दिल्ली HC ने जबरन सिग्नेचर के आरोपों वाली याचिका की खारिज, सलीम अहमद को नहीं मिली राहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी सलीम अहमद की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उसने जेल में जबरन कागजों पर हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया था। मकोका के तहत गिरफ्त ...और पढ़ें

दिल्ली हाईकोर्ट।
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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसे आरोपी की याचिका खारिज कर दी है, जिसने दावा किया था कि पुलिस ने उसे जेल में जबरन कागजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया था।
आरोपी का आरोप था कि उससे जबरन ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए, जिनका इस्तेमाल उसके खिलाफ सबूत के रूप में किया जा सकता है। लेकिन अदालत ने साफ कहा कि इस तरह के आरोप पहले ही ट्रायल कोर्ट में उठाए जा चुके हैं और वहां इन दलीलों को पहले ही खारिज किया जा चुका है, इसलिए इन्हें दोबारा मानने का कोई आधार नहीं बनता।
यह याचिका सलीम अहमद ने दाखिल की थी, जिसे मकोका के तहत गिरफ्तार किया गया है। सलीम अहमद पर कुख्यात गैंगस्टर हाशिम बाबा के संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़ा होने का आरोप है। उसे चार नवंबर को दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर गिरफ्तार किया गया था और उस पर संगठित अपराध से जुड़ी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है।
आरोपी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि जेल अधिकारियों और जांच एजेंसी ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए उसे जेल में बुलाकर खाली और आधे भरे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करवाएं। उसका कहना था कि इन दस्तावेज का इस्तेमाल उसके खिलाफ कबूलनामे के रूप में किया जा सकता है।
वहीं, आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी थी कि दबाव और जबरदस्ती से लिए गए ऐसे हस्ताक्षर अवैध हैं और इनकी कोई कानूनी वैधता नहीं होनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि आरोपित की यह दलील पहले ही ट्रायल कोर्ट में रखी जा चुकी थी और वहां इसे तथ्यहीन मानते हुए खारिज कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि जब ट्रायल कोर्ट ने इस मुद्दे को विस्तार से सुनकर निर्णय दे दिया है, तो अब इस पर दोबारा राहत देने का कोई कारण नहीं है।
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अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपित ने अपनी गिरफ्तारी या रिमांड प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी, बल्कि केवल दस्तखत संबंधी आरोप लगाए, जो अपने आप में पर्याप्त नहीं हैं।

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