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    G20 Summit: तीन दिन जांबाजों की सुरक्षा में रहेगी दिल्ली, NSG के एक हजार कमांडो 24 घंटे रहेंगे अलर्ट

    By Aditya RajEdited By: Abhishek Tiwari
    Updated: Thu, 07 Sep 2023 02:11 PM (IST)

    G20 Summit जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए एनएसजी की के-9 यूनिट यानी डॉग स्क्वाड के 20 सदस्य भी तैनात किए गए हैं। सदस्य सुबह-शाम होटलों व प्रमुख स्थानों के नजदीक सुरक्षा जांच करेंगे। दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन 9 एवं 10 सितंबर को है। आठ सितंबर की रात तक सभी सदस्य देशों के शासनाध्यक्ष या राष्ट्राध्यक्ष या विदेश मंत्री पहुंच जाएंगे।

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    G20 Summit: काउंटर टेरर के विशेषज्ञ जांबाजों की सुरक्षा में तीन दिन रहेगी दिल्ली

    गुरुग्राम [आदित्य राज]। पूरी दुनिया में काउंटर टेरर के विशेषज्ञ के रूप में पहचान बनाने वाली एनएसजी के लगभग एक हजार कमांडो जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान 24 घंटे अलर्ट रहेंगे।

    जिन होटलों में शासनाध्यक्ष व राष्ट्राध्यक्ष ठहरेंगे, उन होटलों के आसपास कमांडो तैनात कर दिए गए हैं। इनके अलावा दिल्ली के सभी प्रमुख स्थानों के आसपास भी कमांडो को तैनात किया गया है।

    एनएसजी की के-9 यूनिट यानी डॉग स्क्वाड के 20 सदस्य भी तैनात किए गए हैं। सदस्य सुबह-शाम होटलों व प्रमुख स्थानों के नजदीक सुरक्षा जांच करेंगे। दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन 9 एवं 10 सितंबर को है। आठ सितंबर की रात तक सभी सदस्य देशों के शासनाध्यक्ष या राष्ट्राध्यक्ष या विदेश मंत्री पहुंच जाएंगे।

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    कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष व विदेश मंत्री यानी दोनों आ रहे हैं। सभी सदस्यों के साथ औसतन 100 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल भी आ रहा है। इसे देखते हुए आठ सितंबर से ही पूरी दिल्ली को हाई सिक्योरिटी जोन बना दिया गया है।

    सुरक्षा में किसी भी स्तर पर कमी न रहे, इसे ध्यान में रखकर नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के लगभग एक हजार प्रशिक्षित जांबाजों को तैनात किया गया है। सभी कई दिनों से इसकी तैयारी कर रहे थे। तैयारी पूरी होने के बाद सभी को तैनात कर दिया गया है। 10 सितंबर तक सभी निर्धारित स्थानों पर तैनात रहेंगे।

    होटलों के भीतर हाउस इंटरवेंशन टीम

    विदेशी मेहमानों की सुरक्षा में एनएसजी की हाउस इंटरवेंशन टीम को लगाया गया है। यह टीम पलक झपकते ही आतंकवादी को ढेर कर देती है। होटल में रह रहे लोगों को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए टीम ऑपरेशन चलाती है। मुंबई आतंकी हमले के बाद से एनएसजी हाउस इंटरवेंशन के ऊपर विशेष जोर दे रही है।

    कुछ महीने पहले एनएसजी के कमांडो और अमेरिका की स्पेशल फोर्स के कमांडो ने चेन्नई में संयुक्त अभ्यास किया था। उस अभ्यास के दौरान भी दोनों ने हाउस इंटरवेंशन के ऊपर जानकारी सांझा की थी। पहले आतंकवादी सामने से हमला करते थे। अब किसी बिल्डिंग में घुस जाते हैं। ऐसे में बिल्डिंग में रह रहे लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आपरेशन चलाना होता है।

    एनएसजी की तरफ से दिल्ली में तैनात टीम

    • काउंटर टेरर के विशेषज्ञ सैकड़ों जांबाज तैनात किए गए हैं
    • एंटी ड्रोन यूनिट दिल्ली के प्रमुख इलाकों में 24 घंटे अलर्ट रहेगी
    • एंटी सबोटाज चेक टीम भी सम्मेलन के दौरान 24 घंटे अलर्ट रहेगी
    • बम डिस्पोजल स्क्वाड भी 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहेगा
    • के-9 यूनिट के 20 सदस्य भी 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहेंगे

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    सूंघकर खतरे का पता लगा लेते हैं के-9 यूनिट के सदस्य

    एनएसजी के-9 यूनिट (डॉग स्क्वाड) के 20 सदस्य दिल्ली में तैनात किए गए हैं। सदस्य सुबह-शाम प्रमुख जगहों पर संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाएंगे। ये सूंघकर खतरे का पता लगा लेते हैं। एक यूनिट में 48 डॉग हैं। सभी के अलग-अलग नाम हैं।

    दिल्ली में तैनात जोरो, करण, गूगल, मांबा, फाक्स सहित सभी डॉग वाकी-टाकी, नाइट विजन ग्लास, क्यूटली डागल्स सहित कई अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं। के-9 की खासियत यह है कि वे सूंघ कर विस्फोटक का पता लगा लेते हैं। संदिग्ध लोगों की पहचान कर लेते हैं। कमांडर का इशारा होते ही हमला बोल देते हैं यानी झपटा मारकर सामने वाले को गिरा देते हैं।

    हथियार तक छीन लेते हैं। यूनिट में जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर, बेल्जियन मैलिनोइस, काकर स्पैनियल सहित कई प्रकार के नस्ल के डॉग हैं। डेढ़ साल में इन्हें प्रशिक्षित किया जाता है। इसके बाद भी प्रतिदिन सुबह-शाम कम से कम दो घंटे का अभ्यास कराया जाता है ताकि वे पूरी तरह अलर्ट रहें।

    समय-समय पर अपडेट करने पर दिया जाता है जोर

    आठ से नौ साल के बाद डॉग को सेवानिवृत कर दिया जाता है। यूनिट के कमांडिंग आफिसर की जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट कर्नल राज भरत शर्मा के पास है। उन्हीं के निर्देशन में यूनिट का अभ्यास प्रतिदिन सुबह साढ़े पांच बजे से शुरू हो जाता है। समय-समय पर अपडेट करने के ऊपर जोर दिया जाता है।

    यूनिट की खासियत यह भी है कि इसे जैमिंग टेक्नोलाजी के हिसाब से भी ट्रेड किया गया है। के-9 यूनिट को जैविक और रासायनिक पदार्थों का पता लगाने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया है। यदि कहीं इस तरह की चीज दबाई हुई है और वहां से के-9 का सदस्य गुजरेगा तो उसे पता चल जाएगा।

    काउंटर टेरेरिज्म के मामले में इस समय पूरी दुनिया में एनएसजी का कोई जवाब नहीं। अत्याधुनिक हथियारों से लैस होने के साथ ही हर तरह की स्थिति से निपटने में कमांडो समक्ष हैं। हाउस इंटरवेंशन सहित कई मामलों में कमांडो की विशेषज्ञ के रूप पहचान होना यह दर्शाता है कि ट्रेनिंग पर कितना जोर दिया जाता है।

    - लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) राज कादियान, पूर्व संस्थापक चीफ इंस्ट्रक्टर, एनएसजी