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    सोनीपत में नगर निगम में NOC का बड़ा 'खेल', जोनल टैक्स ऑफिसर और दो SDO पर गिरी गाज

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 03:40 PM (IST)

    सोनीपत में प्रॉपर्टी आईडी में छेड़छाड़ कर गलत अनापत्ति पत्र (एनओसी) जारी करने के मामले में शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जोनल टैक्स ऑफिसर राजेंद्र चुघ औ ...और पढ़ें

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    जोनल टैक्स ऑफिसर राजेंद्र चुघ और एसडीओ नवरत्न व अभिषेक सस्पेंड। जागरण

    दीपक गिजवाल, सोनीपत। सोनीपत में प्रॉपर्टी आईडी में छेड़छाड़ कर गलत तरीके से अनापत्ति पत्र (एनओसी) जारी करने के खेल में संलिप्तता मिलने पर शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जोनल टैक्स ऑफिसर राजेंद्र चुघ और एसडीओ नवरत्न व अभिषेक को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ आरोप-पत्र तैयार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

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    बताया कि निलंबन की अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पंचकूला रहेगा। यह कार्रवाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता निर्देश पर हुई है। साथ ही प्रॉपर्टी आईडी शाखा में चेकर और मेकर के तौर पर नियुक्त रहे कई अन्य पर भी चार्जशीट की तैयारी है।

    मुख्यालय ने वर्ष 2020 से लेकर अब तक बनी प्रॉपर्टी आईडी की जांच के लिए कमेटी गठित की थी। कमेटी में पानीपत, सोनीपत और फरीदाबाद के अधिकारियों को शामिल किया गया है। जांच अधिकारियों ने निगम अधिकारियों को रिकॉर्ड के साथ बुलाया गया था, जहां पर उनसे प्रॉपर्टी आईडी से संबंधित जानकारी जुटाई गई। उनसे पांच वर्षों के दौरान बनी गई प्रॉपर्टी आईडी का डाटा जुटाने के साथ-साथ उनके आईडी भी ली गई।

    प्रॉपर्टी आईडी की जांच करने के लिए एक विशेषज्ञ को लगाया गया है, जो रेंडमली पांच वर्षों के दौरान बनी प्रॉपर्टी आईडी का डाटा उठाकर उसकी जांच की गई। इसमें भारी अनियमितताएं मिली। ऐसे में अब उन आईडी को बनाने वाले जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई शुरू हुई है, जिसके चलते राजेंद्र चुघ, अभिषेक और नवरत्न पर कार्रवाई हुई।

    अनअप्रूव्ड एरिया में भी बना दी प्रॉपर्टी आईडी

    वर्ष 2020 में 1.40 प्रॉपर्टी आईडी थी, जो अब बढ़कर 1.98 हो गई हैं। ऐसे में बीते पांच साल में 58 हजार नई आइडी बनी हैं। अनअप्रूव्ड एरिया में भी निगम की तरफ से प्रॉपर्टी आईडी बना दी गई, जिसका फायदा उठाकर लोगों ने रजिस्ट्री तक करा ली गई। इस तरह से एक नहीं कई मामले निगम अधिकारियों के सामने आ चुके हैं। कार्रवाई नहीं होने पर लोगों ने इसकी शिकायत मुख्यालय में की थी। इसके बाद जांच शुरू हुई थी।

    ऐसे आए कार्रवाई के दायरे में, कई पर लटक रही तलवार

    पांच सालों में प्रॉपर्टी आईडी बनाने की प्रक्रिया पूरी करने की सीट पर कौन-कौन कर्मचारी और अधिकारी सीट पर रहे। जांच कमेटी द्वारा इसकी सूची भी तैयारी कराई गई, क्योंकि नई प्रॉपर्टी आईडी बनाने के लिए फाइल कई स्तर पर गुजरती है। गलत आईडी बनाने में किस स्तर पर गलती हुई और गलती को क्यों नहीं पकड़ा गया, इस पर भी कमेटी ने जांच कर विभाग को सौंपी है।

    स्थानीय अधिकारियों को भी थी गड़बड़ियों की भनक

    प्रॉपर्टी आईडी में छेड़छाड़ और फिर एनओसी जारी करने में हो रहे खेल की कहीं न कहीं स्थानीय अधिकारियों को भी भनक थी। नगर निगम में दो बार बड़े स्तर पर सीटों में फेरबदल हो चुका था। एक-एक बार में 60-60 क्लर्कों को इधर से उधर किया जा चुका है। शिकायतों के चलते राजेंद्र चुघ को भी उनकी सीट से हटाया गया था। प्रॉपर्टी आईडी का काम देख रहे सुनील हुड्डा को चार महीने के अंदर दो बार चार्जशीट किया गया। साथ ही सोनू और एक अन्य कर्मचारी के खिलाफ शोकाज नोटिस निकाले गए। दूसरी तरफ मुख्यालय की ओर से भी बड़े स्तर पर जांच चल रही थी, जिसके बाद शिकंजा कसना शुरू हुआ

    नवरत्न एक साल में दूसरी बार सस्पेंड

    नवरत्न पर एक साल के अंदर दूसरी बार कार्रवाई हुई है। इससे पहले वह जनवरी, 2024 में भी सस्पेंड हुए थे। उन पर एटलस फैक्ट्री की जमीन पर कॉलोनी काटने के लिए सीएलयू लिए बिना ही प्रॉपर्टी आईडी बनाने का आरोप था। आरोप था कि मिलीभगत कर 30 प्रॉपर्टी आईडी बनाकर एनओसी दे दी गई थी।

    नगर निगम की ओर से की गई गड़बड़ी के मामले में उपायुक्त ने नगर निगम आयुक्त से भी जवाब मांगा था। निगम आयुक्त की ओर से की गई जांच में नवरत्न की भूमिका मिली थी। नवरत्न को प्रॉपर्टी आईडी के लिए चेकर बना रखा था। इस मामले में शहरी निकाय निदेशालय के आयुक्त एवं सचिव विकास कुमार उनको सस्पेंड किया था।

    खुलेआम चल रही थी रिश्वतखोरी, क्लर्क गिरफ्तार भी हुआ

    नगर निगम में व्यापक तौर पर भ्रष्टाचार चल रहा था। जमकर रुपये का लेनदेन कर एनओसी हासिल कर अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री करवाई जा रही थी। तीन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई ने इन आरोपों को पुख्ता किया है। एक दिन पहले ही एनओसी के नाम पर रुपये लेने के आरोप में क्लर्क हरिओम की भी गिरफ्तारी हुई है। उन पर भी प्रापर्टी आईडी ठीक करने की एवज में 15 हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप था। पीड़ित ने रिश्वत देते वक्त वीडियो भी बना लिया था।

    मई, 2025 में मामला सामने आने के बाद आरोपी फरार हो गया था। विभाग ने सस्पेंड कर दिया था। छह महीने बाद 31 दिसंबर को आरोपी की गिरफ्तारी हुई थी।

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    प्रॉपर्टी आईडी और एनओसी को लेकर गड़बड़ियों के चलते मुख्यालय की ओर से जोनल टैक्स ऑफिसर राजेंद्र चुघ सहित तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। प्रॉपर्टी आईडी और एनओसी को लेकर स्थानीय स्तर पर भी जांच कर कई के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। विभाग के आदेशों के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। - हर्षित कुमार, आयुक्त, नगर निगम