करनाल, जेएनएन। हरियाणा के करनाल में ब्लैक फंगस के दो आशंकित मिले हैं। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के आइसीयू में दाखिल दोनों मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। दोनों मरीजों को विशेष निगरानी में रखा गया है। आशंकित मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्थिति स्पष्ट होगी।

आशंकितों की तादाद ओर भी बढ़ सकती है। कोरोना के साथ ब्लैक फंगस के मंडराते खतरे को भांपते हुए में मेडिकल कालेज प्रबंधन ने चिकित्सकों को अलर्ट मोड़ में कर दिया है। कालेज में इस समय 90 आइसीयू बैडों पर कोरोना के मरीज दाखिल हैं, यदि ब्लैक फंगस की पुष्टि होती है तो जाहिर है बाकी मरीजों को इस प्रकोप से बचाने के लिए चिकित्सकों के सामने बहुत बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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क्या है ब्लैक फंगस

कोरोना मरीजों में फंगस इन्फेक्शन जिसे 'ब्लैक फंगस इन्फेक्शन' कहा जा रहा है। यह मामले बढ़ रहे हैं। करनाल में पहली बार इस फंगस की सूचना है। इस इंफेक्शन से सबसे बड़ा डर ये है कि ये तेजी फैलता है और लोगों के आंखों की रोशनी चली जाती है। इसके अलावा कुछ अंग काम करना भी बंद कर सकते हैं। चिकित्सकों का मानना है कि ब्लैक फंगस इनफेक्शन रहस्यमयी नहीं है, यह केवल बहुत दुर्लभ था, लेकिन इस समय इनकी संख्या बढ़ रही है।

 

क्या हैं ब्लैक फंगस कारण

इस बीमारी के बढ़ने के तीन प्रमुख कारण हैं। कोरोना, डायबिटीज और स्टेरॉयड का ज्यादा इस्तेमाल किया जाना।

1. किसी को कोरोना हो जाए, साथ में दूसरी बीमारियां पहले से हों तो उसकी रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। बाहरी इंफेक्शन से शरीर मुक़ाबला नहीं कर पाता। इसी स्थिति में यह फंगस का हमला करता है।

2. दूसरा खतरा है डायबिटीज के मरीजों पर होता है। उन्हें कई ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जिनसे उनके इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है। इसके अलावा कोरोना के गंभीर मरीजों में उनकी संख्या ज्यादा है, जो पहले से डायबिटीज से पीड़ित हैं। यानी इन पर दोगुना खतरा मंडरा रहा है।

3. स्टोरॉयड की अधिकता : कोरोना के इलाज में भी इनका इस्तेमाल होता है। इससे भी प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है। एम्स की ओर से रिपिट गाइडलाइन में स्टोरॉयड की डोज अधिक लेने से इम्यूनिटी तेजी से घट जाती है और व्यक्ति के शरीर में संक्रमण तेजी से मल्टीप्लाई होता है। 

यह हैं ब्लैक फंगस के लक्षण

म्यूकोरमाइकोसिस यानि ब्लैक फंगस एक जानलेवा बीमारी है। अगर समय रहते पता चल जाए तो इलाज भी संभव है। इसके लक्षण हैं नाक जाम होना, आंखों और गालों पर सूजन या पूरा चेहर पर सूजन आना। कई बार नाक पर काली पपड़ी जम जाती है। आंखों के नीचे दर्द होता है, सिरदर्द रहता है और बुखार आता है। यह इंफेक्शन नाक से शुरू होता है। यहां से ऊपरी जबड़े तक जाता है और फिर दिमाग़ तक पहुंचता है। इसका एक ही इलाज है, लक्षणों को जल्द से जल्द पहचानें और डॉक्टर से संपर्क करें।

कैसे कर सकते हैं बचाव?

केसीजीएमसी के कोविड-19 के नोडल अधिकारी डा. अभिनव डागर ने कहा कि कोरोना के केस में साफ़-सफाई बेहद जरूरी है। अस्पताल का माहौल कई बार इंफेक्शन के लिहाज से ज्यादा खतरनाक होता है। उन मरीजों पर खास निगरानी रखने की जरूरत है। जिन्हें आक्सीजन लगी होती है। कोरोना मरीज को यदि आक्सीजन लगी होने पर ह्यूमिडिफायर से पानी लीक नहीं होना चाहिए। फंगस इंफेक्शन नमी वाली जगहों से बढ़ता है। कई केस में कोविड ठीक हो गया, लेकिन किसी दूसरे संक्रमण की वजह से मौत हो गई। ऐसे में गंभीर बीमारी से उबरे लोगों पर और ध्यान देने की ज़रूरत है।

जिले में क्या है कोरोना की स्थिति

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक मृत्यु दर एक सप्ताह में एक प्रतिशत से नीचे थी, जो बढ़कर 1.09 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जिले में अब तक 374 मरीजों की जान जा चुकी है। सिविल सर्जन की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में अब तक 335116 सैंपल लिए जा चुके हैं, जिसमें 299681 सैंपलों की रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी है। जिले में अब तक 34461 संक्रमित मिल चुके हैं, जिसमें 28635 मरीज ठीक होकर घर चले गए। इस समय संकमित दर 8.25 है। बुधवार को 296 मरीज ठीक होकर अपने घर चले गए। जिला में कोरोना वायरस के सक्रिय केसों की संख्या 5462 हो गई है। डीसी ने कहा कि सभी नागरिक लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। घर पर रहें तथा पैनिक न बनाएं।

आइसीयू में ब्लैक फंगस के दो आशंकित मरीज दाखिल हैं। जिन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। दो दिन तक रिपोर्ट आ जाएगी, जिसके बाद ही पुष्टि की जा सकती है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण मे हैं। हमारी टीमें 24 घंटे मरीजों की निगरानी कर रही हैं।

डा. अभिनव डागर, नोडल अधिकारी, कोविड-19, केसीजीएमसी करनाल।

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