'हिमाचल सरकार के फैसलों से पेंशनर्स हक से वंचित', संयुक्त संघर्ष समिति ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम; इन निर्णयों को बताया गलत
Himachal Pradesh News, हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार के हालिया फैसलों की कड़ी निंदा की है। समिति ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ...और पढ़ें

हिमाचल पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार को आंदोलन की चेतावनी दे दी है। प्रतीकात्मक फोटो
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार की ओर से हाल ही में लिए गए फैसलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सरकार की नीतियों को पेंशनरों और आम जनता के खिलाफ बताया है। समिति ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन एवं सदस्यों की पेंशन में की गई भारी वृद्धि, सेवानिवृत्त अधिकारियों की पुनः नियुक्ति व मंत्रियों के लिए नई महंगी गाड़ियों की खरीद को अनुचित करार दिया है।
आयोग सदस्यों की पेंशन बढ़ाने पर साधा निशाना
समिति के चेयरमैन सुरेश ठाकुर, महासचिव इंद्र पॉल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा व मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी ने कहा कि आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की पेंशन 8,000 और 7,500 से बढ़ाकर क्रमश 48,000 और 45,000 करना तथा मूल पेंशन में 6 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर वित्तीय संकट का हवाला देकर लाखों पेंशनरों की वैधानिक देनदारियों का भुगतान नहीं कर रही है। वहीं, दूसरी ओर चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए फैसले ले रही है।
सरकार ने खजाने पर डाला अतिरिक्त बोझ
समिति के चेयरमैन सुरेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले भी निगमों, बोर्डों और विभागों में बड़ी संख्या में नियुक्तियां कर प्रदेश के खजाने पर बोझ डाला है। विधायकों और मंत्रियों के वेतन-भत्तों में लगभग 40 प्रतिशत वृद्धि भी चिंता का विषय है।
15 दिन का अल्टीमेटम
समिति ने 28 नवंबर 2025 को धर्मशाला में हुए पेंशनरों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए आश्वासन अब तक पूरे नहीं किए गए हैं। समिति ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों में मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो शिमला में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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