Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Lok Sabha Election 2024: इस सीट पर क्‍या 'हाथी' चलेगा अलग चाल, बसपा की रणनीति से बिगड़ रहा बाकियों का गणित

    By Jagran News NetworkEdited By: Jagran News Network
    Updated: Tue, 19 Mar 2024 03:38 PM (IST)

    चंबल की मुरैना-श्योपुर लोकसभासीट पर बसपा प्रत्याशी की भूमिका जीत और हार में अहम होती है। बसपा की एक चाल से इस सीट का समीकरण बदल जाता है। पिछले दो चुनाव में बसपा ने कांग्रेस का काम बिगाड़ा। इस चुनाव में भी अब सभी की निगाहें बहुजन समाज पार्टी के कदम पर टिकी हैं। हालांकि बसपा ने अभी तक प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है।

    Hero Image
    मुरैना-श्योपुर लोकसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी के चलते बदलते रहे हैं जीत-हार के समीकरण।

    हरिओम गौड़, मुरैना। चंबल की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (BSP) का एक समय काफी दबदबा था। उसके एक कदम से चुनावी समीकरण धड़ाम हो जाते थे। हर चुनाव में बीएसपी के हाथी का अपना महत्व था। कोई भी दल इसकी अनदेखी नहीं कर सकता था। मगर अब हालात बदल चुके हैं।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    चंबल घाटी में बीएसपी की अब वो ताकत नहीं रही। अब यहां हाथी की भूमिका प्यादा की तरह रह गई है। पिछले दो लोकसभा चुनाव इसकी बानगी हैं। इस लोकसभा चुनाव में हाथी क्या गुल खिलाएगा? इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है।

    जब कांग्रेस की उम्मीदों पर बसपा ने फेरा पानी

    पिछले 10 साल में बसपा की स्थिति मध्य प्रदेश के चंबल संभाग में बदली है। 2014 लोकसभा चुनाव में बसपा ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी थी। मुरैना-श्योपुर सीट से भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के भांजे अनूप मिश्रा को उतारा था। इस सीट पर क्षत्रिय वोट काफी प्रभावशाली है। यही वजह है कि कांग्रेस ने डॉ. गोविंद सिंह को मैदान में उतारा था। मगर बसपा ने कांग्रेस का काम बिगाड़ दिया था।

    बसपा ने यहां से वृंदावन सिंह सिकरवार को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। वृंदावन सिंह सिकरवार का क्षेत्र के क्षत्रिय समाज में खासा प्रभाव है। यही वजह है कि बसपा दूसरे और कांग्रेस को तीसरे स्थान पर रहना पड़ा। आपको बता दें कि 2014 से पहले तक गोविंद सिंह कोई भी चुनाव नहीं हारे थे।

    दिलचस्प था 2019 का लोकसभा चुनाव

    2019 लोकसभा का चुनाव भी मुरैना में दिलचस्प रहा। यहां बसपा की एक सियासी चाल से समीकरण बदल गए। भाजपा ने नरेंद्र सिंह तोमर को यहां से अपना प्रत्याशी बनाया था। वहीं कांग्रेस ने रामनिवास रावत को चुनावी समर में उतारा था। बसपा ने रामलखन सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया। रामलखन सिंह की पहचान भिंड के कद्दावर क्षत्रिय नेता के रूप में होती है। रामलखन पहले भाजपा में भी रह चुके हैं।

    जब अचानक बसपा ने बदल दिया प्रत्याशी 

    बसपा ने चुनाव से ठीक पहले रामलखन सिंह का टिकट काट दिया और उनकी जगह करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतार दिया। भड़ाना यूपी और हरियाणा सरकार में मंत्री रह चुके हैं। अगर रामलखन सिंह चुनाव मैदान में होते तो क्षत्रिय वोट बंटता और भाजपा के सामने एक मुश्किल राह होती। मगर करतार सिंह भड़ाना ने भाजपा की राह आसान कर दी थी।

    भड़ाना के आने से क्षत्रिय वोट नरेंद्र सिंह तोमर की तरफ मुड़ गया। वहीं गुर्जर वोट को करतार सिंह भड़ाना ने अपनी ओर मोड़ लिया। उन्हें 1.29 लाख मत मिले थे। नतीजा यह रहा कि भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह तोमर को 1.13 लाख मतों से जीत मिली।

    अभी कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की। माना जा रहा है कि कांग्रेस के एलान के बाद बसपा भी अपने प्रत्याशी की घोषणा करेगी। 

    और ऐसा दौर भी देखा हाथी ने

    2019 में बसपा ने करतार सिंह भड़ाना को अपना उम्मीदवार बनाया। उन्हें 11.38 फीसदी मत मिले थे। भाजपा को 47.63 और कांग्रेस को 37.66 फीसदी मत मिले थे। लोकसभा चुनाव में बसपा हमेशा दूसरे या तीसरे स्थान पर रही। 2009 लोकसभा चुनाव में भी बसपा को 20 फीसदी मत मिले थे।

           2014 लोकसभा चुनाव

    दल मत प्रतिशत
    बसपा 28.40
    कांग्रेस 21.57
    भाजपा 43.96

    यह भी पढ़ें -जब हरियाणा की एक सीट पर 122 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ बनाया था रिकॉर्ड; 5 को मिले इतने वोट कि हैरत में पड़ गए लोग

    यह भी पढ़ें -Lok Sabha Election 2024: 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ये दिग्गज नहीं बचा सके थे साख, सिंधिया भी हारे थे सियासी 'राजधानी'