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    अपनों को करोड़ों की संपत्ति दी, जब अंतिम यात्रा पर निकले तो कंधा भी न मिला; 6 दिन पोस्टमार्टम हाउस में रखा था शव

    Updated: Wed, 22 Jan 2025 01:49 PM (IST)

    पानीपत के सरदार अमरजीत सिंह की कहानी दिल दहला देने वाली है। करोड़ों की संपत्ति के मालिक अमरजीत सिंह को उनके परिवार ने अकेला छोड़ दिया। पत्नी बेटी और रिश्तेदारों ने भी उनका साथ नहीं दिया। आखिरी वक्त में उन्हें वृद्धाश्रम में रहना पड़ा और वहीं उनकी मृत्यु हो गई। पत्नी और बेटी ने उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने से मना कर दिया।

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    Panipat News: सरदार अमरजीत सिंह की फाइल फोटो

    राज सिंह पाल,पानीपत। सरदार अमरजीत सिंह शहर के सबसे महंगे और पॉश एरिया मॉडल टाउन में करोड़ों की कोठी, अजीजुल्लापुर गांव में करोड़ों की आठ एकड़ जमीन के मालिक थे।

    जब इनका शव अंतिम यात्रा पर निकला तो जन्म-जन्म का साथ निभाने का वादा करने वाली जीवन संगिनी भी कुछ दूर तक साथ चलने नहीं आई।

    बेटी भी मुंह मोड़ गई। अन्य रिश्तेदार यह कहकर दूर हो गए कि हमारे पास समय ही नहीं है। सात दिन तक इंतजार किया कि कोई आएगा... लेकिन अपनों का कंधा तक नहीं मिला।

    परिवार बिखरते ही रूठ गया भाग्य

    सरदार अमरजीत सिंह जब धनी थे तो सबके लिए सरदार थे। परिवार में दो बहनें, पत्नी और एक बेटी थी। इनके अलावा अन्य सदस्य भी थे। परिवार बिखरा तो भाग्य ही रूठ गया। अमरजीत ने अपनी सारी संपत्ति बेटी और अन्य स्वजन के नाम कर दी।

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    सम्पत्ति को बेचकर पत्नी अपनी बेटी के साथ उत्तर प्रदेश के पीलीभीत चली गई। दोनों बहनें पहले से विदेश में रह रही थी। वह अकेला पड़ा तो आश्रम में छोड़ दिया था। 15 जनवरी को अमरजीत सिंह की मौत हो गई।

    6 दिनों तक पोस्टमार्टम हाउस में रखा था शव

    अपनों के कंधे मिल सकें इसलिए छह दिन शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखा गया। पत्नी व बेटी को सूचना दी गई, कोई नहीं आया तो मंगलवार को असंध रोड स्थित शिवपुरी में अंतिम संस्कार कर दिया गया।

    अमरजीत की पत्नी और बेटी पीलीभीत उत्तर प्रदेश में रह रहे हैं। एक बहन अमेरिका, दूसरी आस्ट्रेलिया में रहती हैं। अमरजीत की ससुराल दिल्ली में है और साली भी वहीं रहती हैं। परिवार के कुछ सदस्य और भी हैं।

    संपत्ति जाने के बाद अकेला पड़ गए थे अमरजीत

    परिवार के बिखरने और संपत्ति हाथ से चली जाने के बाद वह अकेला पड़ गए तो किसी साथी ने कुटानी रोड स्थित वृद्धाश्रम का रास्ता बता दिया था। कुछ दिन वहां गुजारे।

    अपनों के वियोग में बीमार हो गए। उनसे चला भी नहीं जाता तो आश्रम संचालकों ने उन्हें जनसेवा दल के अपना आशियाना में पहुंचा दिया। इलाज के बाद वह स्वस्थ हो गए थे।

    करीब डेढ़ साल तक यहां रहे। 10 जनवरी को स्वास्थ्य फिर बिगड़ गया। 15 जनवरी की दोपहर लगभग 84 साल की आयु में अंतिम सांस ली।

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    पत्नी और बेटी आने से कर दिया इन्कार

    पीलीभीत उत्तर प्रदेश में रह रही पत्नी और बेटी को फोन पर सूचना दी गई। दोनों ने ही दूरी व अन्य विवशता बताकर अंतिम संस्कार में आने से साफ इन्कार कर दिया। इतना जरूरी कहा कि मृत्यु प्रमाणपत्र भेज देना। कोई आ जाए...बेशक अंतिम दर्शन कर लौट जाए।

    इसी सोच के साथ छह दिन तक शव को नागरिक अस्पताल के शवगृह में रखा गया, लेकिन कोई अंतिम दर्शन तक नहीं आया। मंगलवार को विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर दिया गया।

    अपनों ने बेशक छोड़ दिया, लेकिन पराये साथ रहे। जनसेवा दल के सचिव एवं अपना आशियाना के संस्थापक सदस्य चमन गुलाटी ने बताया कि अस्थियों को सहेज कर रखा जाएगा। स्वजन ले जाए तो अच्छा, नहीं तो हरिद्वार में विसर्जित की जाएंगी।

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