पानीपत, [विजय गाहल्‍याण]। शराब से लाखों कमाने की हसरत ने अपने ही गोदाम से चोरी और तस्करी करने लगे। दो महीने बाद ही गोदाम में बाहर से लाई गई शराब की पेटियां मिली और आबकारी विभाग ने गोदाम सील कर दिया। मालिक पर 2 करोड़ 22 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा। इसके बाद से विभाग ने सुध नहीं ली। सुरक्षा में खामियों का शराब माफिया ने खूब फायदा उठाया। बेखौफ जब्त शराब की लूट का खेल चलता रहा।

आरोपित पूर्व विधायक सतविंद्र राणा का साझीदार शामड़ी गांव के ईश्वर का गुर्गा जागसी गांव का सुधीर गोदाम से शराब की 263 पेटियां चुरा ले गया और पकड़ा गया। पुलिस ने गिरोह की जड़ों तक न जाकर इतिश्री कर ली। अगर लॉकटाउन में गोदाम से शराब चोरी का मामला तूल न पकड़ता तो सफेदपोश व उसके साथियों तक पुलिस पहुंच ही नहीं पाती। हाईप्रोफाइल मामला होने के कारण इसको चार साल तक लटकाए रखा। आरोपित करीब 80 फीसद शराब बेच चुके थे।

गोदाम पर नहीं थे सुरक्षाकर्मी, पुलिस पहुंची तो चोरी का पता चला

25 अप्रैल को समालखा थाना व चौकी की टीमें गश्त पर थी। इसी दौरान स्विफ्ट कार को रुकवाने का इशारा किया। चालक कार को लेकर भोड़वाल माजरी गांव के खेतों के रास्ते पर भाग गया। कच्चे रास्ते में कार धंस गई और इसमें से कूद कर कई शराब तस्कर फरार हो गए। कार में अंग्रेजी शराब की 20 पेटियां थी। ये शराब सील गोदाम से चोरी की गई थी।

न कोई चौकीदार न सुरक्षाकर्मी

27 अप्रैल को पुलिस सील गोदाम पर पहुंची तो पीछे के शटर उखड़ा हुआ था और शराब चोरी की जा रही थी। वहां पर कोई चौकीदार व सुरक्षाकर्मी नहीं था। पुलिस को देख तस्कर दो गाड़ियों से फरार हो गए। इसके बाद ही आबकारी विभाग के एईटीओ राजेश रोहिला ने समालखा चौकी में अज्ञात के खिलाफ शराब चोरी का मामला दर्ज कराया।

दूसरों के नाम से एल-वन का गोदाम लेता था भूपेंद्र

सोनीपत के खरखौदा में शराब घोटाले में आरोपित सिसाना गांव के शराब माफिया भूपेंद्र की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। जांच में सामने आया था कि भूपेंद्र बड़ा ही शातिर है। वह दूसरों के नाम से एल-वन का गोदाम लेता था, ताकि वह बच निकले। बाहर रहते हुए वे पैरवी करके मामले को निपटवाने का भी प्रयास करता था। वह कैंटर व ट्रकों से पंजाब और चंडीगढ़ से अवैध शराब को उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान सहित कई प्रदेशों में सप्लाई कराता था। ट्रक चालकों को पता नहीं होता था कि शराब किसकी है।

ये मामले दर्ज हैं

21 जून 2018 को सीआइए-वन ने चंदौली गांव के पास ट्रक को पकड़ा। ट्रक में अंग्रेजी शराब की 1270 पेटियां थी।

27 दिसंबर 2018 को सीआइए-वन ने सेक्टर-18 बाईपास से कैंटर पकड़ा। इसमें से अंग्रेजी शराब की 700 पेटियां बरामद।

26 नवंबर 2019 को सीआइए-वन ने अजीजुलापुर गांव के पास कैंटर को पकड़ा। कैंटर में अंग्रेजी शराब की 390 पेटियां भर रखी थी।

8 जनवरी 2019 को सीआइए-टू ने संजय चौक के पास ट्रक पकड़ा।

ईश्‍वर ने पुलिस कर्मचारियों पर दिखाया था रौब

सील गोदाम में चोरी होने के बाद शामड़ी का ईश्वर समालखा चौकी भी गया था। तब उन्होंने पुलिसकर्मियों पर रौब दिखाया था कि उसने पूर्व विधायक सतविंद्र राणा से गोदाम की पावर ऑफ अटार्नी ले रखी है। शराब की चोरी करने वालों को जल्द गिरफ्तार करें। पुलिस ने गोदाम के कागजात मांगे तो ईश्वर नहीं दिखा पाए और वहां से चलते बने। सीआइए ने जांच आग बढ़ाई तो ईश्वर गुर्गों समेत शिकंजे में फंस गया। 8 मई को एसपी मनीषा चौधरी ने डीएसपी क्राइम राजेश फोगाट के नेतृत्व में एसआइटी गठित की थी। इसमें सीआइए-2 इंचार्ज इंस्पेक्टर दीपक कुमार और थाना समालखा प्रभारी हरविंद्र सिंह को शामिल किया गया। सीआइए-टू की गिरफ्त में ईश्वर और उसका आका पूर्व विधायक  राणा हैं। दोनों को आमने-सामने भी किया जाएगा। इससे ये भी साफ हो जाएगा कि कौन कितनी सच्चाई बता रहा है। दोनों के मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है। ये फोन कई राज खोल सकते हैं। आरोपित शराब बेच चुकें हैं और पुलिस पैसे की रिकवरी में जुटी है। उनसे सवाल पूछे जा रहे हैं।

कंपनी पर दो करोड़ 22 लाख का जुर्माना भी लगाया गया

आबकारी एवं काराधान विभाग की तरफ से जेमिनी डिस्टलरी पटियाला प्राइवेट लिमिटेड को (एल-वन एबीसी) समालखा का लाइसेंस दिया गया था। 9 अगस्त, 2016 में चेक करने पर स्टॉक में गड़बड़ी मिली तो 22 सितंबर 2016 को विभाग ने लाइसेंस को रद कर सीताराम कॉलोनी स्थित गोदाम को सील कर दिया। कंपनी पर करीब 2 करोड़ 22 लाख का जुर्माना भी लगाया गया। गोदाम से वर्ष 2018 में 340 पेटी के करीब शराब चोरी हुई थी। पुलिस ने चोर को गिरफ्तार भी किया था। ईटीओ पुनीत शर्मा ने कहा कि जिस वक्त गोदाम को सील किया गया, उस वक्त कितनी पेटियां थी। गोदाम की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। ये मैं रिकार्ड देखने के बाद ही बता पाऊंगा। लॉकडाउन में चोरी के बाद गोदाम में केवल 832 पेटियां ही बची थी।

खेतों के रास्‍ते शराब चोरी के संकेत

कोरोना के कारण लॉकडाउन है। हाईवे से लेकर लोकल रास्तों पर नाकेबंदी है। राइडर और पीसीआर पर गश्त अलग से। फिर भी लाखों की शराब चोरी होकर कैसे निकल गई, ये भी एक बड़ा सवाल है। जिस सील गोदाम से शराब चोरी हुई, वो नेशनल हाईवे से करीब सवा सौ मीटर की दूरी पर है। आसपास में रिहायश कम है। गेट के पास में कई मकान बने हैं। दायें तरफ में खाली प्लॉट और पीछे खेतों के साथ खाली प्लॉट हैं। दो गेट लगे हैं। गेट के साथ वाली दीवार करीब पांच फीट ऊंची है। अगल-बगल, पीछे खेतों व प्लाट की तरफ से तारबंदी भी हो रखी है। रास्तों की बात करें तो आगे की तरफ से कई रास्तों से आया जा सकता है। वहीं पीछे की तरफ से भी खेतों के जरिये कई रास्ते लगते हैं।

पीछे वाले शटर को उखाड़ शराब चोरी की

खेतों के रास्ते गोदाम से शराब चोरी के संकेत मिले हैं। चोरों ने पीछे वाले शटर को उखाड़ कर शराब चोरी की। पेड़ पौधों से अटा होने पर दिखाई नहीं देता है। साथ ही पीछे खेतों की तरफ लगने वाले रास्तों के आगे की गई तारबंदी को भी हटाया गया है। गोदाम के पीछे ही करीब 50 मीटर दूरी पर बिजली के खंभों के नीचे चोरी होने वाली शराब की पेटी पड़ी मिली। फिर करीब 20 मीटर दूर प्लॉट और खेत के कोने से निकलने वाले रास्ते पर टूटी बोतलें और उसके फ्लैश पड़े हैं। जाहिर करते हैं कि गोदाम से शराब चोरी रात के अंधेरे में खेतों के रास्ते हुई है।

इसी प्रकार जुड़ती गईं कडि़यां

मुख्य सरगना ईश्वर का एल-1 में हिस्सा था। दूसरा आरोपित सुधीर वर्ष 2018 में शराब चोरी के केस में जेल गया था। कुछ समय जेल में रहने के बाद साल भर पहले जमानत पर बाहर आया था। तीसरा आरोपित अजमेर उर्फ मोनू हरियाणा पुलिस में झज्जर में सिपाही के पद पर तैनात है। वह कुछ समय से चौथे आरोपित दीपक उर्फ टाचवा का गनमैन लगा हुआ था। दीपक की गांव में आपसी रंजिश चल रही है। वर्ष 2012 में उसके भाई की बहादुरगढ़ में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह इस मामले में गवाह है।

पंजाब का है ये ब्रांड

सील गोदाम में अंग्रेजी शराब की जो पेटियां थी, वो पंजाब के पटियाला स्थित डिस्टलरी से बनी थी। टुडे स्पेशल बायो व्हिसकी है। इस ब्रांड को प्रदेश के लोगों ने कम ही पसंद किया था। एक पेटी की कीमत 2200 के करीब है। प्रारंभिक जांच में गोदाम से 4500 के करीब पेटी शराब चोरी होना सामने आया है। लॉकडाउन के दौरान अवैध तौर पर शराब बेचने वालों ने लोगों से दो से तीन गुना तक दाम वसूले। तस्करों ने 99 लाख की शराब बेची।

आगे कोई गाड़ी नहीं देखी

गोदाम से आगे खाली प्लॉटों में स्कूल आदि में चलने वाली बसें खड़ी होती है। पुरखास के रहने वाले बुजुर्ग चतुर सिंह वहां पिछले दस साल से चौकीदार हैं। पहले वो रात में ही रहते थे, पर करीब दो माह से दिन में रहते हैं। बुजुर्ग ने बताया कि गोदाम पर शुरुआत में दो चौकीदार रहते थे। जो कुछ समय बाद हट गए। मैंने आगे की तरफ गोदाम पर कभी कोई गाड़ी या आदमी नहीं देखा। पीछे से किसने क्या किया, ये मुङो पता नहीं।

कहां-कहां हैं पुलिस के नाके

हाईवे पर हल्दाना बार्डर पर दोनों लेन पर पुलिस चौबीस घंटे तैनात है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, छदिया, ढिंडार, महावटी, हथवाला व बेगा की तरफ भी पुलिस की पहरेदारी है।

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Posted By: Anurag Shukla

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