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फिर विवादों में JNU: छात्रों ने पुलिस पर फेंके पत्थर-जूते, हिंसक झड़प में 25 से अधिक पुलिसकर्मी घायल

Published: Fri, 27 Feb 2026 05:42 AM (IST)Updated: Fri, 27 Feb 2026 07:11 AM (IST)

जेएनयू छात्रसंघ के शिक्षा मंत्रालय तक 'लॉन्ग मार्च' के दौरान परिसर के बाहर पुलिस और छात्रों में झड़प हुई। कुलगुरु ...और पढ़ें

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाहर पुलिस द्वारा गेट पर लगाए गए ताले की जंजीर को आरी के ब्लेड से काटते वामपंथी छात्र संगठन के सदस्य। विपिन शर्मा

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाहर पुलिस द्वारा गेट पर लगाए गए ताले की जंजीर को आरी के ब्लेड से काटते वामपंथी छात्र संगठन के सदस्य। विपिन शर्मा 

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में जेएनयू छात्रसंघ की ओर से कुलगुरु के खिलाफ गुरुवार को जेएनयू परिसर से शिक्षा मंत्रालय तक ‘लाॅन्ग मार्च’ निकालने की घोषणा के बाद परिसर के बाहर तनाव की स्थिति बन गई।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से ऐसे बाहरी प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने की जानकारी छात्रों को दी गई और उन्हें मार्च विश्वविद्यालय परिसर तक ही सीमित रखने को कहा। बावजूद इसके छात्र परिसर से बाहर जाने का प्रयास करने लगे।

पुलिस ने गेट के पास उन्हें रोका, जिसके बाद छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। छात्रों ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया है। पुलिस पर पत्थर, बैनर, डंडे और जूते फेंके गए। जिसमें कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी सामने आई है। एसएचओ किशनगढ़ समेत कई पुलिसकर्मियों को उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है।

बैरिकेड हटाकर बाहर जाने की कोशिश

वहीं, छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार ने समर्थकों के साथ बैरिकेड हटाकर बाहर जाने की कोशिश की। जैसे ही छात्र मुख्य द्वार पार करने लगे, पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया। अब तक करीब 50 छात्र हिरासत में लिए गए हैं।

दक्षिणी पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि अनुमति नहीं होने के बावजूद दोपहर 3:20 बजे लगभग 500 छात्र मुख्य द्वार से बाहर निकलकर मार्च करने लगे।

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पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाया गया। इस दौरान प्रदर्शन उग्र हो गया और कुछ छात्रों ने सुरक्षा बल पर बैनर, डंडे और जूते फेंके। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की और दांत से काटा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और जांच की जा रही है।

कुलगुरु के बयान के विरोध में था मार्च

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने आरोप लगाया कि वे लोग शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, पर बिना वर्दी में मौजूद लोगों ने उन्हें घसीटकर हिरासत में लिया। छात्र नेताओं का दावा है कि सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने पूरे परिसर को घेर रखा था और बाहर नहीं निकलने दिया।

इस दौरान एक छात्र के हाथ में चोट लगी और हिरासत के दौरान एक छात्रा पुलिस बस में बेहोश भी हो गई। छात्रों का यह प्रदर्शन विश्वविद्यालय की कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित के जातिसूचक बयान के विरोध में और शिक्षा मंत्रालय तक अपनी मांगें पहुंचाने को लेकर था।

उचित नहीं है यूजीसी लागू करने की मांग: जेएनयू

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि छात्रसंघ द्वारा यूजीसी नियम लागू करने की मांग वर्तमान परिस्थितियों में उचित नहीं है, क्योंकि इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्थगन आदेश दे चुका है।

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कुलपति या रजिस्ट्रार के पास इन्हें लागू करने का अधिकार नहीं है। प्रशासन के अनुसार छात्रों के निष्कासन का मूल कारण परिसर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा की घटनाएं हैं, जिनकी जांच प्राक्टोरियल प्रक्रिया से की गई। यह अत्यंत निंदनीय है कि हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़ के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए एक महिला ओबीसी कुलगुरु पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।

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