58 सालों से Lata Mangeshkar के इस गीत पर 'गरबा' कर रही हैं महिलाएं, Nutan पर फिल्माया गया था कल्ट गाना
लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने 58 साल पहले 'गरबा एंथम' गाया था जो आज भी कल्ट क्लासिक गानों में से एक है। इस गाने के बिना गरबा अधूरा है।

लता मंगेशकर का गरबा सॉन्ग
HighLights
लता मंगेशकर का गरबा स्पेशल सॉन्ग
58 सालों से गरबा में बजता है ये गीत
नूतन ने महिलाओं संग किया था गरबा डांस
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्रि शुरू होने वाली है और लड़कियां गरबा नाइट्स (Garba) में थिरकने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। बॉलीवुड ने कई गरबा सॉन्ग्स (Garba Songs) दिए हैं जो हर साल गरबा के दौरान बजते हैं। इनमें एक गाना लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का भी है।
लता मंगेशकर ने 58 साल पहले एक गरबा सॉन्ग गाया था। इस गीत के बोल भले ही एक लड़की के विदाई के इर्द-गिर्द घूमते हैं, लेकिन इसका बैकग्राउंड गरबा वाइब देता है। इस गाने पर दिवंगत अदाकारा नूतन (Nutan) गरबा डांस (Garba Dance) करती हुई नजर आई थीं।
60s में आया था गाना
जिस गीत की हम बात कर रहे हैं, वो 1968 में बनी फिल्म 'सरस्वतीचंद्र' (Saraswatichandra 1968) का है। इस फिल्म की कहानी कुमुद और सरस्वती की है जिनकी शादी टूट जाती है और कुमुद को एक ऐसे शख्स से शादी करनी पड़ती है जो उसे प्रताड़ित करता है।
नूतन ने गाने में डाली थी जान
फिल्म का गाना एक ऐसे समय में फिल्माया जाता है, जब कुमुद (नूतन) मन ही मन दुखी है, लेकिन समाज को अपना दुख न दिखाना पड़े, इसलिए वह कहती है कि पिया का घर उसे इतना अच्छा लग रहा है कि वह अपने बाबुल का देस भूल गई है... अब समझ गए होंगे कि हम किस गीत के बारे में बात कर रहे हैं। यह गीत है- मैं तो भूल चली बाबुल का देश पिया का घर प्यारा लगे (Main To Bhool Chali Babul Ka Des Piya Ka Ghar Pyara Lahge)।

गीत के बोल और धुन कहती हैं अलग-अलग कहानी
इस गीत के बोल एक बहू का अपने बाबुल यानी पिता के घर को भूल ससुराल को अपनाने की है, लेकिन यह 58 सालों से इसलिए गरबा सॉन्ग बना है, क्योंकि इसकी धुन गरबा से प्रेरित है और इसके बैकग्राउंड को भी गरबा थीम पर ही फिल्माया गया है। वीडियो में नूतन समेत महिलाएं गरबा डांस करती हुई नजर आ रही हैं।
लता मंगेशकर ने गाया था गीत
इस गीत को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी। उनकी आवाज में यह गीत अमर हो गए। इसके बोल आज भी दिल को छू जाते हैं और तरोताजा महसूस कराते हैं। इसके बोल लिखने वाले जादुई गीतकार इंदीवर हैं।
इस गीत की धुनों को कल्याण-आनंदजी की जोड़ी ने बनाया था। वह भी गुजराती थे और उन्होंने इस गीत को गुजराती थीम पर ही बनाया जो अब कल्ट क्लासिक सॉन्ग्स में गिना जाता है।
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