'उकासा', 'फैजान' और 'हाशमी'... पाकिस्तान में बैठे आकाओं से कोडनेम से होती थी बात; दिल्ली ब्लास्ट पर बड़ा खुलासा
दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट की जांच में 'व्हाइट-कॉलर' टेरर मॉड्यूल का खुलासा हुआ है। गिरफ्तार डॉक्टरों ने पाकिस्तानी हैंडलरों से संपर्क के ल ...और पढ़ें
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दिल्ली विस्फोट से जुड़े 'व्हाइट-कॉलर' टेरर मॉड्यूल की जांच में बड़ा खुलासा।
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पीटीआई, नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किले के पास पिछले साल 10 नवंबर हुए विस्फोट से जुड़े 'व्हाइट-कॉलर' टेरर मॉड्यूल की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार डॉक्टरों ने पाकिस्तानी हैंडलरों से संपर्क के लिए 'घोस्ट' सिम कार्ड्स और एन्क्रिप्टेड ऐप्स जैसे व्हाट्सऐप और टेलीग्राम का इस्तेमाल किया।
यह जांच तब सामने आया है, जब दूरसंचार विभाग (DoT) ने ऐप-आधारित संचार सेवाओं को डिवाइस में सक्रिय फिजिकल सिम से लगातार जोड़े रखने का आदेश दिया था।

जांच में पता चला कि आरोपी डॉक्टरों मुजम्मिल गनाई, अदील राथर और अन्य आरोपियों ने सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए 'डुअल-फोन' प्रोटोकॉल अपनाया था। प्रत्येक आरोपी के पास दो-तीन मोबाइल हैंडसेट थे।
एक फोन अपने नाम से रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए और दूसरा 'टेरर फोन' केवल पाकिस्तानी हैंडलरों से व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर बातचीत के लिए था। इससे कोडनेम 'उकासा', 'फैजान' और 'हाशमी' के नाम से बात होती थी।

अनजान लोगों के आधार कार्ड से लिए सिम कार्ड
इन सेकंडरी डिवाइस के सिम अनजान लोगों के आधार कार्ड से जारी किए गए थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड से सिम जारी करने का अलग रैकेट भी उजागर किया। आरोपियों में उमर-उन-नबी भी शामिल था, जो विस्फोटक से लदी गाड़ी चलाते हुए मारा गया।
हैंडलरों ने ऐप्स की उस सुविधा का फायदा उठाया जिसमें फिजिकल सिम के बिना भी मैसेजिंग जारी रहती है, जिससे वे पाकिस्तान या PoK से मॉड्यूल को यूट्यूब से IED बनाने की ट्रेनिंग दिलवा सके और भारत में हमले का प्लान बनवा सके।

केंद्र ने टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स लागू किए
इन सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए केंद्र ने दूरसंचार अधिनियम 2023 और टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स लागू किए। 28 नवंबर 2025 के दिशा-निर्देश में 90 दिनों के अंदर सभी टेलीकम्यूनिकेशन आइडेंटिफायर यूजर एंटिटीजको सुनिश्चित करना होगा कि उनके ऐप्स केवल सक्रिय सिम वाले डिवाइस पर ही काम करें। गैर-अनुपालन पर सख्त कार्रवाई होगी। यह कदम टेरर नेटवर्क की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को झटका देने वाला माना जा रहा है।

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