सोनीपत में 22 दिन और बढ़ा मेयर पद के आरक्षण के ड्रा का इंतजार, उम्मीदवारों में बढ़ी बेचैनी
सोनीपत मेयर पद के आरक्षण ड्रा का इंतजार 22 दिन और बढ़ गया है। दो बार स्थगित होने के बाद अब यह ड्रा 22 दिसंबर को पंचकूला में प्रस्तावित है। इस देरी से ...और पढ़ें
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सोनीपत नगर निगम कार्यालय। जागरण
जागरण संवाददाता, सोनीपत। सोनीपत में नगर निगम में मेयर पद जनरल कैटेगरी के लिए बरकरार रहेगा या रिजर्व हो जाएगा? इस पर होने वाले फैसले का इंतजार 22 दिन और बढ़ गया है। ड्रा को लेकर अब नई तिथि तय की गई है। पंचकूला में अब 22 दिसंबर को ड्रा किया जाएगा।
इससे पहले दो बार ड्रा स्थगित हो चुका है। पहले यह ड्रा एक दिसंबर को होना था, लेकिन नहीं हो पाया। इसके बाद 15 दिसंबर की तिथि तय की गई, लेकिन इस कारण भी प्रशासनिक कारण के चलते ड्रा स्थगित कर दिया गया। अब उम्मीद है कि 22 जनवरी को ड्रा के जरिए इस पर संशय खत्म हो जाएगा।
आठ जनवरी को नगर निगम की मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। नए साल में शहर को जो सरकार मिलेगी। ऐसे में चुनाव की जद्दोजहद शुरू हो चुकी है। नगर निगम चुनाव में भाग लेने वाले प्रत्याशियों और मतदाताओं की निगाहें मेयर पद के ड्रा पर टिकी हैं। क्योंकि सोनीपत के साथ ही पंचकूला और अंबाला में भी चुनाव होने हैं। इन तीनों में से एक सीट बीसी-बी महिला के लिए आरक्षित होनी है।
वहीं, ऐसे में राजनीतिक पार्टियों ने इस श्रेणी में आने वाले मतदाताओं पर फोकस बढ़ा दिया है। मौजूदा समय में तीनों सीट सामान्य हैं। नगर निगम के मेयर का उपचुनाव 10 महीने पहले ही हुआ था। राजीव जैन मेयर बने थे। अब उनकी भी निगाह आरक्षित ड्रा पर लगी हुई है।
दावेदारी को लेकर कशमकश में संभावित उम्मीदवार
मेयर पद किस श्रेणी में जाएगा। इस बारे में जानने को लेकर राजनीतिक गलियारे में बीते कई दिनों से हर कोई बेचैन हैं। ड्रा ऑफ लाट में हो रही देरी से संभावित उम्मीदवार कशमकश में है कि वे दावेदारी पेश करें या अभी ड्रा का इंतजार करें। यदि वो अभी प्रचार-प्रसार या दावेदारी पेश करते है तो महिला या फिर अन्य किसी वर्ग में जाने पर दावेदारी किसी काम की नहीं रहेगी। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों की नजरें आरक्षित होने वाले ड्रा पर हैं। राजनीतिक पार्टियों ने आरक्षित श्रेणी में आने वाले मतदाताओं पर फोकस बढ़ा दिया है।
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ड्रा में लेटलतीफी से आगे खिसक सकते हैं चुनाव
ड्रा ऑफ लाट में हो रही देरी से चुनाव भी प्रभावित होंगे। जनवरी में प्रस्तावित निकाय चुनाव फरवरी में भी होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। फरवरी में हरियाणा बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं भी आयोजित होनी हैं। ऐसे में चुनाव की व्यवस्था करना मुश्किल होगा, जिसके बाद मार्च में बजट सेशन शुरू हो जाएगा। इसकी वजह से भी चुनाव प्रक्रिया धीमी होगी। ऐसे में चुनाव मार्च-अप्रैल तक खिसक सकते हैं।

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