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    सावधान! सड़कों पर स्टंट करने वालों की अब खैर नहीं, दर्ज होगा हत्या का केस

    पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सड़क पर स्टंट करने को लापरवाह और असंवेदनशील रवैया करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि इसे महज लापरवाही और तेजी से गाड़ी चलाने का मामला नहीं माना जा सकता बल्कि इसे प्रथम दृष्टया गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों में नरमी बरती गई तो पहले से असुरक्षित सड़कें और खतरनाक बन जाएंगी।

    By Dayanand Sharma Edited By: Nitish Kumar Kushwaha Updated: Mon, 23 Dec 2024 08:51 PM (IST)
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    हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क पर स्टंट करने पर दर्ज हो सकता है गैर-इरादतन हत्या का मामला। सांकेतिक तस्वीर

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सड़क पर स्टंट करने को एक 'लापरवाह और असंवेदनशील रवैया' बताते हुए कहा कि इसे महज लापरवाही और तेजी से गाड़ी चलाने का मामला नहीं माना जा सकता, बल्कि इसे प्रथम दृष्टया गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

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    हाईकोर्ट की यह टिप्पणी उस मामले में आई, जिसमें एक बाइक सवार युवक की मौत एक मॉडिफाइड ट्रैक्टर से हुए हादसे में हो गई थी। घटना में आरोप है कि आरोपी लखबीर सिंह (ट्रैक्टर चालक) ने अपने ट्रैक्टर में अतिरिक्त टर्बो पंप लगाकर उसकी गति बढ़ाई थी।

    मृतक बाइक पर कर रहा था स्टंट

    मृतक गुरजंत सिंह अपने दोस्त के साथ बाइक पर स्टंट कर रहा था। इसी दौरान आरोपी ने ट्रैक्टर के अगले हिस्से को हवा में उठाकर स्टंट किया, जिससे ट्रैक्टर का आगे का हिस्सा बाइक सवार पर गिर गया। हादसे के बाद गुरजंत सिंह को गंभीर चोटें आईं और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।

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    लखबीर सिंह ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा सार्वजनिक सड़क पर स्टंट करना और वह भी बिना ट्रैफिक अधिकारियों की जानकारी के, सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

    स्टंट करने पर दर्ज हो सकता है गैर-इरादतन हत्या का मामला

    यदि ऐसे स्टंट के कारण किसी की मौत होती है, तो यह गैर इरादतन हत्या के तहत आता है। कोर्ट ने मामले में एक वीडियो क्लिप का जिक्र करते हुए कहा कि वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि आरोपी तेज गति से सार्वजनिक सड़क पर स्टंट कर रहा था।

    अगर ऐसे मामलों में नरमी बरती गई तो पहले से असुरक्षित सड़कें और खतरनाक बन जाएंगी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है और इस मामले में अग्रिम जमानत देना उचित नहीं है। अपराध के प्रभाव को देखते हुए, अग्रिम जमानत का आधार नहीं बनता।

    तलाक के बाद समझौता न मानने वाली पत्नी पर 1.5 लाख का जुर्माना

    वहीं, एक दूसरे मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने तलाक और समझौते के बावजूद दहेज उत्पीड़न का मामला वापस न लेने पर एक महिला पर डेढ़ लाख का जुर्माना लगाया है।

    कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में कड़वाहट या कटुता को कानूनी कार्यवाही को अनावश्यक रूप से लंबित रखने का आधार नहीं बनने दिया जा सकता। जस्टिस सुमीत गोयल ने पति की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।

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