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    'इस तरह से न तो डीटीसी का भला होगा और न ही हमारा...', DTC कर्मचारियों ने CM रेखा गुप्ता से रखी ये मांग

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 09:30 PM (IST)

    डीटीसी कर्मचारी निजी कंपनियों की ओर से लाई जा रहीं बसों से अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। वे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से डीटीसी द्वारा अपनी बसें चलाने ...और पढ़ें

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    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। डीटीसी में प्राइवेट कंपनियाें की ओर से बसें लाई जाती रहीं तो डीटीसी के कर्मचारियों को रोजगार कैसे मिलेगा? डीटीसी कर्मचारियों को अपने भविष्य को लेकर यह चिंता सता रही है। दिल्ली सरकार ने कुछ दिन पहले डिम्ट्स की बसों को डीटीसी को सौंपने का फैसला लिया है। इसके बाद से कर्मचारियाें की मांग तेज हो गई है।

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    कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मांग की है कि सरकार निजी कंपनियों की जगह अपनी बसें लेकर आए। उनकी मानें तो कंपनियों के माध्यम से बसें चलाने से न ही डीटीसी और न ही कर्मचारियों का भला होने वाला है।

    काम न होने से डीटीसी में इस समय 8000 के करीब चालक बसें न चलाकर अन्य काम में लगाए गए हैं। इन कर्मचारियों को डर यह सता रहा है कि अगर डीटीसी अपनी बसें लेकर नहीं आती है तो उनकी नौकरी ज्यादा दिन चल पाएगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

    पिछले कुछ सालों की स्थिति का आंकलन करें तो 2025 ऐसा साल रहा है जब दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) में एक साल में ही 5000 से अधिक बस चालकों के पास बस चलाने का काम काम नहीं रहा। दरअसल उम्र पूरी होने के कारण इस साल डीटीसी की 2500 से अधिक बसें सड़कों से हट गई हैं। ये बसें डीटीसी स्वयं चला रही थी।

    इन पर 5000 के करीब चालक लगे हुए थे। डीटीसी ने चालकों को बस चलाने की जगह बसों में टिकट जांच आदि काम में लगा रखा है। उधर इस साल डीटीसी में 1400 के करीब नई इलेक्ट्रिक बसें आई हुई हैं। मगर अधिकतर बसें कंपनियों के माध्यम से आई हैं। जिन पर डीटीसी का केवल कंडक्टर होता है चालक कंपनियों के अपने हैं।

    दरअसल पूर्व की आप की सरकार के समय में शुरू की गई इस योजना के तहत सरकार के फैसले के तहत जो व्यवस्था है उसमें प्राइवेट कंपनियां किलोमीटर स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक बसें चला रही हैं, उनमें कंडक्टर केवल डीटीसी का है और अन्य सभी व्यवस्थाएं कंपनियां अपने आप देख नहीं हैं। डीटीसी प्रति किलोमीटर के हिसाब से कंपनियों को भुगतान करती है।

    डीटीसी में इस समय लगभग 25 हजार अनुबंधित कर्मचारी हैं और लगभग सात 7 हजार पक्के कर्मचारी हैं। इनमें कुल मिलाकर 8000 के करीब चालक हैं। चालकों में 4500 के करीब अनुबंधित और 3500 के करीब स्थायी हैं।

    जानकारों की मानें तो डीटीसी में इस समय करीब 700 बसें हैं। इन पर ही डीटीसी के अपने चालक भी हैं। डीटीसी के कर्मचारियों का कहना है कि क्लस्टर सेवा के तहत नई आईं देवी बसों में कुछ डिपो में कंडक्टर भी निजी कंपनियों के हैं। इन हालातों को लेकर स्थाई और अनुबंधित दोनों तरह के कर्मचारी परेशान हैं।

    डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन ने डीटीसी में आ रहीं प्राइवेट कंपनी की बसों का कड़ा विरोध किया है। यूनियन का कहना है कि इन बसों में कम वेतन पर कंपनियों ने अपने चालक रखे हुए हैं। यूनियम के अध्यक्ष ललित चौधरी और महामंत्री मनोज शर्मा कहते हैं कि प्राइवेट कंपनियों के कई चालक कम अनुभवी हैं, यह एक मुद्दा है, मगर सबसे बड़ा मुद्दा है कि डीटीसी में प्राइवेट कंपनियों के माध्यम से बसें आएंगी तो डीटीसी के कर्मचारियों का भविष्य कैसे सुरक्षित बचेगा।

    इनकी मांग है कि डीटीसी अपनी बसें लाए और अंतरराज्यीय स्तर पर भी चलाए, इससे सरकार और डीटीसी को बहुत मुनाफा भी होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीएम रेखा गुप्ता जरूर उनकी मांग पर संज्ञान लेंगी। वहीं डीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि डीटीसी ने बसें कम होेने के बाद भी किसी कर्मचारी काे काम से नहीं हटाया है। चालकों को भी काम दिया हुआ है।

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