Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    दम तोड़ रहे पाकिस्तानी सिनेमाघर, 38 टॉकीज हो चुके हैं बंद; फौजी तानाशाही से जुड़ा है मामला

    भारत में सिनेमा को देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। फिल्मों की कमाई से देश की प्रगति में योगदान मिलता है। दूसरी ओर पाकिस्तानी सिनेमा की स्थिति वर्तमान में काफी खराब है। इंडस्ट्री तेजी से अपने पतन की ओर बढ़ रही है। भारत से रिश्ते खराब करने से सबसे ज्यादा नुकसान पड़ोसी देश के सिनेमा को हुआ है। आइए इस स्थिति को समझने की कोशिश करें..

    By Anu Singh Edited By: Anu Singh Updated: Sat, 22 Mar 2025 12:10 PM (IST)
    Hero Image
    पाकिस्तान में बंद होते जा रहे हैं मूवी थिएटर? (Photo Credit- X)

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान और भारत के बीच का रिश्ता आज तक कोई नहीं समझ पाया है। कई तरह के वाद-विवाद के बाद भी जिस एक चीज ने दोनों देशों को जोड़ कर रखा हुआ है वो सिनेमा है। आप में से कई लोग पाकिस्तान के कई शोज को बड़े पसंद से देखते हैं। वहीं पाकिस्तान में भी इंडियन फिल्मों का भी खासा क्रेज देखने को मिलता रहा है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    मगर मौजूदा हालात एक अलग कहानी कह रहे हैं। क्या पाकिस्तानी सिनेमा बर्बादी की तरफ बढ़ता जा रहा है? एक ऐसा सवाल जिसका जवाब ढूंढने से पहले इसे समझना जरूरी है। भारत के साथ खराब रिश्तों के कारण पाकिस्तान को काफी नुकसान हुआ है जिसका बड़ा हिस्सा सिनेमा भी है। ताजा रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान में 2018 से अब तक करीब 40 फीसदी स्क्रीन बंद की जा चुकी हैं।

    पाकिस्तान के सिनेमाघरों में बढ़ते ताले

    अब आप में से कई लोग सोच रहे होंगे कि पाकिस्तानी ड्रामा देश के बाहर भी खूब पसंद किए जाते हैं। मगर हम यहां फिल्मों की बात कर रहे हैं। जहां टीवी ड्रामा के मामले में पाकिस्तान को सबकी तारीफें मिल रही हैं तो वहीं पिक्चर के मामले में ये अपनी पहचान खोता चला जा रहा है। पड़ोसी मुल्क के सिनेमाघरों में अब ऑडियंस नहीं ताले झूम रहे हैं।

    Photo Credit- X

    द प्रिंट की एक खबर के मुताबिक, फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर नदीम मांडवीवाला ने बातचीत में बताया है कि अब तक पाकिस्तान में लगभग 36 सिनेमाघरों के 58 स्क्रीन्स को बंद किया जा चुका है। वहीं 9 स्क्रीन्स को टेंपरेरी क्लोज किया गया है। इसके पीछे एक नहीं कई सारे कारण शामिल हैं। जैसे की अच्छा कंटेंट की कमी, बजट का ना होना और लोगों के बदलते प्रिफरेंसेज। सिनेमा को टिके रहने के लिए नियमित आपूर्ति की जरूरत है, ऐसा पाकिस्तान फिल्म फेडरेशन के हेड शहजाद रफिक मानते हैं। उन्होंने कहा,

    "सिनेमा को रेलिवेंट रहने के लिए जरूरी है कि अच्छा कॉन्टेंट बनता रहे। आर्थिक तंगी और अच्छी स्क्रिप्ट की कमी की वजह से ना तो फिल्में बन रही हैं और ना ही लोग उसे देखने जा पा रहे हैं। जो कॉन्टेंट बनाया जा रहा है वो मिडिल क्लास के लिए महंगा हो गया है और एलीट क्लास को मेकर्स कन्विन्स नहीं पा रहे। ऐसे में लोग फिल्में देखने नहीं जा रहे।"

    ये भी पढ़ें- टीवी से लेकर ओटीटी ऐड तक, क्या आपको पता है देश का पहला विज्ञापन? इस चीज की हुई थी बिक्री

    80 से ज्यादा फिल्मों का होता था प्रोडक्शन

    अल जजीरा की एक रिपोर्ट में बताया जाता है कि, लॉलीवुड (पाकिस्तानी फिल्म फिल्म इंडस्ट्री) को 1980 के दशक की सैन्य तानाशाही के दौरान दबा दिया गया था। कई नए सेंसरशिप कानूनों लाए गए जिसके बाद जिसकी वजह से सिनेमा पर बैन की नौबत आने लगी।

    एक समय सालाना 80 से अधिक फिल्में बनाने के बाद, सदी के अंत में इसने उर्दू फिल्में रिलीज करना बंद कर दिया। लेकिन 2003 में रेवोल्यूशन शुरू हुआ, जब कराची से कई नए फिल्म निर्देशक सामने आए। इन्होंने कम बजट में फिल्मों बनाने का एक्सपेरिमेंट शुरू किया। इसके बाद पाकिस्तानी सिनेमा की गाड़ी वापस लेन में आने लगी थी।

    जब बॉलीवुड फिल्मों से हटा बैन

     बॉलीवुड की फिल्मों का 40 साल का बौन 2006 में पाकिस्तान से हटाया गया। फिर साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म बजरंगी भाईजान। फिल्म की कमाई ने वहां के बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कलेक्शन किया। इस फिल्म के बाद पाकिस्तान में बॉलीवुड फिल्म की लोकप्रियता बढ़ने लगी। इसके बाद संजू, गली बॉय, काबिल और सिम्बा जैसी फिल्मों को वहां की ऑडियंस ने खूब प्यार दिया। हालांकि बैन और रिलीज का सिलसिला जारी था मगर वहां के लोगों में इन फिल्मों के लिए खास जगह बन गई थी। मगर अच्छी चीजों को भी नजर लगते देर नहीं लगती।

    Photo Credit- X

    आखिरी बार हिट हुई थी ये फिल्म 

    साल 2019 में पुलवामा आतंकी हमले हुआ जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान में फिल्में रिलीज करने से साफ इनकार कर दिया। साल 2019 तक पाकिस्तानी फिल्मों का देश में 50% बाजार पर कब्जा था और धीरे-धीरे इसके बढ़ने की उम्मीद लगाई जा रही थी, लेकिन 2019 के बाद ये उम्मीद भी चकनाचूर हो गई।

    Photo Credit- X

    पाकिस्तानी फिल्मों की बात करें तो आखिरी बार यानी साल 2022 में थिएटर में फवाद खान की फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ आई थी जिसने कमाई के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे और ये एक गेम चेंजर साबित हुई थी। फिल्म ने खूब तगड़ी कमाई की थी। लेकिन इस बात को तीन साल बीत गए हैं और अभी तक ऐसी कोई फिल्म नहीं आ पाई है जो इस आकाल को खत्म कर पाए।

    ये भी पढ़ें- Anurag Kashyap के बॉलीवुड छोड़ने से क्या होगा इंडस्ट्री का घाटा? इन दो सितारों ने दिया रिएक्शन