एनजीटी की फटकार पर सरूरपुर की औद्योगिक यूनिट निशाने पर, जलते प्रतिबंधित स्क्रैप की छह विभागों की टीम करेगी जांच
फरीदाबाद के सरूरपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रतिबंधित स्क्रैप जलाने से हो रहे प्रदूषण पर जिला उपायुक्त ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी की फटकार के बाद, अव ...और पढ़ें

प्रतिबंधित स्क्रैप में इस तरह लगाई जाती है आग। सौ. स्थानीय निवासी
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। सरूरपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रतिबंधित स्क्रैप जलाने पर खूब प्रदूषण होता है। यह स्क्रैप जलता है तो चारों ओर धुआं ही धुआं और इससे भयंकर प्रदूषण हो जाता है। तमाम शिकायतों के बाद भी इन पर पुख्ता कार्रवाई नहीं होती। अब यह शिकायत जिला उपायुक्त तक पहुंची हैं तो उन्होंने यूनिट पर कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों की छह टीमों का गठन कर दिया गया है। इसमें बिजली निगम, नगर निगम, जिला नगर योजनाकार एन्फोर्समेंट, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शामिल हैं।
मामले पर संज्ञान लेते हुए यह रिपोर्ट मांगी
पांच जनवरी तक सभी टीमें यहां हर एक यूनिट की जांच करेंगी। देखा जाएगा कि यूनिट अवैध तरीके से तो नहीं चल रही। इसके अंदर प्रतिबंधित स्क्रैप जलाया जाता है या नहीं। ऐसा पाए जाने पर यूनिट काे सील किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट 15 जनवरी 2026 तक एनजीटी में जमा करानी होगी। याद रहे एनजीटी में चल रहे एक मामले पर संज्ञान लेते हुए यह रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को होगी। तब एनजीटी इस रिपोर्ट का आंकलन करेगा और आगामी आदेश दिया जाएगा।
दिन ढलते ही जलना शुरू हो जाता है स्क्रैप
जिले में कई ऐसे गांव हैं, जिनके रकबे में कृषि योग्य भूमि पर अवैध प्लाॅटिंग की हुई है। यहां औद्योगिक यूनिट चलाई जा रही हैं। इनमें सरूरपुर, नंगला, कुरेशीपुर, मादलपुर, नेकपुर, गाजीपुर और फतेहपुर गांव शामिल हैं। यहां ऐसी यूनिट भी हैं जहां प्रतिबंधित स्क्रैप जलाया जाता है।
एल्युमिनियम का स्क्रैप जलाकर सिल्लियां बनाई जाती हैं। यह खेल रात को होता है। भट्टियों में कोयला डालकर स्क्रैप को गलाया जाता है। इससे काफी धुआं होता है और इससे वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता है। आस-पास रहने वाले लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है।
रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी को सौंपी
कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। इससे परेशान होकर सिरोही गांव के रहने वाले समाजसेवी नरेंद्र सिरोही ने इस मामले में याचिका एनजीटी में दायर की थी।
इनकी याचिका पर ही एनजीटी ने 12 फरवरी 2025 को विभागीय अधिकारियों की एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने 19 मई 2025 को रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी को सौंपी। इस रिपोर्ट में भी स्वीकार किया गया था कि यहां काफी यूनिट अवैध तरीके से चल रही हैं।
इन यूनिट में स्क्रैप जलाया जाता है। जांच टीम को मौके पर कई जगह राख के ढेर पड़े हुए मिले। जांच में सामने आया कि यह प्रतिबंधित स्क्रैप की राख है। इसके नमूने ले लिए हैं। इस तरह के स्क्रैप के जलने से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है।
'टीमें आती हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करतीं'
नरेंद्र सिरोही का आरोप है कि सर्दी में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। आम जगह भी आग लगाने पर प्रशासन सख्ती बरतता है लेकिन इन जगहों पर तो प्रतिबंधित स्क्रैप जलाया जाता है लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसमें मिलीभगत है। यहां टीमें आती जरूर हैं लेकिन देखकर वापस चली जाती हैं।
"जिला उपायुक्त के आदेश पर विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारियों की छह टीमों ने जांच शुरू कर दी है। यहां प्रत्येक क्षेत्र में जाकर प्रत्येक यूनिट की जांच हो रही है। इसकी कंपाइल रिपोर्ट पांच जनवरी को तैयार हो जाएगी। अवैध पाए जाने पर यूनिट सील की जाएंगी। एक भी यूनिट को नहीं बख्शा जाएगा। प्रतिबंधित स्क्रैप को लेकर काफी सख्ती की जा रही है। इसलिए यूनिट संचालक ऐसे स्क्रैप को कतई न जलाएं।"
-हरीश शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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