के खुलासे मेरे लिए कोई नई बात नहीं है। यह पिता-पुत्र जोड़ी (फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला) 3 अगस्त, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने गए थे। फारूक साहब 5 अगस्त, 2019 को संसद भी नहीं गए। इसलिए मेरे लिए कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है।
दुलत को लेकर क्या बोले अब्दुल्ला?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि किताबों की बिक्री बढ़ाने के लिए तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना दुलत की आदत है। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे दोस्तों के होते हुए दुश्मनों की क्या जरूरत है?
दुलत पर कटाक्ष करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि जब किताबें बेचने की बात आती है तो वह सच्चाई के साथ खड़े नहीं होते। उन्होंने कहा कि अपनी पहली किताब में भी उन्होंने किसी को नहीं बख्शा था। इस किताब में भी उन्होंने फारूक साहब को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा, खैर, कम से कम अब फारूक साहब को दुलत की असली पहचान समझ में आ गई है। उन्हें अब इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि जब किताब रिलीज होगी तो फारूक साहब उनके साथ खड़े होंगे।
भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया था और तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। मुफ्ती ने यह भी दावा किया कि 2014 में उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
