दिल्ली की सड़कों पर लगेंगे क्यूआर कोड वाले स्मार्ट इंडिकेटर, जानिए इसमें क्या-क्या मिलेंगी जानकारी
दिल्ली लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सभी सड़क संकेतकों पर QR कोड लगाने का निर्णय लिया है। यह रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइन ...और पढ़ें
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दिल्ली में सड़कों पर लगेंगे क्यूआर कोड वाले स्मार्ट इंडिकेटर।
HighLights
सभी सड़क संकेतकों पर लगेंगे क्यूआर कोड, बेहतर जानकारी हेतु।
वारंटी, कंपनी का नाम, स्थापना तिथि की जानकारी उपलब्ध।
सड़क संकेतों के रखरखाव और जवाबदेही में सुधार होगा।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने दिल्ली के सभी सड़क संकेतकों पर क्यूआर कोड लगाने का निर्णय किया है। इससे अनिवार्य करने के दिशा निर्देश जारी किए हैं। यह विभाग के अंतर्गत आने वाली सभी सड़कों पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड को अपग्रेड करने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।
क्यूआर कोड से साइनबोर्ड के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी, जिसमें वारंटी और इसे लगाने वाली कंपनी का नाम और लगाने की तारीख भी होगी। इसे लगाने वाली कंपनी की 10 साल की वारंटी भी रहेगी।
एक पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में केवल बुनियादी क्यूआर कोड विवरण ही उपलब्ध कराए जाएंगे। दूसरे चरण में साइनबोर्ड के बारे में अधिक जानकारी और शिकायत दर्ज करने की सुविधा जोड़ी जा सकती है। हालांकि इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनों को अपग्रेड करने के लिए चल रहे अभियान के तहत विभाग ने साइनबोर्डों के रखरखाव और स्थापना के दौरान पालन किए जाने वाले मानकीकृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके लिए दिशानिर्देशों का एक नया सेट जारी किया गया है, जिसका पालन साइनबोर्डों के रखरखाव कार्य के दौरान किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी के आदेश में कहा गया है कि रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनबोर्डों में अनिवार्य रूप से क्यूआर कोड होना चाहिए।
लोक निर्माण विभाग के पास 1440 किलोमीटर लंबी सड़कें हैं। एक तरह से दिल्ली की मुख्य सड़कें इसी विभाग के पास में हैं जो इन सड़कों को बनाने के साथ-साथ इनका रखरखाव भी करता है। सड़कों पर दिशा सूचक लगाने से लेकर अन्य सभी तरह की जिम्मेदारी भी इसी विभाग के पास हैं। दिल्ली में यह समस्या कई इलाकों में देखी जा सकती है कि संकेतक या दिशासूचक बोर्ड या तो टूटे हुए हैं या उन पर लिखा हुआ मिट रहा है।
कई बार ऐसा देखा जाता है कि ये खराब हो जाते हैं और उसके बाद काफी दिनों तक टूटे रहते हैं। विभाग ने अब नई व्यवस्था के तहत लगने वाले संकेतकों पर उन कंपनियों का नाम भी अंकित रखने का फैसला लिया है जिनके द्वारा इन्हें लगाया जाएगा। क्यूआर कोड के माध्यम से इन बोर्ड पर जानकारी उपलब्ध रहेगी। इसका मकसद साइन बोर्ड को लंबे समय तक बेहतर और व्यवस्थित रखना है।
