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    तेज रफ्तार से गाड़ी चलाई तो खैर नहीं, लेजर स्पीड गन से होगी निगरानी; जानिए दिल्ली पुलिस का खास प्लान

    राजधानी दिल्ली में अब तेज रफ्तार से वाहन चलाना महंगा पड़ सकता है। पुलिस के अनुसार अब दिल्ली में तेज रफ्तार वाहनों पर लेजर स्पीड गन से नजर रखी जाएगी। पुलिस का कहना है कि सर्दी में कोहरे के चलते सड़कों पर हादसे बढ़ जाते हैं। तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने की वजह से भी ज्यादा हादसे होते हैं इसीलिए यह प्लान तैयार किया गया है।

    By mohammed saqib Edited By: Kapil Kumar Updated: Wed, 25 Dec 2024 05:49 PM (IST)
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    दिल्ली में तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ तुरंत एक्शन होगा। फाइल फोटो

    मोहम्मद साकिब,नई दिल्ली। ठंड के मौसम में घने कोहरे के बीच गाड़ी चलाना एक बड़ी चुनौती होती है, उसमें भी सुबह या रात के समय गाड़ी चलानी हो तो मुसीबत और भी बढ़ जाती है। दिसंबर व जनवरी के महीने में सड़कों पर खासतौर पर रिंग रोड पर कुछ मीटर दूरी तक भी नहीं दिखाई देती है। इसमें भी वाहन चालक तेज गति से गाड़ी चलाते हैं, जिससे आए दिन हादसे की खबरें सामने आती हैं।

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    पुलिस ने जारी कर दिया सर्कुलर 

    वहीं, इसको ध्यान में रखते हुए यातायात पुलिस ने रफ्तार के चालकों पर हाई लेवल की नजर रखने के लिए लेजर स्पीड गन से लगाने की तैयारी कर ली है। लेजर स्पीड गन तेज स्पीड की रडार को कैच करने में सक्षम होती है। जिसको लेकर एक सर्कुलर भी जारी कर दिया गया है।

    ट्रैफिक उपायुक्त, टीआई को दिए गए निर्देश 

    सर्कुलर में सभी ट्रैफिक उपायुक्त, टीआई को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने तौर पर उन स्पॉट की जानकारी लें, जहां पर रोड हादसे और वाहनों की रफ्तार काफी ज्यादा होती है। इसके अलावा सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली में अब वाहनों की रफ्तार 50 करने पर भी विचार किया जा रहा है।

    तीन दर्जन से ज्यादा ऐसे स्पॉट

    यातायात पुलिस अधिकारी के मुताबिक, दिल्ली में तीन दर्जन से ज्यादा ऐसे स्पॉट हैं, जहां पर बेलगाम वाहन चलते हैं। इसी वजह से वहां पर सड़क हादसे होते हैं और लोगों की जानें तक चली जाती हैं। इसमें उत्तरी जिले के रिंग रोड, आउटर रिंग रोड और नरेला, अलीपुर जैसे दिल्ली की बाहरी बेल्ट के भी इलाके हैं।

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    वहीं, इनको देखते हुए दिल्ली पुलिस एक सर्कुलर जारी कर रही है, जिसमें दिल्ली में अब वाहनों की रफ्तार 50 किया जा सकता है। इस पर ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 50 की रफ्तार ऐसी होती है, जिसको अगर आगे कोई हादसा हाेने वाली चीज हो तो चालक खुद काबू कर सकता है।

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    उधर, दूसरी तरफ कुछ लोगों का कहना है कि 50 की रफ्तार से रिंग रोड पर रफ्तार का कहर तो कम होगा, लेकिन वर्किंग डे में बाहरी फ्लाईओवर पर स्लो स्पीड से दिक्कतें भी आ सकती हैं।

    लेजर स्पीड गन के इस्तेमाल से रफ्तार पर लगेगी लगाम

    लेजर स्पीड गन का इस्तेमाल होने से सड़क हादसों और तेज रफ्तार के कहर को कम करने में कामयाबी मिलेगी। इसको लेकर यातायात पुलिस ने अपने तौर पर पहल शुरू भी कर दी है, जबकि ट्रांसपोर्ट विभाग को सर्कुलर जल्द ही भेजा जाएगा।

    ऐसे काम करती है लेजर स्पीड गन

    अत्याधुनिक लेजर स्पीड गन तय सीमा से अधिक वाहनों की गति को दिन हो या रात में एक किलोमीटर दूर से ही पकड़ लेती है। इस गन में यह सुबूत भी होगा कि वह मानक से कितना अधिक तेज गाड़ी चला रहे थे। लेजर का उपयोग टेलगेटिंग प्रवर्तन, फोटो और वीडियो आधारित गति प्रवर्तन, विचलित ड्राइविंग, दुर्घटना स्थल मानचित्रण, सांख्यिकीय डेटा संग्रह और आपदाओं के लिए सामान्य माप के लिए किया जाता है। यह गन किसी भी मौसम में पूरी तरह से अपने टारगेट को चिन्हित कर लेती है।

    हमारी कोशिश रहती है कि किसी तरह से वाहनों से होने वाले हादसे कम से कम हों। इसको लेकर समय-समय पर योजनाओं को पुख्ता किया जाता है। ठंड के मौसम में कोहरे के चलते हादसों को खतरा बढ़ जाता है, इसलिए लेजर स्पीड गन से तेज गति से वाहन चलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। - अजय चौधरी, स्पेशल सीपी, यातायात पुलिस