Delhi New CM : रेखा गुप्ता को ही क्यों मिली सीएम की कमान? ये पांच बड़े कारण रखते हैं मायने
रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह महिला नेतृत्व को बढ़ावा दे रही है। दो महिला सांसदों के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला ही होंगी। इसके साथ ही यह वैश्य समुदाय को खुश करने की भी कोशिश है। आठ फरवरी को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही मुख्यमंत्री के नाम का इंतजार किया जा रहा था।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। रेखा गुप्ता को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने कई राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है। दिल्ली समेत कई राज्यों में भाजपा की जीत में महिलाओं की अहम भूमिका रही है।
रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह महिला नेतृत्व को बढ़ावा दे रही है। दो महिला सांसदों के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला ही होंगी। इसके साथ ही यह वैश्य समुदाय को खुश करने की भी कोशिश है।
27 साल बाद भाजपा की सत्ता में वापसी
दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा की सत्ता में वापसी हुई है। आठ फरवरी को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही मुख्यमंत्री के नाम का इंतजार किया जा रहा था।
नई दिल्ली से पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हराने वाले पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा और रोहिणी से तीसरी बार विधायक चुने गए विजेंद्र गुप्ता इस पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे।
राष्ट्रीय नेतृत्व ने रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया
रेखा समेत कई अन्य नेताओं के नाम पर भी चर्चा हुई। लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व ने रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया। वह पहली बार शालीमार बाग से विधायक चुनी गई हैं।
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उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर महिला सशक्तीकरण का संदेश दिया गया है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा व अन्य राज्यों की तरह दिल्ली में भी भाजपा को सत्ता में लाने में महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई है।
महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया
यहां 40 विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया है और इनमें से 28 पर भाजपा को जीत मिली है। 15 विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं का मतदान पुरुषों के मुकाबले एक फीसदी कम रहा। इनमें से भी 12 पर भाजपा को जीत मिली।
अन्य 13 राज्यों में भाजपा की सरकार है, लेकिन इनमें से किसी में भी महिला मुख्यमंत्री नहीं है। विपक्ष अक्सर इस बात पर सवाल उठाता रहता है, लेकिन अब पार्टी ने उसे जवाब दे दिया है।
रेखा गुप्ता को सीएम बनाने के पीछे 5 कारण
- रेखा के चयन के पीछे उनका विवादों से दूर रहना और संगठन से लेकर नगर निगम तक में अहम जिम्मेदारियां निभाना शामिल है।
- कई अहम जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन पर न तो भ्रष्टाचार का कोई आरोप है और न ही वह किसी बयान या अन्य वजह से विवादों में रही हैं।
- वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की मजबूत विचारधारा से जुड़ी रही हैं। एबीवीपी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाली रेखा दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की सचिव और अध्यक्ष रहीं।
- वह दिल्ली प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा की सचिव, प्रदेश भाजपा की महासचिव और नगर निगम में तीन बार पार्षद रहीं।
- वह निगम की कई समितियों में भी रह चुकी हैं। इस तरह उनके पास सांगठनिक और प्रशासनिक दोनों तरह का अनुभव है।
दिल्ली में आगे बढ़ेगी महिला नेतृत्व की विरासत
दिल्ली में महिला नेताओं का इतिहास रहा है। बीजेपी ने पहली बार अक्टूबर 1998 में सुषमा स्वराज को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया था। वे दो महीने तक इस पद पर रहीं। उनके नेतृत्व में बीजेपी ने 1998 में दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा।
उनके बाद कांग्रेस की शिक्षा दीक्षित मुख्यमंत्री बनीं। वह 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। सितंबर 2024 में अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आप नेता आतिशी को मुख्यमंत्री बनाया गया।
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