खौफनाक राज: बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी दस्तावेजों से कॉल गर्ल रैकेट तक, सरगना की सच्चाई जान उड़े अफसरों के होश
दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पहचान पत्र मुहैया कराता था। इस गिरोह का सरगना बांग्लादेश का रहने वाला है और वह पहले संगम विहार में मारे गए बांग्लादेशी नागरिक सेंटू शेख उर्फ राजा के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों के नाम के फर्जी आधार कार्ड बनवा अपने वाट्सएप पर मंगवा लेता था।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेज के सहारे भारतीय पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड) मुहैया कराने वाले गिरोह के तार बांग्लादेश से जुड़े होने का दिल्ली पुलिस काे पता चला है।
बांग्लादेश का रहने वाला एक शख्स (सरगना) पहले संगम विहार में 20 अक्टूबर को मारे गए बांग्लादेशी नागरिक सेंटू शेख उर्फ राजा के जरिये बांग्लादेशी नागरिकों के नाम के फर्जी आधार कार्ड बनवा अपने वाट्सएप पर मंगवा लेता था और फिर उनके ट्रेनों के टिकट करवा उन्हें दिल्ली भेज देता था।
कॉल गर्ल रैकेट का भी चलाने लगा था धंधा
वहीं, दिल्ली पहुंचने के बाद सेंटू आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह से संपर्क कर उनके फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवा, उसके आधार पर असली आधार कार्ड बनवा देता था। बांग्लादेशियों का आधार कार्ड बनवाने के क्रम में सेंटू कुछ सालों से बांग्लादेशी लड़कियों को बुलाकर कॉल गर्ल रैकेट का भी धंधा चलाने लगा था।
वह बांग्लादेश से विशेष तौर पर वेश्यावृत्ति के लिए ही लड़कियों को दिल्ली बुलाता था और उनके आधार कार्ड बनवाने के बाद एनसीआर के शहरों समेत गुजरात, उदयपुर, जयपुर, झांसी, ग्वालियर, मध्य प्रदेश आदि कई राज्यों में उन्हें भेजकर कॉल गर्ल रैकेट चलाता था।
संगम विहार में किराए पर ले रखे थे 8 फ्लैट
पुलिस की जांच में पता चला कि लड़कियों को रखने के लिए उसने संगम विहार में आठ फ्लैट किराए पर ले रखे थे। यहीं से वह पड़ोसी राज्यों में लड़कियों को भेजता था। दिल्ली पुलिस काे उस पर शक न हो इसलिए वह दिल्ली में कालगर्ल रैकेट का धंधा नहीं करता था।
इंस्पेक्टर उमेश यादव के नेतृत्व में जांच में जुटी टीम
डीसीपी अंकित चौहान का कहना है कि उपराज्यपाल वीके सक्सेना के निर्देश पर बांग्लादेशियों की पहचान के लिए चलाए जा रहे अभियान तक अप्रवासन रैकेट का पता चला है। इंस्पेक्टर उमेश यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम अभी जांच में जुटी हुई है।
पुलिस के मुताबिक, 2020 में दिल्ली आने के बाद सेंटू ने बंगाल की रहने वाली एक युवती से शादी की थी। पुलिस की एक टीम बंगाल भी भेजी गई है ताकि यह लगाया जा सके कि उसकी पत्नी बंगाल की रहने वाली है या नहीं। अगर वह बांग्लादेश की पाई जाएगी तब उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस के मुताबिक, जांच से पता चला है कि सेंटू करीब पांच साल पहले एक बांग्लादेशी शख्स के संपर्क में आया था जो पिछले 40 सालों से बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध तरीके से भारत में घुसपैठ कराने का धंधा कर रहा है। उसके गिरोह से बड़ी संख्या में बांग्लादेशी व भारतीय जुड़े हैं।
पुलिस का मानना है कि वह लाखों बांग्लादेशियाें को भारत में घुसपैठ करा चुका है। दिल्ली में उसके कई गुर्गे हैं जो उनके निर्देश पर काम करते हैं। उन्हीं में से एक सेंटू शेख भी था। जिन बांग्लादेशी नागरिकों को उसे दिल्ली भेजना होता था उनके नाम व फोटो वह पहले सेंटू के मोबाइल पर भेजता था। सेंटू, आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह के जरिये तत्काल फर्जी आधार कार्ड बनवाकर उसे वाट्सएप पर भेज देता था।
सरगना की लोकेशन मेघालय व बांग्लादेश की सीमा दुर्गापुर पर मिली
उसके बाद सरगना उनके ट्रेन के टिकट करवा दिल्ली भेज देता था। ट्रेनों में टीटीई द्वारा पहचान पत्र दिखाने की मांग करने पर बांग्लादेशी पकड़े न जाए इसलिए उनके अस्थायी आधार कार्ड बनवाकर मंगवा लिया जाता था। पुलिस का कहना है कि सरगना की लोकेशन मेघालय व बांग्लादेश की सीमा दुर्गापुर पर मिली है। उसे पकड़ने के लिए एक टीम को बांग्लादेश सीमा पर भेजी गई है।
जांच से पता चला है कि बांग्लादेशियों को भारत में घुसपैठ कराने वाला सरगना खेत, नदी, नाले व पहाड़ आदि के रास्ते पहले पहले उन्हें बंगाल की सीमा से सटे रेलवे स्टेशन न्यू पोंगोई गांव पर लाता था फिर वहां से उन्हें ट्रेन से न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे जंक्शन ले आता था। वहां पर दिल्ली के ब्रह्मपुत्र मेल आदि ट्रेनों के टिकट करवा कर उन्हें दिल्ली भेज देता था।
10 हजार रुपये लेकर बनवा देता था आधार कार्ड
उसके बाद सेंटू उनसे आठ से दस हजार रुपये लेकर आधार कार्ड बनवा देता था। आधार कार्ड बन जाने पर बांग्लादेशियों के पैन व वाेटर कार्ड कहीं भी आसानी से बन जाते थे। सेंटू के जरिये सरगना पिछले पांच सालों में कितने बांग्लादेशी नागरिकों के आधार कार्ड बनवा चुका है इसके बारे में पता लगाया जा रहा है।
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वहीं, आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह के सदस्यों से पूछताछ में एक अन्य वेबसाइट के बारे में भी पता चला है। जिसके बारे में पता लगाया जा रहा है। उक्त वेबसाइट के जरिये आरोपित, फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाते थे। अप्रवासन रैकेट मामले में पुलिस ने मंगलवार को 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया था, जिनमें सात भारतीय व पांच बांग्लादेशी शामिल हैं। भारतीय ही 10 हजार रुपये लेकर बांग्लादेशियों के आधार कार्ड बना रहे थे।
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