दिल्ली की 'पावर बैंकिंग', सर्दी में दूसरे राज्यों को बिजली देकर गर्मी में लेगी वापस
दिल्ली अपनी बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए 'पावर बैंकिंग' का उपयोग कर रही है। सर्दियों में अतिरिक्त बिजली अन्य राज्यों को देकर, गर्मियों में वाप ...और पढ़ें

दिल्ली में बिजली की बढ़ रही मांग की आपूर्ति चुनौती बनी हुई है।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में बिजली की बढ़ रही मांग की आपूर्ति चुनौती है। गर्मी के दिनों में बिजली की मांग 86 मेगावाट से ऊपर तक पहुंच चुकी है। इस बार यह नौ हजार मेगावाट को पार कर सकती है। इसे ध्यान में रखकर दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) तैयारी में जुट गई हैं। बिजली वितरण कंपनियों के दीर्घकालिक और अल्पकालिक समझौतों के साथ ही पावर बैंकिंग से बिजली की व्यवस्था की जा रही है।
पावर बैंकिंग व्यवस्था के अंतर्गत सर्दियों में जब बिजली की मांग कम होती है तो दिल्ली अपने हिस्से की बिजली उन राज्यों को दे देती है जहां इस मौसम में मांग अधिक होती है। गर्मियों में उनसे उतनी बिजली वापस ले ली जाती है। इस बार तीन सौ मेगावाट से अधिक बिजली की व्यवस्था पावर बैंकिंग से की जा रही है। बीएसईएस इस सर्दी में अपने हिस्से की बिजली गोवा, केरल, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर को दे रही है।
बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड अपने हिस्से का 270 मेगावाट और बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड 70 मेगावाट बिजली इन राज्यों को उपलब्ध करा रही है। डिस्काम अधिकारियों का कहना है पावर बैंकिंग व्यवस्था से बिजली उत्पादन संयंत्रों के बेहतर उपयोग, मौसमी मांग के अनुसार मांग में उतार-चढ़ाव को प्रबंधित करने और लागत दक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। साथ ही ग्रिड की विश्वसनीयता और क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को बढ़ाता है।
उनका कहना है कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में सर्दी में भी अधिक मांग रहने का अनुमान है। पिछले वर्ष सर्दी के मौसम में अधिकतम मांग 5655 मेगावाट थी। इस बार भी एक जनवरी को मांग 5603 मेगावाट पहुंची थी। आने वाले दिनों में और वृद्धि होने की संभावना है।

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