दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में रिटायर्ड पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति का विरोध, कहा-युवाओं के रोजगार पर संकट
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में सेवानिवृत्त पैरामेडिकल कर्मियों को दोबारा काम पर रखने के सरकार के फैसले का पैरामेडिकल कर्मचारी यूनियन विरोध कर रही है। ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। स्वास्थ्य विभाग की पैरामेडिकल कर्मचारी यूनियन ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर सरकार सेवानिवृत्त पैरामेडिकल कर्मियों को दोबारा काम पर रखने जा रही है। यूनियन का कहना है कि इस फैसले का वे विरोध करते हैं और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
नेशनल पैरामेडिकल हेल्थ एसोसिएशन (एनपीएचए) के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए सरकार नई और नियमित भर्तियों से बचने का रास्ता अपना रही है। यूनियन का आरोप है कि पुराने कर्मचारियों को कंसल्टेंट के रूप में कांट्रैक्ट आधार पर दोबारा नियुक्त करने से हजारों योग्य और प्रशिक्षित युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे। यूनियन का कहना है कि वर्तमान में दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जबकि केवल सीमित प्रतिशत कर्मचारी ही पक्के हैं और शेष कर्मचारी ठेके पर कार्य कर रहे हैं।
यूनियन के मुताबिक, दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों को निर्देश जारी किए हैं कि वे सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन, नर्स और अन्य सहायक कर्मचारियों को, यदि वे इच्छुक हों और उनका सेवा रिकार्ड साफ हो, तो अस्थायी रूप से दोबारा काम पर रखें। कर्मचारी यूनियन ने मांग की है कि सेवानिवृत्त कर्मियों को वापस बुलाने के बजाय चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) के माध्यम से परीक्षा कराकर खाली पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती सुनिश्चित की जाए।

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