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    आगरा की कैंसर वाली नहर! स्लो प्वाइजन पीने से पलवल के गांवों में पीढ़ियां बीमार; आंख मूंदे बैठे जिम्मेदार

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 04:49 PM (IST)

    पलवल के कई गांवों में आगरा नहर के रसायनयुक्त पानी के कारण कैंसर से सैकड़ों मौतें हुई हैं। दिल्ली की औद्योगिक इकाइयों से दूषित पानी नहर में आता है, जिस ...और पढ़ें

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    पलवल से गुजर रही आगरा कैनाल। जागरण

    अंकुर अग्निहोत्री, पलवल। इंदौर में जल बोर्ड की लापरवाही से पीने के पानी में एसटीपी का पानी मिलकर आपूर्ति होने से अब तक 14 लोगों की मौत हो गई। देश के लिए स्वच्छता की मिसाल बने शहर का ये हाल है, तो जिले में तो ऐसे कई गांव हैं, जहां लोग तो दशकों से धीमा जहर ही पी रहे हैं या पीकर जान गंवा चुके हैं।

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    जिले में ऐसे दर्जन भर गांव हैं (लुलवाड़ी, बांसवा, भिड़ूकी, खिरबी, खांबी, घासेड़ा, अजीजाबाद, चव्वन का नंगला, अमरौली, बाता आदि), जहां सैकड़ों ग्रामीणों की कैंसर से मौत हो चुकी है और कई और कैंसर से पीड़ित होने के बाद ¨जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं।

    इसका मुख्य कारण है आगरा नहर में बहता रसायनयुक्त पानी। गांवों के किसान नहर में बहते इसी रसायन युक्त पानी से खेतों की सिंचाई करते हैं। ट्यूबवेल भी नहर के साथ ही लगे हुए हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत करके थक चुके हैं, लेकिन कोई कारणों की जांच करने को तैयार नहीं। आजतक पानी की जांच तक नहीं कराई गई।

    2016 में हुई थी बांसवा में कैंसर की पुष्टि

    जिले के बांसवा गांव में 2016 में ग्रामीणों में बीमारी फैलने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच कराने पर कैंसर की पुष्टि हुई थी। उस समय दो महीने के अंदर ही कैंसर से 16 लोगों की मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने इसके फैलने के कारणों का पता लगाया। इसमें पाया गया कि आगरा कैनाल में आ रहे दूषित पानी से खेतों में हो रही फसलों की सिंचाई मुख्य कारण है।

    बाद में कृषि विभाग द्वारा प्रयोगशाला में आगरा कैनाल के पानी की जांच कराई गई। जांच में पाया कि नहर में दिल्ली स्थिति औद्योगिक इकाइयों से आ रहे पानी में काफी रासायनिक तत्व हैं। जो सिंचाई के माध्यम से खेतों में फसलों में जाता है और उस अनाज को खाने से लोग कैंसर से ग्रस्त हो रहे हैं।

    आगरा नहर दिल्ली कालिदीकुंज के पास से यमुना नदी से निकलती हैं। फरीदाबाद से पलवल होते हुए मथुरा को जाती है। आगरा नहर तो आगरा तक जाते हुए रास्ते में हजारों एकड़ फसल की सिंचाई करती है।

    नहर में बहता रसायनयुक्त पानी से फसलों को नुकसान होता है। जिसका सीधा स्वास्थ्य पर पड़ता है। आगरा नहर में प्रदूषित पानी डालने की वजह से जिले के लोग परेशान हैं। कैंसर रोगी बढ़ रहे हैं। किस तरह के कैंसर गांवों में ज्यादातर पेट, रक्त, रैक्सम, गला, मुंह का कैंसर के मरीज ज्यादा हैं। जिन मरीजों की मौत हो चुकी है, उनमें ज्यादातर पेट, रक्त व रैक्सम से पीड़ित थे।

    आगरा नहर में बहते रसायनयुक्त पानी के कारण गांव में पचास से अधिक लोग कैंसर की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। करीब 15 साल मेरे पिता पूर्व सरपंच गिर्राज सिह की भी कैंसर से मौत हो गई थी। कई बार अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि से इस समस्या की शिकायत कर चुके, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। कैंसर से मरने वालों का सिलसिला आज भी जारी है।

    - राकेश, सरपंच, लुलवाड़ी


    करीब तीन साल पहले मेरे पिता सूरजमल की कैंसर से मौत हो गई थी। वह पशु विभाग में काम करते थे। स्वास्थ्य विभाग से लेकर सिंचाई विभाग तक सबसे शिकायत कर चुके। मगर आजतक पानी की जांच तक नहीं हुई। परिवार में किसी को छोटी सी भी बीमारी हो जाती है तो डर लगने लगता है।

    - सोनू, लुलवाड़ी।

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    हमारे स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। यमुना नदी को साफ कर दिया जाए तो आगरा नहर रसायनयुक्त पानी से साफ हो जाएगी। दूसरा यह भी है कि आगरा नहर में इतना पानी है कि उसको एसटीपी की मदद से शोधित नहीं किया जा सकता है। इसलिए आजतक नहर के पास एसटीपी का निर्माण नहीं किया जा सका।


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    रियाज अहमद, एसडीओ, सिंचाई विभाग।