'यह धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ है', हरियाणा SGPC चुनाव में सिखों को नहीं मिलेगा आरक्षण, HC ने खारिज की याचिका
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि सिख धार्मिक संस्थानों के चुनाव के लिए जाति और लिंग आधारित आरक्षण की मांग सिख धर्म के उच्च आदर्शों के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि जाति या धर्म के आधार पर समाज का विभाजन सिख धर्म के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने एक याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिए।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि सिख धार्मिक संस्थानों के चुनाव के लिए जाति और लिंग आधारित आरक्षण की मांग सिख धर्म के उच्च आदर्शों के खिलाफ है।
कोर्ट ने कहा कि जाति या धर्म के आधार पर समाज का विभाजन सिख धर्म के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
कोर्ट ने खारिज किया याचिका
कोर्ट ने कहा कि गुरु नानक देव जी, जो सिख धर्म के संस्थापक हैं, उन्होंने हमेशा जातिविहीन समाज का समर्थन किया। सिख धर्म की शिक्षाएं सभी मनुष्यों की एकता पर बल देती हैं।
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डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अनिल खेत्रपाल और जस्टिस हरप्रीत कौर जीवा शामिल थे, उन्होंने एक याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिए।
याचिका में लगाए गए थे ये आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया था कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी में अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए सीट आरक्षित न करना असंवैधानिक है और यह रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट, 1952 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
याचिकाकर्ताओं ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा (प्रबंधन) अधिनियम, 2014 की धारा 4(क) की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी थी।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा (प्रबंधन) अधिनियम 2014 अपने आप में एक संपूर्ण कानून है। अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़े वर्गों और महिलाओं के लिए आरक्षण न दिए जाने के तर्क में कोई ठोस आधार नहीं है।
संविधान का अनुच्छेद 15 एक सक्षम प्रविधान है, जो राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रविधान बनाने की अनुमति देता है लेकिन यह हर क्षेत्र में आरक्षण अनिवार्य नहीं करता।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि 2014 के अधिनियम की धारा 4(ख) के तहत सह-चयनित सदस्यों के माध्यम से अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्गों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।
सिख धर्म के संदेश पर हाईकोर्ट ने डाला प्रकाश
कोर्ट ने अपने फैसले में सिख धर्म के आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिख धर्म, जिसे श्री गुरु नानक देव जी ने स्थापित किया, वह 'एक नूर से सब जग उपज्या' के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि पूरी मानवता एक ही स्रोत से उत्पन्न हुई है।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला शब्द 'इक ओंकार' इस बात का प्रतीक है कि केवल एक ही 'सार्वभौमिक निर्माता' है। लंगर प्रथा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां हर किसी को समानता के साथ भोजन परोसा जाता है।
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