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Lok Sabha Election 2024: झारखंड के महासमर में इन मुद्दों की गूंज, जानिए भाजपा और झामुमो ने किसे बनाया हथियार

Jharkhand Lok Sabah Election 2024 हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद झारखंड की चुनावी जंग और भी रोचक हो चली है। जहां भाजपा भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रही है तो झामुमो इसे झारखंडी अस्मिता से जोड़कर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा और भी कई मुद्दे दोनों पक्षों की ओर से उठाए जा रहे हैं। जानिए झारखंड में भाजपा और आईएनडीआईए की रणनीति।

By Jagran News Edited By: Sachin Pandey Published: Sat, 18 May 2024 09:35 AM (IST)Updated: Sat, 18 May 2024 09:35 AM (IST)
Lok Sabha Election 2024: पांचवे, छठे और सातवें चरण में झारखंड की 10 सीटों पर मतदान होना है।

आरपीएन मिश्र, रांची। लोकसभा चुनाव में इस बार झारखंड में कई मुद्दे गूंज रहे हैं। भाजपा ने भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाकर आक्रामक प्रचार अभियान छेड़ रखा है। झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जमीन घोटाला में जेल जाने के बाद अब टेंडर घोटाला में उन्हीं की सरकार के कांग्रेसी मंत्री आलमगीर आलम को ईडी ने भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया है। इससे भाजपा को चुनाव के बीच में ही एक और बड़ा मुद्दा मिल गया है।

कांग्रेस और झामुमो दोनों इससे असहज हैं, लेकिन चुनाव में भ्रष्टाचार के मुद्दे के मुकाबले केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा केंद्रीय एंजेसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष के नेताओं को जेल में बंद करने का मुद्दा उठाकर वोटरों की सहानुभूति बटोरने की कोशिश हो रही है। खासकर हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को झारखंडी अस्मिता से जोड़ने का प्रयास हो रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसे लेकर झारखंड झुकेगा नहीं.. का नारा दिया है।

भाजपा ने भ्रष्टाचार को बनाया मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के तमाम नेताओं और स्टार प्रचारकों के भाषणों में नोटों का पहाड़ छाया हुआ है। भ्रष्टाचारियों को चुन-चुन कर जेल भेजने और पाई-पाई वसूलने की भी बात कही जा रही है। भाजपा के कुछ प्रचार विज्ञापनों में भी आइएनडीआइए के नेताओं के ठिकानों से बरामद नोटों के बंडल दिखाए गए हैं। इनमें कहा गया है कि आपका हरएक वोट ने भ्रष्टाचारियों की नकेल कसने की ताकत दी है।

भाजपा बोली, लूट का कोई अवसर नहीं छोड़ा

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी भी कहते हैं कि जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का विलाप कर रही झामुमो-कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद जनता को लूटने का कोई अवसर नहीं छोड़ा। पिछले दिनों भारी मात्रा में कैश बरामदगी होने के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं किया जाना अत्यंत निराशाजनक है और प्रमाण है कि वे भी इस लूट के खेल में बराबर के हिस्सेदार हैं।

इधर झारखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर कहते हैं कि सवाल यह है कि ऐसी कार्रवाई सिर्फ एनडीए से इतर बाकी दलों की ओर से शासित राज्यों में क्यों हो रही है? हम किसी भी भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करते, लेकिन जिस तरीके से राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है, उसे जनता बखूबी देख-समझ रही है।

नक्सलियों को संरक्षण देने का सवाल

प्रधानमंत्री और गृहमंत्री झारखंड की सभी जनसभाओं में नक्सलियों की नकेल कसने का भी मुद्दा उठा रहे हैं। वह कह रहे हैं कि नक्सलवाद कांग्रेस की सरकारों की देन है, जबकि मोदी सरकार ने नक्सलियों और आतंकियों का सफाया किया। आनेवाले दिनों में इनपर और भी प्रभावी कार्रवाई होगी। साथ ही अब दोबारा झारखंड में नक्सलियों की वापसी नहीं होने देंगे। दशकों तक नक्सलियों का आतंक झेलने वाले राज्य में यह मुद्दा भी लोगों के मन को छूने वाला साबित हो सकता है।

झारखंडी स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन

झारखंड जल-जंगल-जमीन और स्थानीयता के मुद्दों को जोर-शोर से उठाने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस चुनाव में भी लोगों की भावनाएं उभारते हुए स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखा है। आदवासियों को धार्मिक पहचान देने वाले सरना धर्म कोड, झारखंड की स्थानीयता नीति, राज्य में ओबीसी आरक्षण की सीमा बढ़ाने जेसे मुद्दों पर झामुमो भाजपा को घेर रहा है।

झामुमो नेताओं का आरोप है कि राज्य की 14 लोकसभा सीटों में झारखंड की जनता ने भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी आजसू को 12 सीटें देकर संसद भेजा, लेकिन इन सांसदों ने यहां के जमीनी मुद्दों पर दोहरा रवैया अपनाया। खूंटी से भाजपा के सांसद व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा इसे झामुमो का प्रपंच बताते हैं। वह दावा करते हैं कि झारखंड की जनता सच्चाई जानती है और बहकावे में नहीं आएगी।

खनिजों की रायल्टी का जवाब डीएमएफ से

हेमंत सोरेन समेत झामुमो के तमाम नेता यह कहते रहे हैं कि झारखंड के खनिजों की रायल्टी मद का 1.36 लाख करोड़ रुपये केंद्र पर बकाया है, जिसे मांगने पर केंद्र टालमटोल करता है। अगर यह पैसे मिल जाते तो राज्य में विकास की गंगा बहती। अब हेमंत की गिरफ्तारी के बाद झामुमो इसे जोर-शोर से प्रचारित करती है कि हेमंत सोरेन ने केंद्र से खनिजों की रायल्टी मद का बकाया मांगा तो उन्हें जेल भेज दिया गया।

उधर, खनिजों से ही जुड़े डीएमएफटी (डिस्ट्रिक्ट मिनरल्स फाउंडेशन ट्रस्ट) का सवाल उठाकर पीएम मोदी औऱ अन्य भाजपा नेताओं ने राज्य की झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। पीएम ने कहा कि इस मद में झारखंड को 12 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं, लेकिन विकास की यह राशि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।

अफीम की खेती और तस्करी का भी उठ रहा मुद्दा

झारखंड के चतरा, लातेहार, पलामू व खूंटी इलाके में नक्सलियों के संरक्षण में अवैध तरीके से अफीम की खेती होती रही है। झारखंड से बड़े पैमाने पर तस्कर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और मुंबई तक अफीम की तस्करी करते हैं। हाल ही में चतरा की जनसभा में प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को भी उठाया।

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पीएम ने कहा, 'आइएनडीआई के नेताओं को आपकी रोजी-रोटी की कोई चिंता नहीं है। उनको सिर्फ अपना स्वार्थ देखना है। झामुमो और कांग्रेस ने झारखंड में सिर्फ एक ही उद्योग लगाया है- वह है अफीम उद्योग। ये काला कारोबार सरकार के संरक्षण में चल रहा है और यह आपके बच्चों को नशे की दलदल में धकेलना चाहते हैं।'

दोनों ओर से महिलाओं को लखपति बनाने के दाव

खास बात यह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों महिलाओं को लखपति बनाने की घोषणा कर रहे हैं। कांग्रेस ने गरीब परिवार की महिलाओं में हर साल एक लाख रुपये भेजने की घोषणा की है। उधर, भाजपा भी स्वयं सहायता समूह की तीन करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने की घोषणा की है। महिलाएं इन घोषणाओं के प्रति आकर्षित हो रही हैं।

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संविधान और आरक्षण का सवाल

कांग्रेस और झामुमो की सभाओं में यह आरोप मढ़ा जाता है कि भाजपा और पीएम मोदी संविधान को बदलना चाहते हैं। हालांकि इसके जवाब में एससी-एसटी और ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए पीएम समेत भाजपा के तमाम नेता आईएनडीआईए को चुनौती देते हुए कहते हैं कि कांग्रेस तुष्टीकरण के लिए एससी, एसटी और ओबीसी के हिस्से का आरक्षण अपने वोट बैंक में बांट देना चाहती है।

वे कहते हैं कि धर्म के आधार पर आरक्षण संविधान विरोधी है और भाजपा यह होने नहीं देगी। प्रधानमंत्री यह भी कहते हैं कि किसी में हिम्मत नहीं कि मोदी के रहते संविधान को हाथ भी लगा सके। यह संविधान को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे मुद्दे का जहां करारा जवाब है, वहीं अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के मन को भी यह विषय छू रहा है।

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