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Delhi: 31 को रक्षाबंधन सदन की बैठक में महिला पार्षदों की उपस्थिति पर संशय, जताया रोष

महिला पार्षदों का कहना है कि रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट रिश्ते का पर्व हैं ऐसे में सदन की बैठक में वह कैसे शामिल हो पाएगी यह बड़ा सवाल है। हर माह सदन की एक बैठक होना अनिवार्य है। बीते माह भी निगम ने माह की आखिरी तारीख को सदन की बैठक बुलाई थी जबकि इस बार भी माह की आखिरी तारीख को सदन की बैठक बुलाई है।

By Nihal SinghEdited By: Abhishek TiwariMon, 28 Aug 2023 09:14 AM (IST)
31 को रक्षाबंधन सदन की बैठक में महिला पार्षदों की उपस्थिति पर संशय

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। रक्षाबंधन दो दिन का मुहुर्त होने के बाद 31 अगस्त को बुलाई गई निगम सदन की बैठक में महिला पार्षदों ने रोष जाहिर किया है। महिला पार्षदों का कहना है कि रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट रिश्ते का पर्व हैं ऐसे में सदन की बैठक में वह कैसे शामिल हो पाएगी यह बड़ा सवाल है।

क्योंकि उस दिन न केवल रक्षा बंधन पर भाई के घर जाना होगा बल्कि रिश्तेदारों का भी आना जाना होगा। ऐसे में पार्षदों ने सदन की बैठक 29 अगस्त को सदन की बैठक बुलाने की मांग की है।

तारीख तय करने से पहले करना चाहिए था इस पर विचार- उर्मिला नरेन्द्र चावला

जनकपुरी से भाजपा पार्षद उर्मिला नरेन्द्र चावला का कहना है कि रक्षाबंधन का त्यौहार है। ऐसे में भाई के पास भी महिलाओं को जाना होता है। महापौर स्वयं एक महिला है उन्हें सदन की तारीख तय करने से पहले इसके बारे में भी विचार करना चाहिए था।

लोगों के घर दूर-दूर से रिश्तेदार आते हैं। इसके लिए जरुरी है कि इस दिन का अवकाश निगम घोषित करता उसके उलट महापौर ने सदन की बैठक ही बुला ली। जबकि महापौर को पता है कि दिल्ली नगर निगम में 50 प्रतिशत से ज्यादा सदस्यों का प्रतिनिधित्व महिला पार्षदों का है।

भाजपा पार्षद सत्या शर्मा ने कहा कि माह की आखिरी तारीख को रखना सही नहीं है। ऐसा नहीं होना चाहिए था। माह के मध्य में रखना चाहिए था। पहले ऐसे ही रखा जाता था। अब रक्षा बंधन वाले दिन सदन की बैठक बुलाने का मुख्य उद्देश्य चोरी छिपे एजेंडा पास करना है।

कब है रक्षाबंधन का मुहुर्त?

वहीं निगम के नेता प्रतिपक्ष राजा इकबाल सिंह ने महापौर डॉ. शैली ओबेराय से मांग की है कि रक्षाबंधन का मुहुर्त 30 अगस्त की रात्रि को है और 31 अगस्त तक मनाया जाएगा। इसलिए दोनों दिनों को छोड़कर दूसरे दिन निगम सदन की बैठक बुलाएं

उल्लेखनीय है कि हर माह सदन की एक बैठक होना अनिवार्य है। बीते माह भी निगम ने माह की आखिरी तारीख को सदन की बैठक बुलाई थी जबकि इस बार भी माह की आखिरी तारीख को सदन की बैठक बुलाई है। नियमानुसार 250 सदस्यों में से 50 सदस्यों का होने से कोरम पूरा होता है।

ऐसे में बैठक तो हो जाएगी लेकिन कोरम भी पूरा नही हुआ तो समस्या हो सकती है। क्योंकि हर माह एक बैठक न होने पर निगम को भंग करने का प्रविधान है। वैसे तो निगम एक्ट में स्पष्ट नहीं है कि बैठक कोरम पूरा न होने की वजह से नहीं हो पाती है तो उस स्थिति में क्या होगा। इस पर उपराज्यपाल प्रशासक के तौर पर अंतिम निर्णय लेंगे।