नई दिल्‍ली, जेएनएन। Farmers Protest 100 Days आंदोलनहठ। किसानों के नाम पर शुरू हुए इस हठ ने हरियाणा की इंडस्ट्री को बर्बादी की राह पर खड़ा कर दिया है। सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला टेक्सटाइल सेक्टर आंसू बहा रहा है। देश में डर के माहौल के कारण व्यापारी पानीपत नहीं आए। ट्रांसपोर्टरों ने सप्लाई नहीं की। कंबल की फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। बहादुरगढ़ की फुटवियर इंडस्ट्री पर ताला लग रहा है। सोनीपत से हजारों कामगार पलायन कर गए हैं।

इंडस्ट्री ही क्यों, जिन किसानों के नाम पर आंदोलन हो रहा है, उन किसानों का भी तो भला नहीं हो रहा। उन्हें अपनी सब्जी की फसल खेत में ही तबाह करनी पड़ रही है। क्योंकि इसे बेच नहीं पा रहे। कहानियां हजारों हैं...प्रभावित हजारों हैं, पर आंदोलनकारियों पर कोई असर नहीं पड़ रहा। कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर सौ दिन से चल रहे आंदोलन के कारण हालात क्या से क्या हो गए, इसी पर एक रिपोर्ट।

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दर्द यूं भी समझें

  • 80 ट्रक रोजाना निकलते थे किसान आंदोलन से पहले यमुनानगर से
  • 30 ट्रक ही अब दिल्ली पहुंच पा रहे हैं किसान आंदोलन के बाद से

रोजी-रोटी पर संकट

सोनीपत के मधेपुरा के कृष्णदेव कहते हैं, वह कुंडली के बर्तन बनाने की फैक्ट्री में काम करते थे। आंदोलन के कारण रास्ता बंद है और फैक्ट्री तक आने-जाने की भी परेशानी है।

  • पानीपत की कंबल इंडस्ट्री दम तोड़ने लगी: चीन के पोलर कंबल को मात देकर पानीपत ने आयात पूरी तरह से खत्म कर दिया था। पर इस किसान आंदोलन ने उन्हीं उधमियों की कमर तोड़ दी है। जो फैक्ट्रियां मार्च तक पूरे उत्पादन के साथ चलती थी, वो फरवरी आते-आते बंद होने लगीं। अब उत्पादन पूरी तरह से बंद है
  • पोलर कंबल एसोसिएशन के प्रधान जगदीप जैन बताते हैं कि बाहर का व्यापारी डरा हुआ था। वो पानीपत तक आया ही नहीं। एसोसिएशन से जुड़े भीम राणा ने बताया कि इसी साल यूनिट शुरू की थी। उम्मीद थी कि फायदा होगा, लेकिन आंदोलन ने सब चौपट कर दिया

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कुरुक्षेत्र भी सूना हो गया पर्यटक नहीं पहुंच रहे: कुरुक्षेत्र धर्मनगरी कुरुक्षेत्र जीटी बेल्ट पर टूरिज्म का बड़ा स्पाट है। पर किसान आंदोलन ने इसको भी प्रभावित किया है। श्रीकृष्णा म्यूजियम और विज्ञान एवं पैनोरमा केंद्र में भी सन्नाटा सा छा गया है। श्रीकृष्णा संग्रहालय के अधिकारियों के अनुसार, सामान्य दिनों में प्रतिदिन एक हजार पर्यटक आते थे। अब 500 से 600 पर्यटक ही आते हैं। ब्रह्मसरोवर पर दो से तीन हजार पर्यटक पहुंच पाते हैं। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सीईओ अनुभव मेहता ने बताया कि दिल्ली से रास्ता बंद होने की वजह से भी यहां लोग नहीं आ रहे।

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इधर, बड़ा सवाल...क्या किसान ही किसान के दुश्मन...बर्बाद हो गई गोभी की फसल: बार्डर के साथ लगते दिल्ली के गांव झाड़ौदा में सब्जी उत्पादकों को लाखों का नुकसान हुआ है। यहां पर करीब ढाई हजार एकड़ में गोभी की फसल होती है। बार्डर बंद होने से खेतों के रास्ते से वाहनों का आवागमन होने के कारण सब्जी की फसल पर धूल जम गई। किसान ओमप्रकाश डागर, बल्लू पंडित, प्रताप पंडित, अरविंद डागर, प्रकाश डागर, देवेंद्र डागर, काला साहब ने बताया कि आंदोलन की वजह से बार्डर बंद हुए। गोभी 10 से 12 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकती थी, अब 50 पैसे प्रति किलो में भी उसके ग्राहक नहीं रहे। उनकी मंडी बहादुरगढ़ लगती है।

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इन मामलों से समझिए, किस तरह बहादुरगढ़ की इंडस्ट्री ठप हो रही: बहादुरगढ़ में किराये पर चल रही 20 से ज्यादा मोल्डिंग, तेल निकालने वाली, फूड प्रोडक्ट, कपड़े पर कढ़ाही करने वाली समेत प्लास्टिक मोल्डिंग का काम करने वाली फैक्ट्रियां बंद हो गईं। इनमें 200 से ज्यादा काम करने वाले वर्करों का भी काम छूट गया।

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गणपति धाम में फैक्ट्री चला रहे नवीन मल्होत्रा ने बताया कि एक फैक्ट्री किराये पर दे रखी थी। फूड प्रोडक्ट की पैकिंग का काम था। आंदोलन की वजह से फैक्ट्री बंद हो गई। अब उनका भवन खाली है। इस कारण 45 हजार रुपये प्रति माह का नुकसान हो गया।

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