स्थानीय निकायों और पंचायतों को मिलेगा टैक्स से कमाई का सातवां हिस्सा, हरियाणा कैबिनेट का बड़ा फैसला
हरियाणा कैबिनेट ने सातवें वित्त आयोग की रिपोर्ट आने तक पंचायतों और शहरी निकायों को पुराने फार्मूले से राज्य के ...और पढ़ें
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हरियाणा कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते सीएम नायब सैनी। फोटो जागरण
HighLights
पुराने फार्मूले से मिलेगा स्थानीय निकायों को 7% कर राजस्व।
ग्रामीण-शहरी निकायों में आबादी, क्षेत्रफल के आधार पर होगा बंटवारा।
'हर-हित' स्टोर के लिए पंचायती जमीन आवंटन सरल किया गया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में सातवें राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट आने तक पंचायतों और शहरी निकायों को पुराने फार्मूले से ही पैसा मिलेगा। अगले वित्त आयोग की सिफारिशें मिलने तक कैबिनेट ने छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें जारी रखने को मंजूरी दी है। राज्य के अपने कर राजस्व का सात प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निकायों को आवंटित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में तय किया गया कि ग्रामीण और शहरी निकायों के बीच धनराशि का बंटवारा तय मानकों के आधार पर होगा। गांवों में ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को क्रमशः 75:15:10 के अनुपात में राशि मिलेगी। यानी सबसे बड़ा हिस्सा ग्राम पंचायतों के खाते में जाएगा।
ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों के बीच राशि बांटते समय आबादी को 80 प्रतिशत और क्षेत्रफल को 20 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। इसके लिए हर साल 31 दिसंबर तक परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर उपलब्ध आबादी के आंकड़े इस्तेमाल होंगे। जिला परिषदों और पंचायत समितियों के हिस्से का निर्धारण भी इसी तारीख तक उपलब्ध जनसंख्या के आधार पर होगा।
गलियों पर 30% से ज्यादा खर्च नहीं
स्थानीय निकाय आवंटित राशि का अधिकतम 30 प्रतिशत हिस्सा गलियों को पक्का करने पर खर्च कर सकेंगे। शेष राशि का उपयोग अन्य निर्धारित स्थानीय विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इस सीमा से गलियों के निर्माण पर खर्च की अधिकतम हिस्सेदारी तय रहेगी।
राजस्व लक्ष्य पूरा नहीं किया तो अनुदान कटेगा
शहरी स्थानीय निकायों के लिए राजस्व जुटाने की शर्त भी लागू रहेगी। उनका वास्तविक राजस्व पिछले वर्ष के लेखापरीक्षित खातों में दर्ज बजटीय राजस्व का कम से कम 85 प्रतिशत होना चाहिए। यह स्तर पूरा नहीं करने वाले शहरी निकायों के चालू वर्ष के राज्य वित्त आयोग अनुदान में अनुशंसित हिस्से के मुकाबले 20 प्रतिशत कटौती होगी।
‘हर-हित’ स्टोर के लिए उपायुक्त दे सकेंगे 20 वर्ग गज पंचायती जमीन
गांवों में ‘हर-हित’ स्टोर का तेजी से विस्तार करने के लिए मंत्रिपरिषद ने ‘हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) नियम, 1964’ में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत संबंधित उपायुक्तों को ग्राम पंचायतों की ‘शामलात देह’ (गांव की साझा जमीन) में 20 वर्ग गज तक की जमीन हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड को ‘हर-हित’ स्टोर स्थापित करने के लिए आवंटन के जरिए पट्टे पर देने की मंजूरी का अधिकार दिया गया है।
‘हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड’ द्वारा फ्रैंचाइजी के माध्यम से ‘हर-हित’ रिटेल चेन चलाई जा रही है। अभी 5000 स्टोर के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 1,400 स्टोर चल रहे हैं। गांवों में हर स्टोर के लिए 20 वर्ग गज जमीन की आवश्यकता है।
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अभी ऐसे हर पट्टे के लिए राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति लेनी पड़ती है। संबंधित उपायुक्त को मंजूरी देने का अधिकार मिलने से, इन छोटी जगहों के प्रस्तावों पर जिला स्तर पर कार्रवाई हो सकेगी, जिससे रिटेल नेटवर्क का विस्तार आसान हो जाएगा।
ग्राम पंचायत की जमीन पांच साल की अवधि के लिए पट्टे पर दी जा सकती है, जिसे अधिकतम तीन साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।
