बागेश्वर, जेएनएन : टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन की मांग दशकों पुरानी हैं। लेकिन केंद्र सरकार की उपेक्षा के कारण आज तक यह रेल लाइन नही बन पाई हैं। हर बार चुनावों के समय ही रेल लाइन निर्माण का आश्वासन क्षेत्रवासियों को दिया जाता है। चुनाव होते ही इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता हैं।

पहाड़ में रेल लाइन का निर्माण अब सपना बनकर ही रह गया हैं। सबसे पहले 1882 में अंग्रेजों ने इस रेल लाइन का सर्वे किया था। उन्होंने उसके बाद पहाड़ में रेल लाइन बिछानी भी शुरु कर दी थी। उस समय टनकपुर से करीब एक किमी रेल की पटरियां बिछाई भी गई। 1947 में देश आजाद हुआ तो इस रेल लाइन का निर्माण कार्य भी ठंडे बस्ते में चले गया। जब सरकार ने इस रेल लाइन निर्माण में रुचि नही दिखाई तो उसके बाद चंपावत, बागेश्वर, पिथौरागढ़ के लोगों ने सरकार पर दवाब बनाने के लिए समय-समय पर आंदोलन किए। उन्होंने कई महीनों तक दिल्ली के जंतर मंतर में आंदोलन भी किया। आंदोलन के बाद सरकार की ओर से आश्वासन तो मिला लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई आज तक नही हुई। 2018 में रेल मंत्री पियूष गोयल से आंदोलनकारियों से मुलाकात की। जिसके बाद उन्हें आश्वासन मिला। लेकिन बजट में इसके बाद भी कोई प्राविधान नही किया गया। सर्वे के नाम पर हमेशा पहाड़ की जनता की भावनाओं से खिलवाड़ के अलावा कुछ नही हुआ।

फिर एक बार दिया झुनझुना

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले फिर केंद्र सरकार ने सर्वे करने का झुनझुना थमा दिया हैं। दावे किए जा रहे है कि रेल लाइन का निर्माण कार्य जल्द शुरु किया जाएगा। लेकिन वर्षों के अनुभव को देखते हुए क्षेत्र की जनता को फिलहाल केंद्र सरकार की इस बात पर भरोसा नही।

रेल लाइन को लेकर अब तक किए गए प्रयास

  • 1882 में ब्रिटिश शासन काल में बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन का प्रस्ताव आया
  • 1912 में सबसे पहले अंग्रेजों ने इस रेल लाइन की सर्वे कराया
  • टनकपुर से बागेश्वर की ओर एक किमी रेल पटरी बिछाई गई
  • यूपीए सरकार में 2006, 2009, 2010, 2011 में रेल लाइन के लिए सर्वे हुआ
  • 2011 में रेल लाइन राष्ट्रीय परियोजना घोषित हुई
  • 2018 में रेल लाइन की डीपीआर तैयार करने को लेकर रेल मंत्री ने दिया आश्वासन
  • 2019 बागेश्वर रेल लाइन के सर्वे को लेकर फिर मिली धनराशि

रेल लाइन के लिए जारी रहेगा आंदोलन

नीमा दफौटी, अध्यक्ष बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन संघर्ष समिति इस बारे में बताया कि बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन को लेकर आंदोलन जारी है। सरकार ने क्षेत्र के साथ धोखा किया है। वह लगातार आंदोलन को जारी रखेंगे। यह रेल लाइन यहां के आॢथक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

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Posted By: Skand Shukla

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