Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    'गुजारा भत्ता में पति की विदेशी आय को भारतीय मुद्रा में नहीं बदला जा सकता', दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 09:10 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ता मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए पति की विदेशी आय को सीधे भारत ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    पति की विदेशी आय को सीधे भारतीय मुद्रा में नहीं बदला जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट।

    विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। भरण-पाेषण से जुड़े मामले में पारिवारिक अदालत के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए पति की विदेशी आय को सीधे भारतीय मुद्रा में नहीं बदला जा सकता।

    न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि सिर्फ विदेशी मुद्रा में कमाने से ही पत्नी को पति की विदेशी आय को सीधे भारतीय मुद्रा में बदलकर और मौजूदा परिस्थितियों पर ध्यान दिए बिना भारतीय अदालतों द्वारा बनाए गए फार्मूले को लागू करके गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार नहीं मिल जाता।

    पीठ ने कहा कि पति को विदेशी मुद्रा में खर्च करना पड़ता है और अमेरिका में रहने की लागत को दिल्ली में रहने की लागत के बराबर नहीं माना जा सकता। पत्नी के नौकरी नहीं करने की स्थिति को देखते हुए अदालत ने अंतरिम गुजारा भत्ता बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति माह कर दिया। पारिवारिक अदालत ने पहले पति को अपनी पत्नी को अंतरिम गुज़ारा भत्ता के तौर पर हर महीने 50,000 रुपये देने का निर्देश दिया था।

    अदालत ने उक्त आदेश पति और पत्नी दोनों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया। इसमें पारिवारिक अदालत के अंतरिम गुजारा भत्ता आदेश को चुनौती दी गई थी। पारिवारिक अदालत ने पत्नी को 50,000 रुपये का गुज़ारा भत्ता देने का आदेश दिया गया था। पत्नी ने गुजारा भत्ता राशि बढ़ाने की मांग की थी, जबकि पति ने राशि कम करने की मांग की थी।

    पत्नी ने दलील दी कि उसका पति अमेरिका में अमेजन में काम करता है और सालाना एक करोड़ रुपये से ज्यादा कमाता है। महिला ने कहा था कि वह बेरोजगार है और उसकी आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है। वहीं, पति ने तर्क दिया कि उसकी पत्नी बहुत पढ़ी-लिखी है और कमाने की क्षमता होने के बावजूद उसने स्वेच्छा से अपनी नौकरी छोड़ दी थी।

    कोर्ट ने कहा कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का पवित्र कर्तव्य का मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि पति की पूरी आय को गुजारा भत्ता की राशि में बराबर या आनुपातिक रूप से शामिल किया जाए। हालांकि, महिला के नौकरी नहीं करने की स्थिति को देखते हुए अदालत ने अंतरिम गुजारा भत्ता को 50,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति माह करने का आदेश दिया।

    यह भी पढ़ें- दिल्ली की 'पावर बैंकिंग', सर्दी में दूसरे राज्यों को बिजली देकर गर्मी में लेगी वापस