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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 06, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कैसे एक आइडिया ने रच दिया भारतीय सिनेमा का इतिहास, दादा साहेब फाल्के की पहली मूवी की हकीकत

By Anu Singh Edited By: Anu Singh
Published: Tue, 06 May 2025 04:19 PM (IST)Updated: Tue, 06 May 2025 05:02 PM (IST)

भारतीय सिनेमा का इतिहास कई साल पुराना है। रोज ही सिनेमाघरों से लेकर ओटीटी पर कितनी ही फिल्में रिलीज होती ...और पढ़ें

कैसे बनी थी भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म? (Photo Credit- X)
कैसे बनी थी भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म? (Photo Credit- X)

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। लगभग 112 साल पहले भारतीय सिनेमा ने अपनी पहली सैर की थी, जब दादा साहेब फाल्के ने 1913 में मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र बनाई। यह फिल्म बॉम्बे (अब मुंबई) में रिलीज हुई और लोगों के लिए एक नया अनुभव थी। इसमें किरदार बिना बोले सिर्फ एक्टिंग करते थे। दादा साहेब फाल्के ने इस फिल्म से भारतीय सिनेमा की नींव रखी। उनकी प्रेरणा और संघर्ष की कहानी आज भी प्रेरित करती है। आइए जानें कैसे बनी थी भारत की पहली फिल्म।

दादा साहेब फाल्के का सपना

महाराष्ट्र के त्र्यंबक में जन्मे धुंडिराज गोविंद फाल्के, जिन्हें दादा साहेब फाल्के के नाम से जाना जाता है, बचपन से कला के दीवाने थे। 1890 के दशक में उन्होंने बड़ौदा के कला स्कूल में पढ़ाई की और फोटोग्राफी सीखी। फोटोग्राफी में काम शुरू करने के बाद उन्हें अंग्रेजी फिल्में देखकर भारतीय संस्कृति पर फिल्म बनाने का ख्याल आया। लेकिन फिल्म बनाने की तकनीक उनके लिए नई थी। फिर भी, उन्होंने ठान लिया कि वह भारत में कुछ अनोखा करेंगे।

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जर्मन जादूगर और लंदन का सफर

फाल्के की मुलाकात एक मशहूर जर्मन जादूगर से हुई, जिसने उन्हें फिल्म बनाने की कुछ तरकीबें सिखाईं और लंदन जाने की सलाह दी। 1912 में फाल्के लंदन पहुंचे और वहां एक साप्ताहिक मैगजीन के संपादक से मिले। संपादक ने उन्हें एक अंग्रेजी फिल्ममेकर से मिलवाया। तीन महीने तक फाल्के ने फिल्म लेखन, शूटिंग, और संपादन की बारीकियां सीखीं। इस दौरान उनके दिमाग में राजा हरिश्चंद्र की कहानी पर फिल्म बनाने का विचार आया।

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‘राजा हरिश्चंद्र’ ने रचा इतिहास

भारत लौटने पर फाल्के ने विदेश से कैमरा और जरूरी सामान खरीदा, लेकिन उनका सारा पैसा खत्म हो गया। उनकी पत्नी सरस्वती फाल्के ने अपने गहने बेचकर उनका हौसला बढ़ाया। फाल्के ने हार नहीं मानी और राजा हरिश्चंद्र की शूटिंग शुरू की। 1913 में रिलीज हुई इस फिल्म में डी.डी. दबके ने राजा हरिश्चंद्र का किरदार निभाया। मूक फिल्म होने के बावजूद यह लोगों को खूब पसंद आई, क्योंकि यह भारत में पहली बार सिनेमा का जादू था।

राजा हरिश्चंद्र की सफलता ने फाल्के को भारतीय सिनेमा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी। उनकी मेहनत और जुनून ने साबित किया कि सपने सच हो सकते हैं। आज दादा साहेब फाल्के को भारतीय सिनेमा का जनक माना जाता है, और उनकी विरासत हर फिल्म में जीवित है। 

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