शरजील इमाम और उमर खालिद पर 'सुप्रीम' फैसले को विहिप ने सराहा, रखी ये बड़ी मांग
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के यूएपीए मामले में शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उनके खिलाफ आपराधिक साजिश के ...और पढ़ें

शरजील इमाम और उमर खालिद। जागरण
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने सोमवार को कहा कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश में शामिल होने के पर्याप्त सबूत हैं। इन आरोपियों की जमानत की अपील पर भी अब सर्वोच्च ने एक वर्ष के लिए रोक लगा दी है।
विहिप ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सराहना करते हुए भारत विरोधी टुकड़े-टुकड़े गैंग की वकालत करने वाले अंतरराष्ट्रीय मित्रों से माफी की मांग की है। हाल ही में अमेरिका के सांसदों के एक समूह और न्यूयार्क के मेयर जोहरान ममदानी ने उमर खालिद के पक्ष में पोस्ट के साथ ही भारतीय राजनयिक को पत्र लिखा था, जिस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।
वहीं, सोमवार को जमानत मामले पर सुनवाई के दौरान पुलिस ने इसे राज्य को अस्थिर करने की सुनियोजित साजिश बताया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, भी यह कोई अचानक हुआ प्रदर्शन नहीं था, बल्कि देश को अस्थिर करने की सुनियोजित साजिश थी, जिसका उद्देश्य सरकार को अस्थिर करना और आर्थिक नुकसान पहुंचाना था।
विहिप ने कहा कि इस मामले में न्यायालय द्वारा यह कहा जाना कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ ऐसे सबूत मौजूद हैं, जिससे उनके साजिश में शामिल होने की पुष्टि होती है, के बाद तो अब इनके अंतरराष्ट्रीय जिहादी मित्रों को इनका साथ और समर्थन देने पर भारत और उसके सर्वोच्च न्यायालय से क्षमा याचना करनी ही चाहिए।
विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि उन्हें भारत विरोधी अपराधियों का साथ देने और हमारे देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने से बाज आना चाहिए।
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फरवरी 2020 में पूर्वी दिल्ली में हिंदुओं पर सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हुए प्राणघातक हमलों में 53 लोग मारे गए और 250 से अधिक घायल हो गए थे।

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