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    द्वारका फ्लाईओवर के नीचे धूल का टार्चर, सड़क की अधूरी मरम्मत ने इलाके में बढ़ाया प्रदूषण

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 09:05 PM (IST)

    द्वारका फ्लाईओवर के नीचे पालम-दशरथपुरी मार्ग पर बिजली विभाग द्वारा केबल डालने के बाद सड़क की अधूरी मरम्मत से भारी धूल उड़ रही है। लगभग एक माह पहले हुई ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। देश की राजधानी में जहां एक ओर प्रदूषण नियंत्रण के दावे किए जा रहे हैं, वहीं पालम-दशरथपुरी मार्ग (द्वारका फ्लाईओवर के नीचे) सरकारी विभागों की घोर लापरवाही का केंद्र बना हुआ है। लोगों के अनुसार, लगभग एक माह पहले बिजली विभाग द्वारा केबल डालने के लिए सड़क की खुदाई की गई थी।

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    काम पूरा होने के बाद नियमत

    सड़क की डामर से मरम्मत होनी थी, लेकिन विभाग ने इसे केवल गिट्टी और डस्ट डालकर छोड़ दिया। अब यही गिट्टी और धूल स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। महत्वपूर्ण मार्ग और उड़ती धूल का सायाद्वारका फ्लाईओवर के नीचे स्थित यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पालम, दशरथपुरी और द्वारका को आपस में जोड़ता है। यहां से प्रतिदिन हजारों गाड़ियां गुजरती हैं। जब भी कोई तेज रफ्तार वाहन यहां से निकलता है, तो पीछे धूल का ऐसा गुबार उठता है कि पीछे आने वाले चालकों को रास्ता दिखना बंद हो जाता है।

    इससे इस बदहाल सड़क पर हादसों का खतरा काफी बढ़ गया है। लगातार उड़ती धूल के कारण सड़क किनारे चलने वाले राहगीरों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया है। लोगों की आंखों में जलन और गले में संक्रमण की शिकायतें बढ़ रही हैं।

    प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि दोपहिया वाहन चालकों के कपड़ों पर और आंखों में कुछ ही मिनटों में धूल से भर जाते हैं। ऐसे में अचानक आंखों में धूल जाने से कभी भी हादसे का खतरा बना रहता है।

    स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क पर तुरंत डामर डालकर इसकी मरम्मत की जाए। धूल को उड़ने से रोकने के लिए जब तक पक्की सड़क नहीं बनती, तब तक कम से कम पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए ताकि लोगों को इस धूल भरी मुसीबत से कुछ राहत मिल सके।

    यहां से पैदल निकलना सजा जैसा है। धूल सीधे फेफड़ों में जाती है और आंखों में जलन होने लगती है। विभाग जल्द मरम्मत करे। - मनीराम पाल, स्थानीय निवासी

    गाड़ी चलाते समय सामने कुछ नहीं दिखता। गिट्टी में बाइक चले जाने पर अनियंत्रित हो जाती है और धूल चश्मे पर जम जाती है। प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। - बबलू राय, नियमित यात्री