एफडीआई उल्लंघन के मामले में बीपीटीपी लिमिटेड पर ईडी ने कसा शिकंजा, जांच जारी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीपीटीपी लिमिटेड के खिलाफ फेमा उल्लंघन मामले में दिल्ली और नोएडा में छापेमारी की। कंपनी पर मॉरीशस स्थित कंपनियों से 500 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध एफडीआई प्राप्त करने का आरोप है। जांच में बैंक लॉकर फ्रीज किए गए और कई दस्तावेज़ बरामद हुए। कंपनी के निदेशकों पर परियोजनाएं पूरी न करने और फंड के दुरुपयोग के आरोप भी हैं।

संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम कार्यालय ने 26 और 27 अगस्त को दिल्ली एवं नोएडा स्थित कई ठिकानों पर छापेमारी की।
यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के तहत रियल एस्टेट कंपनी बीपीटीपी लिमिटेड (पूर्व में बिजनेस पार्क टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड) के विरुद्ध की गई। कंपनी के कार्यालयों और इसके चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक काबुल चावला तथा पूर्णकालिक निदेशक सुधांशु त्रिपाठी के घरों की तलाशी ली गई।
जांच में सामने आया कि कंपनी ने मारीशस स्थित कंपनियों से 500 करोड़ रुपये से अधिक का विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त किया था जो फेमा नियमों के विरुद्ध था। इसमें 322.5 करोड़ करोड़ रुपये सीपीआइ इंडिया लिमिटेड और 215 करोड़ रुपये हार्बर विक्टोरिया इन्वेस्टमेंट होल्डिंग लिमिटेड से प्राप्त हुए थे।
यह निवेश 2007–08 में ऑटोमैटिक रूट के जरिए किया गया था और इसमें पुट/स्वैप आप्शन जैसी शर्तें थीं जो निवेशकों को गारंटीड रिटर्न देती थीं। यह उस समय की एफडीआइ नीति का सीधा उल्लंघन था।
छापेमारी के दौरान बैंक लाकर फ्रीज किए गए और कई अहम दस्तावेज़ व डिजिटल सबूत बरामद हुए। रिजर्व बैंक द्वारा बार-बार अनुबंध की शर्तें बदलने और प्रतिबंधित पुट आप्शन हटाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद कंपनी ने पालन नहीं किया। जांच में यह भी सामने आया कि काबुल चावला कई विदेशी कंपनियों के लाभकारी मालिक हैं।
इनमें से एक कंपनी के जरिए न्यूयार्क (अमेरिका) में महंगी संपत्ति खरीदी गई थी जिसकी जांच भी जारी है। साथ ही यह भी पाया गया कि बीपीटीपी लिमिटेड और इसके निदेशकों के विरुद्धा दिल्ली-एनसीआर के कई थानों में परियोजनाएं पूरी न करने और फंड के दुरुपयोग के मामलों में एफआइआर दर्ज हैं। इन मामलों की जांच भी की जा रही है।
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