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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 12, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

1984 Sikh Riots: पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार दोषी करार, 40 साल बाद पीड़ितों को मिला न्याय

Published: Wed, 12 Feb 2025 02:19 PM (IST)Updated: Wed, 12 Feb 2025 03:39 PM (IST)

1984 के सिख दंगों में दो लोगों की हत्या के मामले में दिल्ली की अदालत ने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन ...और पढ़ें

दिल्ली की कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी ठहराया है। फाइल फोटो
दिल्ली की कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी ठहराया है। फाइल फोटो

HighLights

  1. कोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व सांसद को दोषी ठहराया।
  2. हत्या मामले से जुड़ा है सज्जन कुमार का नाम।
  3. 40 साल बाद पीड़ितों को मिला है इंसाफ।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान पिता-पुत्र की हत्या के मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को अदालत ने 41 साल बाद दोषी करार दिया।

विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने बुधवार को कहा कि साक्ष्य व पीड़ितों के बयान से साबित हुआ है कि लाठी और सरिया जैसे हथियारों से लैस भीड़ को सज्जन कुमार भड़का रहे थे। उकसावे के बाद भीड़ ने न सिर्फ दंगा फैलाया बल्कि हत्याओं को भी अंजाम दिया। ऐसे में गैरकानूनी तरीके से एकत्र भीड़ का सदस्य होने के नाते शिकायतकर्ता के पति जसवंत सिंह और बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या के लिए सज्जन कुमार को दोषी करार दिया जाता है।

सज्जन कुमार के विरुद्ध मामला साबित किया 

राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने कहा कि साक्ष्यों से साबित होता है कि लाठी-डंडा और सरिया थामे भीड़ ने सरस्वती विहार में पीड़िता के पति व बेटे की हत्या के बाद घर में लूटपाट की और आग के हवाले कर दिया। अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे सज्जन कुमार के विरुद्ध मामला साबित किया है।

सज्जन कुमार को सुनाई जाने वाली सजा की अवधि पर 18 फरवरी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं जाएंगी। सजा सुनाए जाने के लिए सज्जन कुमार को तिहाड़ जेल से अदालत के समक्ष पेश किया गया था। सज्जन को इस मामले में अधिकतम फांसी और कम से कम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

लोहे की रॉड, लाठियों, ईंटों से लैस थी भीड़

बता दें कि पहले यह मामला पंजाबी बाग में दर्ज हुआ था, बाद में इसे एसआइटी ने अपने हाथ में ले लिया था। वहीं, एक अन्य मामले में सज्जन कुमार हाई कोर्ट द्वारा सुनाई उम्रकैद की सजा काट रहा है। अदालत ने कहा कि जिस शिकायतकर्ता ने अपने पति और बेटे की नृशंस हत्या देखी, उससे उस व्यक्ति का चेहरा भूलने की उम्मीद नहीं की जा सकती है, जो उन हत्याओं और लूटपाट को अंजाम देने के लिए भीड़ को उकसा रहा था। गैरकानूनी तरीके से एकत्रित हुई भीड़ लोहे की रॉड, लाठियों, ईंटों से लैस थी। इससे साबित होता है कि उस अपराध को तैयारी करने के बाद अंजाम दिया गया था।

अदालत ने सज्जन कुमार की उस दलील को ठुकरा दिया, जिसमें उसने तर्क दिया था कि शिकायतकर्ता के बयान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। सज्जन कुमार ने तर्क दिया था कि शिकायतकर्ता ने न सिर्फ देरी से उसका नाम लिया था, बल्कि घटना के समय उसे आरोपित की पहचान के बारे में पता नहीं था।

अदालत ने कहा कि घटना के डेढ़-दो महीने बाद एक पत्रिका में आरोपित की तस्वीर देखकर सज्जन कुमार को पहचाना था। शिकायतकर्ता का बयान और घटना के बारे में उसका विवरण विश्वसनीय है।

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रंगनाथ आयोग के गठन के बाद शिकायतकर्ता जुटा सकी साहस

अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि उसमें इतना आत्मविश्वास नहीं था कि वह किसी को भी भीड़ को उकसाने वाला बता सके, लेकिन आरोपित का चेहरा उसके दिमाग में घूमता रहा था। शिकायतकर्ता के बयान से स्पष्ट है कि जांच में शामिल होने के बावजूद उसके पास पुलिस पर विश्वास करने का न तो अवसर था और न ही भरोसा था। न्यायाधीश रंगनाथ मिश्रा जांच आयोग के गठन के बाद अखबारों में नोटिस प्रकाशित होने पर शिकायतकर्ता साहस जुटा सकी। इसलिए शिकायतकर्ता के बयान को अदालत विश्वसनीय मानती है।

पीड़िता की मदद करने में झिझक रहे थे स्थानीय निवासी

अभियोजन पक्ष का पूरा मामला सिर्फ शिकायतकर्ता व उसके परिवार के सदस्यों पर आधारित होने के सज्जन कुमार के तर्क को भी अदालत ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि इलाके में रहने वाले लोग घर को आग लगाने से लेकर पीड़ितों के स्वजनों की बेरहमी से पिटाई व हत्या करने की घटना के समय पीड़ितों की सहायता के लिए भी आगे नहीं आए। स्थानीय निवासी इन पीड़ितों को बचाने और सहायता करने में झिझक रहे थे। यह तथ्य यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त है कि वे अदालत के समक्ष आगे नहीं आए होंगे।

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