जेएनएन, चंडीगढ़। एक तरफ जहां लॉकडाउन के दौरान पूरे देश में घरेलू हिंसा व महिला उत्पीड़न की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है, वहीं हरियाणा में ऐसे मामले कम हुए हैैं। हरियाणा पुलिस के पास आई शिकायतों को अगर देखा जाए तो यहां की स्थिति पड़ोसी राज्यों के मुकाबले एकदम उलट है।

हरियाणा में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगा था। उसके बाद लगातार शिकायतें आईं कि लॉकडाउन में महिला उत्पीड़न बढ़ा है। हरियाणा पुलिस द्वारा महिलाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर 1091 चलाया गया है। इस हेल्पलाइन नंबर पर 25 मार्च से 17 मई तक घरेलू हिंसा से संबंधित कुल 5975 शिकायतें आईं। इनमें ज्यादातर पति व ससुर के विरूद्ध थी, जिसमें महिलाओं ने मारपीट करने, अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा कई केस घरेलू नोकझोंक के थे।

हरियाणा पुलिस ने ज्यादातर मामलों को काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाया। इसके बावजूद 26 केसों में एफआइआर दर्ज की गई। दूसरी तरफ पिछले साल इसी अवधि के दौरान पुलिस के पास कुल 6060 शिकायतें आई थी, जिनमें से 74 को एफआइआर के लिए भेजा गया। लॉकडाउन में महिलाओं से छेड़छाड़, दुष्कर्म और अभद्रता की कुल 12060 कॉल आई हैं, जिनमें से 175 केसों में एफआइआर दर्ज की गई है। इसके उलट पिछले साल इसी अवधि के दौरान 12 हजार 986 शिकायतें पुलिस के पास आई थी, जिनमें से 587 में एफआइआर दर्ज करने के आदेश जारी किए गए थे।

हरियाणा पुलिस में एसपी क्राइम अंगेस्ट वूमैन कमलदीप गोयल के अनुसार अन्य राज्यों के मुकाबले हरियाणा में लॉकडाउन की अवधि के दौरान महिलाओं के खिलाफ होने वाली उत्पीड़न की घटनाओं में कमी आना सुखद है। डीजीपी मनोज यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत प्रत्येक पीड़िता को न्याय देने की कोशिश की गई। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि महिला उत्पीड़न रोकने को सरकार कटिबद्ध है।

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