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JNU छात्रसंघ अध्यक्ष समेत 14 गिरफ्तार, UGC को लेकर लॉन्ग मार्च में दिल्ली पुलिस के साथ हुई थी हिंसक झड़प

Published: Fri, 27 Feb 2026 10:48 AM (IST)

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 'लाॅन्ग मार्च' के दौरान पुलिस से झड़प के बाद छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा समेत 14 छात्रों ...और पढ़ें

लॉन्ग मार्च के दौरान बृहस्पतिवार को दिल्ली पुलिस के साथ हुई थी छात्रों की झड़प। फोटो: आर्काइव

लॉन्ग मार्च के दौरान बृहस्पतिवार को दिल्ली पुलिस के साथ हुई थी छात्रों की झड़प। फोटो: आर्काइव

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जागरण  संवाददाता, नई दिल्ली। Jawaharlal Nehru University (JNU) में ‘लाॅन्ग मार्च’ के दौरान पुलिस से झड़प के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार समेत 14 छात्रों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले करीब 50 छात्रों को हिरासत में लिया गया था।

ऐसे बढ़ा था विवाद, फिर हुई गिरफ्तारी

जेएनयू छात्रसंघ ने कुलगुरु के खिलाफ गुरुवार को विश्वविद्यालय परिसर से शिक्षा मंत्रालय तक ‘लाॅग मार्च’ निकालने की घोषणा की थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि परिसर से बाहर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है और मार्च कैंपस तक सीमित रखने को कहा गया था।

दोपहर करीब 3:20 बजे लगभग 500 छात्र मुख्य द्वार की ओर बढ़े और बाहर निकलने का प्रयास किया। पुलिस ने गेट पर बैरिकेड लगाकर उन्हें रोका। आरोप है कि इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

पुलिसकर्मियों पर फेंके थे बैनर, डंडे और जूते

पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाया गया और कुछ पुलिसकर्मियों पर बैनर, डंडे व जूते फेंके गए। धक्का-मुक्की में एसएचओ किशनगढ़ समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जिन्हें उपचार के लिए Safdarjung Hospital ले जाया गया।

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने छात्र नेताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। बाद में मामले की जांच के आधार पर छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा सहित 14 छात्रों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

छात्रों के आरोप और प्रशासन का पक्ष

छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, लेकिन बिना वर्दी में मौजूद लोगों ने उन्हें जबरन हिरासत में लिया। छात्रों का दावा है कि पुलिस ने पूरे परिसर को घेर लिया था और बाहर नहीं जाने दिया। प्रदर्शन विश्वविद्यालय की कुलगुरु Shantishree Dhulipudi Pandit के कथित बयान के विरोध में किया जा रहा था।

वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यूजीसी नियम लागू करने की मांग वर्तमान परिस्थितियों में उचित नहीं है, क्योंकि इस पर सुप्रीम कोर्ट स्थगन आदेश दे चुका है। प्रशासन के अनुसार, कार्रवाई का आधार परिसर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और हिंसा की घटनाएं हैं, जिनकी जांच प्राक्टोरियल प्रक्रिया से की गई है।

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