खालिस्तानियों का उत्पात, चरमपंथियों को लेकर भारत को रहना होगा सतर्क
कनाडा तो एक तरह से खुले आम खालिस्तानी आतंकियों को पाल-पोस रहा है। वहां खालिस्तानी तत्वों के साथ भारत से भाग कर गए गैंगस्टर भी फल-फूल रहे हैं और ड्रग तस्कर भी। पिछले कुछ समय से अमेरिका कनाडा ब्रिटेन आस्ट्रेलिया आदि में खालिस्तानी चरमपंथी जिस तरह लगातार हिंदू मंदिरों को निशाना बना रहे हैं उसे महज दुर्योग नहीं कहा जा सकता।
अमेरिका में खालिस्तान समर्थक चरमपंथी किस तरह बेलगाम हैं, इसका ताजा प्रमाण है उनकी ओर से कैलिफोर्निया के नेवार्क में एक हिंदू मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी आपत्तिजनक नारे लिखना। इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कैलिफोर्निया पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, क्योंकि अतीत में हुई इस तरह की घटनाओं में कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे खालिस्तान समर्थकों के दुस्साहस पर लगाम लगती। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि कैलिफोर्निया में ही सैन फ्रांसिस्को स्थित भारत के वाणिज्य दूतावास को खालिस्तानी चरमपंथी इसी वर्ष दो बार निशाना बना चुके हैं। जहां मार्च में उन्होंने इस दूतावास में खालिस्तानी झंडा लगाने की कोशिश की थी, वहीं जुलाई में उसके परिसर में घुसकर आगजनी की थी।
अमेरिकी प्रशासन ने इन घटनाओं की निंदा तो की, लेकिन उत्पात मचाने वाले खालिस्तानियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की। यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि अमेरिका जानबूझकर खालिस्तानी चरमपंथियों की भारत विरोधी हरकतों की अनदेखी कर रहा है। अमेरिका किसी भारतीय एजेंट की ओर से खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश को लेकर तो खूब चिंता जता रहा है, लेकिन भारत में वांछित इस आतंकी के खिलाफ कार्रवाई करने में जानबूझकर आनाकानी कर रहा है। गुरपतवंत सिंह पन्नू आए दिन भारत को धमकियां देता रहता है, लेकिन अमेरिका की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। पन्नू कभी एअर इंडिया के विमान को निशाना बनाने की धमकी देता है और कभी भारतीय संसद को, लेकिन अमेरिका उसके खिलाफ कुछ भी नहीं कर रहा है।
खालिस्तानी चरमपंथियों को शह-समर्थन देने का जो काम अमेरिका कर रहा है, वही कनाडा और ब्रिटेन भी। कनाडा तो एक तरह से खुले आम खालिस्तानी आतंकियों को पाल-पोस रहा है। वहां खालिस्तानी तत्वों के साथ भारत से भाग कर गए गैंगस्टर भी फल-फूल रहे हैं और ड्रग तस्कर भी। पिछले कुछ समय से अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया आदि में खालिस्तानी चरमपंथी जिस तरह लगातार हिंदू मंदिरों को निशाना बना रहे हैं, उसे महज दुर्योग नहीं कहा जा सकता। इसलिए और भी नहीं, क्योंकि इन देशों में हिंदू मंदिरों पर एक जैसे भारत विरोधी नारे लिखे गए।
हालांकि भारत सरकार खालिस्तान समर्थकों के प्रति नरमी बरतने के पश्चिमी देशों के रवैये पर कई बार अपनी नाराजगी प्रकट कर चुकी है, लेकिन उनके कान पर जूं नहीं रेंग रही है। इससे यही संकेत मिलता है कि ये देश जानबूझकर खालिस्तान समर्थक अतिवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहे हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि ये देश इसलिए अपने यहां सक्रिय खालिस्तानियों के प्रति नरमी बरत रहे हैं, ताकि भारत पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद के फिर से उभरने की आशंका से ग्रस्त बना रहे। चूंकि इसके आसार नहीं दिख रहे कि पश्चिमी देश भारतीय हितों के लिए खतरा बन रहे खालिस्तानी चरमपंथियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करेंगे, इसलिए भारत को सतर्क रहना होगा।




-1790359141031_v.webp)
-1790358381726_v.webp)
-1790308245984_v.webp)





