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    20 शेल कंपनियों से 180 करोड़ की जीएसटी का खेल, लंबी छानबीन के बाद साइबर पुलिस ने गिरोह को दबोचा; दो गिरफ्तार

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 07:31 PM (IST)

    नई दिल्ली साइबर पुलिस ने 20 शेल कंपनियों के माध्यम से साइबर अपराध की 180 करोड़ रुपये की रकम ठिकाने लगाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने सुशी ...और पढ़ें

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    प्रतीकात्मक तस्वीर।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। शेल कंपनियों के जरिये साइबर अपराध की रकम ठिकाने लगाने वाले गिरोह का नई दिल्ली जिले की साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान यूपी, ग्रेटर नोएडा के सुशील चावला और गुरुग्राम के राजेश कुमार के रूप में हुई है। आरोपितों ने साइबर अपराध के जरिए ठगे गए पैसे को निकालने के लिए 20 अलग-अलग कंपनियां खोली थीं।

    176 शिकायतें एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज 

    इस नेटवर्क से जुड़े अकाउंट के जरिए देशभर में करीब 180 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन सामने आया, जिससे संबंधित 176 शिकायतें एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और एक लैपटाप बरामद किया है। पुलिस ने जब्त मोबाइल फोन, लैपटाप और बैंक अकाउंट की जानकारी भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) को भेजी है, ताकि देशभर में दर्ज अन्य मामलों से इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें।

    लगातार संदिग्ध लेनदेन सामने आया

    उपायुक्त देवेश कुमार महला के मुताबिक, एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान नई दिल्ली जिले में आईडीएफसी बैंक के एक अकाउंट में लगातार संदिग्ध लेनदेन सामने आया। यह अकाउंट एम/एस कुद्रेमुख ट्रेडिंग (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज पाया गया, जो बाराखंभा रोड स्थित एक पते पर रजिस्टर्ड था। शुरुआती जांच में पता चला कि इस अकाउंट का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए म्यूल अकाउंट (आपराधिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अकाउंट) के रूप में किया जा रहा था।

     20 अलग-अलग शेल कंपनियां बनाईं

    इसी आधार पर साइबर थाना पुलिस ने बीते वर्ष 19 नवंबर को केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपितों ने 20 अलग-अलग शेल कंपनियां बनाकर उनके बैंक अकाउंट के जरिए ठगी की रकम को विभिन्न अकाउंट में ट्रांसफर किया। इन अकाउंट का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई साइबर ठगी की रकम को छिपाने और निकालने के लिए किया जा रहा था।

    आरोपितों के कहने पर यह 20 कंपनी खोलीं

    जांच में पता चला कि कंपनी के अकाउंट को सुशील चावला और राजेश कुमार इस्तेमाल कर रहे थे, जबकि कागजों में निदेशक के रूप में दर्ज राजेश खन्ना को महज मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया। बाद में यह भी सामने आया कि राजेश खन्ना की नोएडा में मौत हो चुकी है। पुलिस अधिकारी के अनुसार, राजेश खन्ना ने इन दोनों आरोपितों के कहने पर यह 20 कंपनी खोली थीं।

    इसके एवज में वह आरोपितों से हर महीने 40 हजार रुपये कमीशन ले रहा था। जांच के दौरान पता चला कि राजेश खन्ना अधिक्तर नोएडा के होटल में रुकता था और सात दिसंबर को उसकी मौत हो गई है। पूछताछ में पता चला कि राजेश की तबीयत खराब होने पर उसके बेटे ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया था।

    अब तक साइबर ठगी के 176 मामले आए सामने

    पुलिस के अनुसार, आगे की जांच में इन शेल कंपनियों और म्यूल अकाउंट्स से जुड़े कुल 176 साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। छानबीन में कुल राशि करीब 180 करोड़ रुपये आंकी गई। खातों में अलग-अलग स्तरों पर ठगी की रकम का लेनदेन किया जा रहा था।

    बंगाल में बैठे अन्य आरोपित के संपर्क में थे

    शुरुआत में पकड़े गए दोनों आरोपित जांच में शामिल हुए, लेकिन बाद में सवालों के जवाब देने से बचने लगे और नोटिस के बावजूद पेश नहीं हुए। इस बीच मोबाइल फोन से मिले संदिग्ध चैट्स और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में यह भी पता चला कि आरोपित बंगाल में सक्रिय एक अन्य साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति पवन रुइया के संपर्क में थे, जो इसी तरह के मामलों में शामिल बताया जा रहा है।

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