दिल्ली की 573 अनधिकृत कॉलोनियों की बड़ी समस्या होगी दूर, 300 मशीनों से होगी सेप्टिक टैंकों की मुफ्त सफाई
दिल्ली की 573 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन न होने से सफाई समस्या बनी हुई है। ठेकेदार सेप्टिक टैंक का ...और पढ़ें

HighLights
573 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन की कमी
दिल्ली जल बोर्ड 300 मशीनों से करेगा निःशुल्क सफाई
12 लाख लोगों को लाभ, यमुना प्रदूषण में कमी
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी के 573 अनधिकृत काॅलोनियों में अभी तक सीवर की सुविधा नहीं हैं। इस कारण सफाई की समस्या बनी रहती है। इन काॅलोनियों के निवासी ठेकेदारों को पैसे देकर सेप्टिक टैंक की सफाई कराते हैं।
कई ठेकेदार सेप्टिक टैंक की गंदगी नालों में या खुले में डाल देते हैं। नालों के माध्यम से गंदगी यमुना में पहुंच रही है। प्रतिबंध के बावजूद कई स्थानों पर मशीन की जगह सफाई कर्मियों से सेप्टिक टैंक की सफाई कराई जाती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसके समाधान के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने मशीन से सेप्टिक टैंक की निशुल्क सफाई कराने का निर्णय लिया है।
दिल्ली में कुल 1799 अनधिकृत काॅलोनी हैं। इनमें से 1226 में ही सीवर लाइन की सुविधा है। 154 में सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। जल बोर्ड ने वर्ष 2028 तक पूरी दिल्ली में सीवर लाइन की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
अभी जिन काॅलोनियों में सीवर लाइन नहीं है वहां सेप्टिक टैंक की सफाई करने के लिए बोर्ड ने 152 ठेकेदारों को लाइसेंस दिया है। नियम के अनुसार उन्हें अपशिष्ट इकट्ठा कर 86 सीवरेज पंपिंग स्टेशन तक पहुंचाना होता है। ठेकेदार लोगों से सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए लगभग तीन हजार रुपये वसूलने के बाद भी इस नियम का पालन नहीं करते हैं। वह अपशिष्ट नालों में बहा देते हैं।
सफाई कर्मियों से सेप्टिक टैंक की सफाई कराने की भी शिकायत मिलती है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1993 से वर्ष 2024 तक सीवर व सेप्टिक टैंक की सफाई करते हुए पूरे देश में 1200 लोगों की जान चली गई है। इसमें 133 लोगों की मौत दिल्ली में हुई है।
जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या का समाधान किया जा रहा है। अनधिकृत काॅलोनियों से सभी ठेकेदारों को हटाकर जल बोर्ड अपने संसाधन से निशुल्क सफाई कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए 300 सेप्टिक टैंक सफाई मशीन तैनात किए जाएंगे। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सुविधा उपलब्ध कराने वाले ऑपरेटरों को एसटीपी में एकत्रित किए गए सीवेज के आधार पर भुगतान किया जाएगा। इससे अनधिकृत काॅलोनियों में सफाई व्यवस्था सुधरने के साथ ही यमुना को स्वच्छ करने में मदद मिलेगी।
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