Manimahesh Yatra: तबाही ने तोड़ दी परंपरा, मणिमहेश रवाना हुए संचुई के शिव चेले नहीं पहुंच सके डल झील तक
Manimahesh Yatra चंबा में भारी बारिश और भूस्खलन के बीच मणिमहेश यात्रा की परंपरा कायम रखने के लिए रवाना हुए शिव चेले व पुलिस दल डल झील तक नहीं पहुंच पाए हैं। चंबा चौगान में छड़ी यात्रा का पूजन किया गया। श्रद्धालुओं में मायूसी थी क्योंकि वे मणिमहेश नहीं पहुंच सके।

जागरण संवाददाता, चंबा। Manimahesh Yatra, हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा की पवित्र मणिमहेश यात्रा में इस बार सदियों पुरानी परंपरा टूट गई है। लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के कारण यात्रा मार्ग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। इस कारण मणिमहेश के लिए रवाना हुए संचुई के शिव चेले डल झील तक नहीं पहुंच पाए हैं।
बताया जा रहा है हड़सर के ऊपर से शिव चेले मार्ग न होने के कारण लौट आए हैं। यहां भारी बारिश के कारण चारों ओर तबाही का मंजर है। जगह-जगह सड़कें बंद हैं, श्रद्धालु फंसे हुए हैं और प्रशासन राहत व बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। ऐसे विकट हालात के बीच मणिमहेश यात्रा की सदियों पुरानी परंपरा भी टूट गई है।
राधा अष्टमी के पावन अवसर पर संचुई गांव के शिव चेले मणिमहेश डल को तोड़ने की परंपरा का निर्वहन करते हैं। बताया जा रहा है कि शिव चेले व कार्तिक स्वामी मंदिर कुगती के गूर डल तोड़ने की रस्म निभाने के लिए निकले थे। लेकिन वह डल झील तक नहीं पहुंच पाए हैं। भरमौर व हड़सर क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी न होने के कारण इसकी सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी।
मणिमहेश न पहुंच पाने पर छलके श्रद्धालुओं के आंसू
वहीं, चंबा चौगान में पहुंची छड़ी यात्रा का वहीं पर पूजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालु बड़े स्नान राधा अष्टमी पर मणिमहेश न पहुंच पाने के कारण मायूस थे व कइयों की आंखों से आंसू छलक आए।
सदियों से चली आ रही डल तोड़ने की परंपरा
डल तोड़ने की रस्म का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद गहरा है। मान्यता है कि राधा अष्टमी के दिन संचुई के शिव चेलों की ओर से झील में पूजा-अर्चना के साथ डल तोड़ने की रस्म पूरी किए जाने के बाद ही मणिमहेश यात्रा का औपचारिक समापन होता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और हर परिस्थिति में निभाई जाती रही है। लेकिन इस बार टूट गई।
परंपरा पर भारी पड़ी विपदा
संचुई के शिव चेलों ने आस्था और परंपरा को जीवित रखने के लिए कठिन परिस्थितियों में भी यात्रा शुरू की, लेकिन वह डल झील तक नहीं पहुंच पाए। इस पर धार्मिक परंपरा पर विपदा भारी पड़ गई है।
ढाई बजे से शुभ मुहूर्त
राधा अष्टमी पर स्नान का शुभ मुहूत दोपहर ढाई बजे से कल रविवार को दोपहर 11 बजे तक है। शिव चेलों ने आज दोपहर ढाई बजे डल तोड़ने था।
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