मंडी, फरेंद्र ठाकुर। जिले के सराजघाटी में आग की मशालों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर फागली उत्सव का भव्य आगाज हो गया है। ये उत्सव मंडी और कुल्लू जिले में आगामी तीन माह तक मनाया जाएगा। इस फागली उत्सव में ग्रामीण अश्लील गालियां देकर बुरी शक्तियों को भगाते हैं। यह परंपरा देव आज्ञा अनुसार इन दोनों जिलों में सदियों से चली आ रही है, जिसका लोग आज भी निर्वहन कर रहे हैं। बालीचौकी के देवाधार में लोगों ने धूमधाम से उत्सव मनाया।

आज भी संजोयी जा रही है पुरानी परंपरा

कुल्लू और मंडी जिलों से आए सैकड़ों लोग ऐतिहासिक पलों का गवाह बने। यह उत्सव देर रात तक चला। ग्रामीणों ने अग्निकुंड के चारों ओर एक भव्य नाटी भी डाली। राही, बेहड़, धार, परखोल, सुधराणी, बशुंघी, खलाओं, थाची, पंजाई, सोमगाड़, खणी, नौणा, कोटला, चकुरठा, फगवाना सहित अन्य गांवों में इस उत्सव की धूम रही। देवता के गूर भाग सिंह अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। ग्रामीण देव आज्ञा अनुसार इस प्राचीन परंपरा को आज भी संजोए हुए हैं।

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दस अवतारों की लीलाओं का प्रतीक

फागली उत्सव वास्तव में विष्णु नारायण भगवान की पौष माह के अंतिम सप्ताह में स्वर्गलोक की यात्रा और मकर संक्रांति की पूर्व संध्या को भूलोक पर वापसी के बाद उनके पहले धार्मिक अवतार समारोह के रूप में मनाया जाता है। फागली उत्सव विष्णु-नारायण भगवान के दस अवतारों की लीलाओं का प्रतीक है। उत्सव में देवता के गणों ने परंपरागत तरीके से ढोल, नगाड़े, करनाह्ली, शहनाई, डफला, भाणा, कांसा और काहुली की कलरव ध्वनि के साथ धूमधाम से गाए और देवता विष्णु-नारायण की पालकी के साथ देवक्रीड़ा में भाग लिया। सराजघाटी के रंजीत शर्मा, केहर सिंह, ओम प्रकाश, योग राज, आलम चंद, सुनील शर्मा, पुनीत कुमार, गुमान सिंह आदि देवलुओं का कहना है कि फागली उत्सव में विष्णु नारायण भगवान द्वारा रचाई गई लीलाओं का गुणगान 18 लोक गीतों के माध्यम से किया जाता है। 

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Posted By: Babita kashyap

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