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    Delhi Police Bharti: दिल्ली पुलिस में अब इन लोगों की नहीं होगी भर्ती, HC ने सुनाया अहम फैसला

    Updated: Fri, 29 Nov 2024 08:09 PM (IST)

    Delhi Police Bharti दिल्ली पुलिस में भर्ती होने का हजारों उम्मीदवार सपना देखते हुए तैयारी करते हैं लेकिन अब दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले से कुछ लोगों को झटका लग सकता है। न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला बड़ा सुनाया है। इस लेख के माध्यम से पढ़िए वो कौन से लोग हैं जो अब आवेदन नहीं कर सकते।

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    Delhi News: दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला। फाइल फोटो

    एएनआई, नई दिल्ली।Delhi Police Bharti: दिल्ली उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने हाल ही में कहा है कि कलर विजन से पीड़ित आवेदकों को दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

    न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के इस निष्कर्ष से कोई इनकार नहीं किया जा सकता कि दोषपूर्ण रंग दृष्टि एक दोष है।

     कॉन्स्टेबल के रूप में नियुक्ति के लिए बनाता है अयोग्य-हाईकोर्ट

    ऐसे में याचिकाकर्ता स्पष्ट रूप से एक दोष से पीड़ित हैं। जो उन्हें दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल के रूप में नियुक्ति (Delhi Police Constable bharti) के लिए अयोग्य बनाता है। इस मामले में दिल्ली की उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने आगे कहा कि दिल्ली पुलिस सहित सुरक्षा बलों में उम्मीदवारों की मेडिकल फिटनेस के मानक नागरिक पदों के लिए आवेदन करने वालों की तुलना में अधिक सख्त और ऊंचे होने चाहिए।

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    याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। जिसके द्वारा उसने दिल्ली पुलिस में नियुक्ति की मांग करने वाले एक आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया था।

    याचिकाकर्ताओं के वकील के ने कोर्ट में दी ये दलील

    याचिकाकर्ताओं के वकील के माध्यम से दलील दी गई कि कलर विजन (दोषपूर्ण रंग दृष्टि) 'रंग अंधापन' नहीं है। इसलिए उन्हें दिल्ली पुलिस (Delhi Police) में कांस्टेबल के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए।

    दिल्ली पुलिस ने केंद्र सरकार के स्थायी वकील आशीष दीक्षित एडवोकेट के माध्यम से रिट याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि कलर विजन (रंग दृष्टि) एक दोष है और इसलिए विज्ञापन के संदर्भ में उम्मीदवारों को दोषों से मुक्त होना चाहिए।

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    इस पर गौर करते हुए उच्च न्यायालय की पीठ ने आगे कहा कि

    "हमें ट्रिब्यूनल के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिला। जिसके मुताबिक यह रिट याचिकाएं तुरंत खारिज कर दी जाती हैं।"

    वहीं पर गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने धोखाधड़ी और गलत तरीके से ओबीसी और दिव्यांगता कोटा लाभ हासिल करने के केस में आरोपित पूर्व आईएएस प्रशिक्षु पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। बता दें यूपीएससी और दिल्ली पुलिस ने खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया है।

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