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    विदेशी मुद्रा में कमाई को लेकर गुजारा भत्ता तय करने पर HC ने कहा-रुपये में कन्वर्ट करके तय नहीं कर सकते भत्ता

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 09:18 PM (IST)

    दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम गुजारा भत्ता पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि विदेशी मुद्रा में कमाई को सीधे भारतीय रुपये में बदलकर गुजारा भत् ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला के अंतरिम गुजारा भत्ता की राशि बढ़ाते हुए स्पष्ट किया है कि इस तरह की राशि का निर्धारण किसी गणितीय फार्मूले से नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि केवल विदेशी मुद्रा में कमाई होना, पति की आय को सीधे भारतीय मुद्रा में बदलकर गुजारा भत्ता तय करने का आधार नहीं बन सकता।

    न्यायमूर्ति अमित महाजन पति और पत्नी दोनों की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। पारिवारिक अदालत ने मई 2023 में महिला को 50 हजार रुपये मासिक अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। पत्नी ने इस राशि को कम बताते हुए बढ़ोतरी की मांग की थी, जबकि पति ने आदेश को ही चुनौती दी थी।

    हाईकोर्ट ने अंतरिम गुजारा भत्ता की राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति माह कर दी और कहा कि यह व्यापक, संतुलित और व्यावहारिक आकलन के आधार पर तय की गई है। कोर्ट ने कहा था कि अंतरिम गुजारा भत्ता तय करना गणितीय सटीकता वाला अभ्यास नहीं है। खासकर उन मामलों में, जहां पति या पत्नी में से कोई एक विदेश में कार्यरत हो और अपनी आय की पूरा व स्पष्ट जानकारी न दी हो, वहां अदालत को अनुमान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संतुलित आकलन करना पड़ता है।

    अदालत ने कहा कि अंतरिम चरण में विस्तृत या अंतिम जांच संभव नहीं होती और उपलब्ध सामग्री, परिस्थितियों, जीवनशैली के संकेतकों व कमाने वाले पक्ष की स्वीकार की गई आय क्षमता के आधार पर एक उचित राशि तय करनी होती है।

    हाईकोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि पति अमेजन डाॅट काम सर्विसेज एलएलसी में साॅफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत है और अमेरिका में रह रहा है, जबकि पत्नी बेरोजगार है। पत्नी ने पति की सालाना आय लगभग 1.76 करोड़ रुपये होने का दावा किया था और अमेरिकी डाॅलर में आय व उसके रूपांतरण से जुड़ा हलफनामा भी दाखिल किया था।

    अदालत ने कहा कि विदेश में रहने और विदेशी मुद्रा में कमाई करने के कारण पति को वहीं के अनुसार खर्च भी उठाने पड़ते हैं और अमेरिका की जीवन-शैली व जीवन-यापन की लागत की तुलना दिल्ली से नहीं की जा सकती। इसलिए पति की पूरी आय को सीधे गुजारा भत्ता से जोड़ना उचित नहीं होगा।

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