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    दिल्ली से 80 KM दूर... हरियाणा के इस गांव में लौट आईं खुशियां; 6 माह बाद ग्रामीणों ने जमीन पर रखे पैर

    हरियाणा के मेवात जिले के जैवंत गांव में छह महीने 18 दिन बाद खुशियां लौट आई हैं। आखिरकार ग्रामीणों के पैर जमीन पर पड़े हैं। बारिश के पानी से बने टापू जैसे घरों में रहने वाले लोगों को अब हवा भरी ट्यूब से सफर नहीं करना पड़ेगा। प्रशासन ने पानी निकासी का काम पूरा कर दिया है। आगे विस्तार से पढ़िए पूरी खबर।

    By Mohd Haroon Edited By: Kapil Kumar Updated: Wed, 19 Mar 2025 05:07 PM (IST)
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    लोगों को छह माह तक हवा भरी ट्यूब से सफर का दंश झेलना पड़ा। जागरण फोटो

    मोहम्मद हारून, नूंह। दिल्ली से 80 किलोमीटर दूर मेवात के जैवंत गांव के लोगों के छह माह 18 दिन के लंबे इंतजार के बाद पैर धरातल पर पड़े। वर्षा के पानी से टापू बने घरों में रहने वालों लोगों को छह माह तक हवा भरी ट्यूब से सफर का दंश झेलना पड़ा।

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    काफी पीड़ा झेलने के बाद 500 एकड़ भूमि में जलभराव की समस्या झेल चुकें लोगों को प्रशासन की तरफ से पानी निकासी किए जाने पर लोगों की जिंदगी सामान्य पटरी पर लौटी आई है। पानी से घिरे ग्रामीणों के बच्चे अब ट्यूब की बजाए भूमि के रास्ते से घर आने-जाने लगे हैं।

    तीन करोड़ 75 लाख का प्रपोजल सरकार को भेजा

    ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ दैनिक जागरण अखबार का भी आभार जताया है। जैवंत गांव में जलभराव का मुद्दा दैनिक जागरण ने ही उठाया था, जिस पर प्रशासन ने संज्ञान लिया था। इतना ही नहीं प्रशासन ने स्थायी समाधान के लिए भी तीन करोड़ 75 लाख रुपये का एक प्रपोजल सरकार को भेजा है, जिसकी तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है।

    (जलभराव की समस्या झेल चुका असर खां अपने परिवार के बच्चों के साथ घर जाते हुए। जागरण)

    वहीं, जलभराव की समस्या का समाधान होने से न केवल जैवंत गांव की पांच हजार आबादी बल्कि जैवंत से सटे राजस्थान के घुसिंगा गांव के दस हजार लोगों को राहत मिली है। जल भराव की पीड़ा जैवंत के अलावा राजस्थान के घुसिंगा गांव के लोगों भी उठानी पड़ी है। ये दोनों गांव आपस में सटे हैं।

    500 एकड़ भूमि में पांच-पांच फीट भर गया था पानी

    बता दें कि पिछले वर्ष वर्षा के मौसम में अक्टूबर माह में जिले के राजस्थान से सटे जैवंत गांव की करीब 500 एकड़ भूमि में पांच-पांच फीट पानी भर गया था। झीलनुमा क्षेत्र में जलभराव होने से गांव के सैकड़ों घर पानी की चपेट में आ गए थे। दर्जनों घरों के चारों तरफ गहरा पानी भरने से ग्रामीण टापूनमा जिंदगी जी रहे थे।

    (जैवंत गांव के लोग छह माह तक हवा भरी ट्यूब के सहारे ऐसे जाते थे अपने घर। जागरण आर्काइव)

    सैकड़ों घरों का गांव से कनेक्शन कट गया था। यहां पर रहने वाले लोगों के बच्चों को स्कूल जाने व घरेलू सामान खरीदने के लिए आने जाने के लिए हवा भरी ट्यूबों से जोखिम में जान डालकर छह माह तक सफर करना पड़ा। पानी की चपेट में घर आने के कारण कई लोग पलायन करके रिश्तेदारियों में भी चले गए थे।

    दैनिक जागरण ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा

    वहीं, बीते नौ जनवरी के अंक में दैनिक जागरण ने मामले को प्रमुखता से उठाया। जिस पर उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने संज्ञान लेकर तुरंत प्रभाव से गांव में चार पंप सेट और बिजली का मोटर पानी की निकासी के लिए भिजवाया था।

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    पानी की जल्दी निकासी के लिए प्रशासन ने बिजली की 22 खंभों की लाइन व ट्रांसफार्मर लगवाकर कई बिजली के मोटर व पंप सेट लगवाकर जलनिकासी का कार्य बीते 17 जनवरी से शुरू किया। तभी से लगातार पानी की निकासी का कार्य चल रहा है।

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    वहीं, लगातार दो माह तक पानी को निकासी के लिए प्रशासन की तरफ से सिंचाई विभाग की ड्रेनेज टीम को लगाए रखा। गांव से पूर्ण रूप से पानी की निकासी हो चुकी है। पानी की निकासी होने के बाद लोग छह माह बाद अपने घरों में ट्यूब की बजाए जमीनी रास्ते से आने जाने लगे हैं।

    ग्रामीणों ने जताया आभार

    गांव के असर खान, सरपंच प्रतिनिधि हाकम, मुस्तफिज, उस्मान, कपूर, रफीक व तौफिक ने कहा कि गांव के लोग कई बार पहले समस्या को उठा चुके थे। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। जागरण की तरफ से जब यह समस्या प्रकाशित की गई तो स्थानीय प्रशासन की आंखें खुली। गांव के लोगों का कहना था कि दैनिक जागरण ने वाकई में जनिहत की समस्या उठाकर ग्रामीणों को समस्या से निजात दिलाई। वहीं, उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने गजब का इंतजाम कराकर अपनी भूमिका बेखूबी निभाई।

    जैवंत में जलभराव की समस्या दैनिक जागरण में नौ जनवरी के अंक में प्रकाशित हुई थी। इसे पढ़कर मैंने पानी की निकासी का काम शुरू कराने का आदेश दिया। दोबारा यह समस्या फिर न हो, इसके लिए तीन करोड़ 75 लाख रुपये का एक प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इसके मंजूर होने पर स्थायी समाधान हो जाएगा। - विश्राम कुमार मीणा, उपायुक्त नूंह